चुनाव नतीजों के बाद वामपंथियों को मिला बर्नोल, लेकिन उसके बाद जो हुआ …

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव बीत चुके हैं. होली का त्यौहार भी बीत चुका है. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. मंत्री मंडल के बंटवारे की तैयारी चल रही है. अखिलेश यादव, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत जो लोग (वामपंथी) भाजपा का बाजा बजवा रहे थे. जनता ने उन्हें 10 मार्च को नतीजों के साथ ही होली के उपहार स्वरूप बर्नोल भेंट कर दिया. अभी बर्नोल लगाने की तैयारी चल ही रही थी कि तब से 11 मार्च को ‘द कश्मीर फाइल्स’ वामपंथियों के छाती पर मूंग दलने का काम करने लगी.

अखिलेश यादव के समर्थक तो चुनाव नतीजों के पहले ही चुनाव जीतने की घोषणा कर चुके थे. शायद भगवान कृष्ण ने सपने में आकर बोला होगा कि इस बार उनकी सरकार बन रही है. सपा कार्यकर्ताओं ने तो अखिलेश यादव को भगवान कृष्ण, विनायक और न जाने क्या क्या बना दिया था. इतना ही नहीं, कुछ कार्यकर्ताओं ने तो नतीजों के आने के एक दिन पहले ही लखनऊ में बड़े-बड़े पोस्टर लगवा दिए थे. जिसमें अखिलेश यादव को दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने की बधाई लिखी हुई थी. लेकिन नतीजों के आने के बाद इतना बौखला गए कि ‘इवीएम बेवफा है’ का नारा जपने लगे. अक्की भैया ने कुछ दिनों पहले एक प्रेस वार्ता में कहा था कि उनके सपनों में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं आकर उनसे कहा है उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने जा रही है. माना जाता है कि अखिलेश भैया पूर्णतः टीटोटलर हैं परंतु कई बार इत्र की सुगंध भी नाक के साथ-साथ मस्तिष्क को ऐसा आनंदित कर देती है कि मनुष्य कुछ भी देखने, सुनने और सोचने लगता है.

कांग्रेस सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी है. नतीजों के आने के बाद सोनिया गांधी को लगा कि अब उनसे नेतृत्व नहीं हो रहा तो वे अपनी जिम्मेदारी राहुल गांधी को सौंप देती हैं. कांग्रेस के इतिहास में 1885 से 2022 तक 59 लोग कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. जिसमें 21 साल तक नेहरु, इंदिरा और राजीव गांधी अध्यक्ष पद पर रहे. बाकी के बचे वर्षों में एक औसत निकालने पर पता चलता है कि औसतन प्रति व्यक्ति 1.6 वर्ष अध्यक्ष पद पर रहा. 1998 से 2022 तक 24 वर्ष के कांग्रेस के सफर में सोनिया गांधी अध्यक्ष पद पर आसीन हैं. बीच में 2 वर्ष तक उन्होंने अपना कार्यभार राहुल गांधी को दिया था. बाकि 22 वर्ष से कांग्रेस का पूरा कार्यभार अपने कंधे पर संभाला हुआ है. 6 बार से लगातार सोनिया गांधी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव जीत रही हैं. लेकिन इस दौरान वे एक बार अपने ही बेटे से चुनाव हार गईं थी. इस बार भी हर बार की तरह ही कांग्रेस ने एक मीटिंग बुलाई. जिसमें पांच घंटे के लम्बे डिस्कशन के बाद पता चला कि समस्या अत्यंत गंभीर हो गई है, अब तो कांग्रेस के अध्यक्ष बदलने ही पड़ेंगे. अब इससे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी कौन सी होगी कि पांच राज्यों में करारी हार के बाद अध्यक्ष बदल दिए गए. वह बात अलग है कि राष्ट्रीय तौर पर शीर्ष नेतृत्व में वही मां और बेटे की अदला बदली चलती रहती है.

राहुल गांधी ने लोगों से हाथ मिलाना तक बंद कर दिया है. उनका कहना है कि लोग हाथ तो मिलाते हैं, लेकिन हाथ के निशान पर वोट नहीं देते. राहुल गांधी ने तो 2016 में नोटबंदी के दौरान अपने फटे हुए कुर्ते को भी सिल्वा लिया था. क्योंकि उन्हें लग रहा था कि उनकी सरकार आने वाली है. इन सब के बाद से राहुल गांधी थाईलैंड प्रवास पर निकल चुके हैं. उधर प्रियंका गांधी ने भी उत्तर प्रदेश चुनाव में पहनी हुई साड़ियों को धोबी के यहां धुलवाकर चकाचक स्त्री करवा कर काठ के संदूक में गुजरात चुनाव के लिए रखवा लिया है. उनका कहना है कि अब किसी बिकिनी गर्ल को टिकट नहीं दिया जाएगा. मिनी स्कर्ट को ही न्यूनतम योग्यता माना जाएगा. क्योंकि वामपंथनों की फ़िल्में तो लोग देखते हैं. लोग वामपंथनों द्वारा बनाई गई फ़िल्में लोग नहीं देखते.

वामपंथनें अब अगला मौका ढूंढ रही हैं, जब आन्दोलन के आड़ में वह कांड हो सकें जो परदे के आड़ में नहीं कर सकते. वह बात अलग है कि शाहीन बाग़ आन्दोलन और किसान आन्दोलन में क्या क्या हुआ. ये पूरा देश जानता है. वामपंथनों का क्या है, वे तो बस देखना चाहती हैं. क्या देखेंगी यह तो अभी तक समझ नहीं आया.

द कश्मीर फाइल्स के लिए मोदी जी ने कहा कि जिन्हें फिल्म पसंद न आई हो, उनके लिए दूसरी फिल्म भी बनाई जा सकती है. आखिर मोदी जी ये क्यों नहीं समझ पाते हैं कि गर्लफ्रेंड बनाने और फिल्म बनाने में अंतर होता है. वामपंथी पत्रकार रविश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट पर द कश्मीर फाइल्स के साथ ही शिकारा देखने को कहा. आपदा में अवसर ढूंढना रविश को अच्छे से आता है. वे इसमें माहिर भी हैं. राज्यसभा में एक सांसद हैं, जो पहले टिकट वगैरह बेचने का काम करते थे. रविश को उनसे आईडिया लेना चाहिए कि इस फिल्म के साथ उस फिल्म का टिकट लोगों तक कैसे पहुंचाएं.

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