आधुनिक संदर्भ में श्री रामचरितमानस की प्रासांगिकता को समझाएगा स्कूल ऑफ राम

वाराणसी.गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री रामचरितमानस केवल भक्तिमार्ग के साधकों का भाव ही पुष्ट नहीं करती, वरन उनका आध्यात्मिक, सामाजिक तथा व्यवाहरिक जीवन का मार्गदर्शन भी करती है. एक सम्पूर्ण व्यावहारिक जीवन दर्शन को समेटे हुए यह एक ऐसा ग्रन्थ है जिसने हम संसारी जीवों के व्यक्तिगत,पारिवारिक,सामाजिक और राजनैतिक जीवन के विभिन्न अंगों के लिए आदर्श स्थापित किया है.एक सम्पूर्ण व्यावहारिक जीवन दर्शन को समेटे हुए ग्रन्थ के रूप में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री रामचरितमानस पर जितनी भी चर्चा, आलोचना-समालोचना और समीक्षा हुई है उतनी शायद ही किसी अन्य लिपिबद्ध ग्रन्थ की हुई होगी,और हो भी क्यों न ? ऐसा और कौन सा ग्रन्थ है,जिसने हम संसारी जीवों के व्यक्तिगत,पारिवारिक,सामाजिक और राजनैतिक जीवन के विभिन्न अंगों को इतने मर्मस्पर्शी एवं स्पष्ट ढंग से छुआ हो – चाहे वह परिवार के सदस्यों के परस्पर संबंधों की गरिमा-मर्यादा हो, समाज के विभिन्न वर्गों के आपसी संबंधों की मर्यादा हो अथवा राजकीय काम-काज व राजा के कर्तव्यों की.

ऐसा मानना है स्कुल ऑफ राम के संस्थापक संयोजक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यनरत प्रिंस तिवाड़ी का.

प्रिंस कहते हैं कि श्री रामचरितमानस में निरूपित जीवन-व्यवस्था एक आदर्श समाज एवं आदर्श राज्य की कोरी कल्पना मात्र न होकर पूर्णतः अनुभवगम्य और व्यावहारिक है. इस ग्रन्थ के माध्यम से गोस्वामी जी ने परस्पर स्नेह-सम्मान के साथ कर्त्तव्य-परायणता के माध्यम से न केवल जीवन को समृद्ध-सुखी बनाने में असंख्य-अप्रतिम योगदान दिया है वरन मानस के पात्रों के माध्यम से ढेरों सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में अभूतपूर्व कार्य किया है.

स्कूल ऑफ राम इस रामनवमी के अवसर पर “आधुनिकत संदर्भ में रामचरितमानस की प्रासांगिकता” नामक एक माह के प्रमाणपत्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ करने जा रहा है.19 अप्रैल से इसकी कक्षाएँ प्रारंभ हो जाएगी जोकी 13 मई को पूर्ण होगी.

इस कोर्स में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस और वर्तमान जीवन एवं आधुनिक युग में उसकी उपयोगिता को समझाया जाएगा. स्कूल ऑफ राम द्वारा इस कोर्स में प्रतिभागिता का शुल्क 51 रुपये रखा गया है.

प्रिंस ने बताया कि

इस कोर्स के प्रतिभागी/विद्यार्थी श्री रामचरितमानस के विषय में निम्न जानकारी प्राप्त करेंगे –

1. आधुनिकता का अर्थ,अवधारणा एवं उसकी परिभाषा 2. रामचरितमानस में आधुनिकता 3. रामचरितमानस में वर्णित समन्वय पक्ष की आधुनिक परिवेश में उपादेयता 4. भावनात्मक,सगुण-निर्गुण,श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ कुल,शास्त्र और लोक,व्यक्ति और समष्टि,व्यक्ति और परिवार,राजा और प्रजा आदि का समन्वय 5. आधुनिक संदर्भ में मानस और मानसकार की प्रासंगिकता 6. आधुनिक परिवेश और मानस के पात्र 7. मानसकार की आधुनिकता

इस कोर्स का महत्व बताते हुए स्कूल ऑफ राम के संस्थापक प्रिंस ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास इसलिए भी सच्चे अर्थों में आधुनिक कहे जा सकते हैं कि उन्होंने केवल निषेध-पक्ष में ही आधुनिकता को स्वीकार नहीं किया. केवल विघटन,निराशा,कुण्ठा और अनास्था के चार घोड़ों के रथ पर ही उन्होंने जन-जीवन को सवार नहीं किया. उन्होंने एक और हासोन्मुखी का उल्लेख किया और दुसरी और ऐसे आदर्शों का संकेत भी किया जिसके सहारे युग-जीवन का युगनिर्माण हो सकता है. भारत पुनः विश्वगुरु हो सकता है.

तुलसी की आधुनिकता इसलिए भी पूर्ण है कि उसमें पशु को मानव और महामानव के स्तर पर प्रतिष्ठित करने का प्रयत्न किया गया है.

आधुनिक युग की सबसे बड़ी बात मानवता की महिमा है. मनुष्य कितना भी प्रगति करे किन्तु यदि उसमें शील नहीं है, दया,माया,मनुष्य,समाज का सामूहिक उत्थान आदि नहीं है तो उसकी कोई प्रतिष्ठा नहीं मानी जायेगी. रामचरितमानस के राम ने मनुष्यों को मार्ग में आगे बढ़ने एवं भटकते हुए मानव समाज के लिए अपने विराट चरित के द्वारा आकर्षक प्रकाश स्तंभ रामचरितमानस में प्रस्तुत किया है .

वैसा शायद ही किसी अन्य साहित्य ग्रंथ ने दिया हो.आज के इस वैज्ञानिक युग के परिप्रेक्ष्य में भी विश्व के प्रायः समस्त देशों ने सर्वशक्तिमान की अलौकिक सत्ता को किसी न किसी रूप में स्वीकार किया है. रामचरितमानस भक्ति का अनमोल रत्न है जिसके प्रकाश में आज अंधकार में भटकते हुए भारत के अनेक लोगों को और न केवल भारत किंतु समग्र विश्व में सच्ची दिव्यज्योत प्राप्त हो जाती है.