वाराणसी के इस सरकारी स्कूल में चलती हैं स्मार्ट क्लासेज, स्टूडेंट्स को मिलती हैं प्राइवेट स्कूल जैसी फैसिलिटीज़

वाराणसी के मंडुआडीह क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल की महज़ एक साल में तस्वीर बदल गई. यहां अब प्राइवेट स्कूल जैसी फैसिलिटीज़ मिलने लगी हैं. एक साल पहले यहाँ ढंग के क्लासरूम भी नहीं थे, पानी, बिजली, फर्नीचर जैसी चीजें भी लाचार हालात में थी.  स्कूल के नाम पर पांच कमरों का पुराना भवन था. मगर, महज एक साल में इस स्कूल की तस्वीर बदल गई.

स्मार्ट क्लासेज, 24 घंटे बिजली, और बहुत कुछ…

सरिता राय को इस स्कूल के प्रिंसिपल का चार्ज 2018 में मिला था. तब यह स्कूल सभी 19 पैरामीटर्स पर फिसड्डी था. अब यहां पर स्मार्ट क्लासरूम, 24 घंटे बिजली, मिनरल वाटर, प्रोजेक्टर रूम, ऑफिस और फर्नीचर, सीसीटीवी कैमरा सब कुछ है. स्कूल में बेहतर काम के लिए प्रिंसिपल सरिता राय को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. पूरे प्रदेश से 75 टीचरों को इस सम्मान के लिए चुना गया है. इसमें हर जिले से एक टीचर हैं और वाराणसी से सरिता राय को सेलेक्ट किया गया है.

वाराणसी का यह नं० 1 स्कूल: सरिता राय

प्रिंसिपल सरिता राय ने कहा, ”यह सारा काम उन्होंने आसपास के लोगों से मदद मांग कर किया है. फर्नीचर और प्रोजेक्टर की व्यवस्था खुद के बेटी और बेटे ने कर दिया. बाकी चीजों के लिए हम सरकारी फंड का इंच नहीं कर सकते थे. इसलिए कम्युनिटी लेवल पर उतरे, लोगों से मिलना-जुलना हुआ और मदद मांग-मांगकर स्कूल में सारी मॉडर्न व्यवस्था की. आज हमारा स्कूल सभी 19 पैरामीटर पर वाराणसी का सबसे बेहतर सरकारी विद्यालय बन गया है. कायाकल्प के मामले में वाराणसी का यह स्कूल नंबर 1 पर चल रहा. 19 पैरामीटर में क्लास रूम, शौचालय बालक-बालिका अलग-अलग, रनिंग वाटर, टाइल्स, फर्नीचर और प्रोजेक्टर है.”

पहले थे 164 बच्चे, 2022 में 265

सरिता राय ने बताया कि 2018 में स्कूल की जिम्मेदारी मिली तो यहां पर 164 बच्चे पढ़ते थे, मगर आज यह संख्या बढ़ कर 265 हो गई है. स्कूल में इतनी जगह नहीं है कि सभी बच्चों को एक साथ पढ़ाया जा सके. स्कूल, पार्क और ऑफिस आदि में भी बच्चों को बैठाकर पढ़ाते हैं. हमें इन बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह की कमी पड़ रही है. कोविड काल में सरिता राय ने मोहल्ला क्लास चलाया था. लोगों के घर जाकर पढ़ाती थीं.

इसी स्कूल की बच्ची ने पीएम मोदी को सुनाई थी कविता

सोमवार को 10 जिलों के टीचरों को लखनऊ बुलाया जाएगा. बाकी का सम्मान वाराणसी में ही होगा. अभी कौन टीचर लखनऊ जाएगा, इसकी लिस्ट जारी नहीं हुई है. सरिता राय ने बताया कि इस सम्मान के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरा गया था. इसमें टीचिंग लर्निंग मैकेनिज्म और 19 पैरामीटर्स पर स्कूलों की जांच-परख हुई. हाल ही में इस स्कूल की चौथी क्लास की एक बच्ची जान्हवी ने वाराणसी के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कविता सुनाई थी, जो काफी वायरल हुई थी.

ये रहा अध्यापिका के तौर पर सरिता राय का सफर

प्रथम नियुक्ति 1 दिसंबर 1999 को प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह, में सहायक अध्यापक पद पर. 31 दिसंबर 2009 को पूर्व माध्यमिक विद्यालय, केराकतपुर में सहायक अध्यापक पद पर कार्यभार मिला. इंग्लिश मीडियम होने से 1 अप्रैल 2018 को मुझे प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह में प्रिंसिपल के तौर पर वापसी हुई.

सरिता राय को मिल चुके हैं दर्जनों पुरस्कार

उत्कृष्ट प्रधानाध्यापक पुरस्कार 2019

तीन बार ब्लॉक स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार

TLM और क्राफ्ट शैक्षिक मेला में डाइट प्राचार्य द्वारा सम्मानित.

मिशन शक्ति 2021 में DM और BSA द्वारा सम्मानित

आयुष्मान भारत फाउंडेशन द्वारा काशी विभूषण सम्मान

नव निर्माण सेवा ट्रस्ट द्वारा आदिशक्ति सम्मान 2019

जनगणना 2021 में गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कांस्य पदक प्राप्त