Covid 3rd Wave: कोरोना की तीसरी लहर से भी बड़ी है मोदी की तीसरी लहर !

भारत में कोरोना केसेज लगातार बढ़ रहे हैं. शहरों में प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं. स्कूल – कॉलेज बंद कर दिए गये हैं. यूपी बोर्ड का एग्जाम पोस्टपोन हो चुका है. कई जगहों पर नाईट कर्फ्यू लगाया गया है. चुनाव आयोग 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में है. आचार संहिता लगने के एक दिन पहले तक राज्यों में ताबड़तोड़ रैलियां हो रही थी.

शायद कोरोना राजनैतिक रैलियों में नहीं जाता. चाहे वह मोदी हों या केजरीवाल. उनके मुंह पर मास्क हो या न हो. कोरोना वहां कदम भी नहीं रखता. कोरोना की दूसरी लहर में ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान शिक्षकों के पॉजिटिव होकर मरने की खबर आई थी. लेकिन इस पर भी कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया. शिक्षक ही तो हैं. मरते हैं तो मरने दो, चुनाव तो हुआ ना. यूपी में शिक्षक संघ ने जहां 706 शिक्षकों की मौत का दावा किया था. वहीँ यूपी सरकार ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया था. सरकार के अनुसार, चुनाव के दौरान केवल 3 शिक्षकों की मौत हुई थी.

प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा ढेरों काम होते हैं. जिनकी उन्हें तनख्वाह मिलती है. लेकिन वहीँ प्राइवेट स्कूल का हाल यह है कि स्कूल बंद होने पर टीचर्स को तनख्वाह देना तक मुश्किल हो जाता है. पिछले दो बार के अनुभवों में देश के शिक्षकों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. ये वही जानते हैं. कुछ शिक्षकों को तो ठेले पर सब्जी भी बेचना पड़ा. लेकिन इसके लिए सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. अभी देश एक बार फिर से लॉकडाउन की स्थिति में है. कोरोना फिर से हावी हो रहा है.

पिछले अनुभवों के आधार पर हम यह भी मान सकते हैं कि कोरोना एक सूक्ष्म मानव है. जिसके पास सोचने समझने की शक्ति है. उसे पता है कि कहां जाना है और कहां नहीं जाना है. उसे पता है कि वह स्कूल में बच्चों पर तो हावी हो सकता है. लेकिन वहीँ राजनैतिक रैली में उसे जाने से डर लगता है. वह सोचता है कि कहीं चुनावी रैली में जाने पर वहीँ दबदबाकर मर गये तो कोरोना का नामोनिशान मिट जाएगा.

80-90 के दौर में एक गाना आया था “धूप में निकला न करो रूप की रानी…”. ये गाना कोरोना पर काफी हद तक मैच करता है. क्योंकि लड़कियां धूप में घर से बाहर निकलेंगी नहीं, और जब रात में निकलेंगी, तो उन्हें कोरोना पकड़ लेगा. इसलिए राज्य सरकारों ने कई जगह नाईट कर्फ्यू लगा दिया है. अब कोरोना को नाईट कर्फ्यू से काफी डर लग रहा है. उसे अब दिन का ही सहारा है. लेकिन दिन में भी उसे कई जगहों पर जाने एलर्जी है. जैसे चुनावी रैली, धरना प्रदर्शन, मतगणना स्थल आदि. सरकार का यह फैसला देखकर तो यही लग रहा है कि जब कोरोना को रोकना है और लॉकडाउन भी नहीं लगाना है. तो सरकार ने मजबूरन यह फैसला लिया है. अब जब देश के 5 राज्यों में चुनाव होना है. तो चुनाव आयोग यह भी तय कर दे कि चुनाव में लाइन से जो शिक्षक बैठकर ड्यूटी करेंगे. उन्हें कोरोना होगा या नहीं !

पिछले वर्ष बंगाल चुनाव में मोदी जी की रैली में कई नेता कोरोना का शिकार हुए लेकिन वहीँ ममता दीदी की रैली से कोरोना बहुत दूर भाग गया. अब जबकि यूपी समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने को हैं. तो इसे देखकर ऐसा लगा रहा कि कोरोना की तीसरी लहर से खतरनाक है. जिसे देखते ही कोरोना काफी दूर से ही भागेगा.

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