प्रदूषित हो रही वाराणसी की हवा: 5 दिन में 24 हजार लोगों ने स्वच्छ हवा की मांग की, कहा – “स्वच्छता अभियान में शामिल हो स्वच्छ हवा”

वाराणसी की हवा कितनी प्रदूषित हुई है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्सी घाट पर लगाया गया कृत्रिम फेफड़ा महज 72 घंटे में काला हो गया. इस कृत्रिम फेफड़े में हाई क्वालिटी का फ़िल्टर लगाया गया था.

अस्सी घाट पर लगाया गया यह कृत्रिम फेफड़ा महज 3 दिनों में काला हो गया

जिसके बावजूद यह मात्र 72 घंटे में ही काला हो गया. ऐसे में वाराणसी में स्वच्छ हवा के लिए जा रहे क्लाइमेट एजेंडा संस्था के अभियान का समर्थन बीते 5 दिन में 4 हजार से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन और 20 हजार से ज्यादा लोगों ने ऑफलाइन किया है. संस्था के लोगों का कहना है कि इस अभियान को हम आगे भी जारी रखेंगे.

हमारा लक्ष्य है कि 50 हजार समर्थन के साथ प्रदेश और देश की सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग से संबंधित मंत्रालय को एक मांग पात्र सौंपा जाए. पत्र में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना का कठोर तरीके से समयबद्ध अनुपालन की मांग की जाएगी.

हवा की गुणवत्ता सबसे पहले बेगलुरु में परखी गई

सार्वजनिक स्थान पर कृत्रिम फेफड़े लगाकर हवा की गुणवत्ता को परखने का प्रयोग सबसे पहले झटका नामक संस्था ने बेंगलुरु में किया था. वहां कृत्रिम फेफड़े काले होने में 18 दिन लगे थे. इसके बाद हेल्प डेल्ही ब्रीद अभियान ने इसे दिल्ली में किया जहां इसे काले होने में 6 दिन लगे थे. बताया जा रहा है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में स्वच्छ हवा अभियान से जुड़े सहयोगी संगठन और संस्थाएं इसे उत्तर भारत के अन्य शहरों में भी 100 प्रतिशत आयोजित करेंगे.

वाराणसी के मैदागिन स्थित पराड़कर भवन में क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक सानिया अनवर ने कहा कि देश भर में स्वच्छ भारत अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है. लेकिन, स्वच्छ हवा के सवाल को स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा नहीं बनाया गया. केवल सड़कों को चमकाने पर सारा ध्यान लगाने से ही वायु प्रदूषण का संकट और गंभीर बनता जाएगा. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना के माध्यम से स्वच्छ हवा को मूलभूत अधिकार घोषित करना चाहिए.

साथ ही, सरकारों के द्वारा अपनाई जा रही कोशिशों में आम जनता को भी सहयोग करना होगा. वायु प्रदूषण एक वैश्विक सवाल है जो अकेले किसी संस्था, अभियान, जनता या सरकार की पहल से हल नहीं होगा. सार्वजनिक परिवहन और सौर ऊर्जा के ज्यादा से ज्यादा उपयोग से हर व्यक्ति वायु प्रदूषण को कम करने में सहायता कर सकता है.

राजनैतिक दलों का भी होगा साथ

एकता शेखर ने कहा सफेद फेफड़ों का 72 घंटों में काला हो जाना इस बात का प्रमाण है कि वाराणसी समेत प्रदेश के अन्य शहरों में वायु प्रदूषण अब एक गंभीर समस्या बन चुका है. हम आम जनता से लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच जागरूकता पैदा करने की दृष्टि से अभियान चला रहे हैं. अभियान के अगले चरण में हमारी टीम अब मुख्य धारा के सभी राजनितिक दलों का प्रदूषण के मुद्दे पर ध्यानाकर्षण का प्रयास करेगी.

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, अभियान दल सभी दलों के कार्यालय में जाकर उन्हें ज्ञापन सौंपेगा और उन्हें प्रदूषण के स्थायी हल का वाहक बनने के लिए प्रेरित करेगा. बनारस में वर्तमान में विद्युत् वाहन और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जो परिवर्तन दिख रहे हैं वे सुखद होने के साथ-साथ नाकाफी हैं. एकता ने आगे कहा कि शहर में कचरा निस्तारण का कोई प्राथमिक समाधान अब तक नहीं मिल सका है. साथ ही, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्ययोजना का शिथिल अनुपालन भी वायु प्रदूषण के संकट को और बढ़ा रहा है.

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