वाराणसी के आठों सीटों पर PM Modi की राजनैतिक प्रतिष्ठा दांव पर, विधानसभा चुनाव के लिए BJP ने झोंकी है पूरी ताकत

वाराणसी में चुनावी पारा गरम है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई राजनैतिक दलों के नेताओं ने वाराणसी में डेरा डाला है. पूर्वांचल के समस्त सीटों पर कब्जा करने की इच्छा रखने वाले राजनैतिक दलों के दिग्गज आज वाराणसी में ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे हैं. एक ओर जहां प्रियंका गांधी, मायावती, अखिलेश यादव समेत कई बड़े नेता वाराणसी में रैलियां कर रहे हैं. वहीं प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के आठ विधानसभा सीटों पर उनकी राजनैतिक प्रतिष्ठा बरकरार रखने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूरी ताकत झोंक दी है. आठ विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित हो, इसकी कमान खुद गृहमंत्री अमित शाह संभाल रहे हैं. वाराणसी में नेताओं और वोटर्स की हर छोटी-बड़ी राजनैतिक गतिविधि की वे स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे हैं. साथ ही पार्टी के प्रचारक और स्टार प्रचारक खुद डोर टू डोर कैम्पेन कर रहे हैं.

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भाजपा ने अपने पिछले कार्यकाल में कई विकास कार्य किए. लेकिन ऐसी क्या बड़ी वजह थी कि इन्हें कुछ सीटों पर वर्तमान विधायकों के टिकट काटकर नए प्रत्याशियों को खड़ा करना पड़ा. ऐसा करना दिखाता है कि विकास कार्यों को लेकर कहीं न कहीं कमियां ज़रूर रही होंगी, जिसके चलते भाजपा की छवि धूमिल हो रही थी. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन वर्तमान विधायकों के टिकट काटकर अपने माथे का कलंक मिटाने का प्रेस किया है. लेकिन इतने के बावजूद पिछले दिनों उत्तर परेश में एक विधायक को सार्वजनिक रूप से कान पकड़ कर उठक बैठक करते हुए माफ़ी भी मांगनी पड़ी. इसके बाद एक और विधायक ने भी सोशल मीडिया पर विडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी थी.

अब इतना सब कुछ होने के बाद भाजपा को अपना वोटिंग परसेंटेज बढ़ाने के लिए सबसे पहले जनता के छोटे-छोटे जख्मों की भरपाई करने की कोशिश करनी होगी. साथ ही भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है अपने वोटर्स को घर से निकालकर पोलिंग बूथ तक भेजना. क्योंकि प्रदेश सरकार द्वारा 5 साल तक विकास की नई गाथा लिखने के बाद भी अगर विधायकों और मंत्रियों को जनता से माफ़ी मांगनी पड़ जाए, तो इससे बड़ी शर्म की बात और कुछ नहीं हो सकती. इसलिए भाजपा कार्यकर्ताओं को चाहिए कि यदि उन्हें यूपी में पूर्ण बहुमत से जीतना है, तो पहले वोटर्स को पोलिंग बूथ तक जाने के लिए जागरूक करना होगा. वे इस भ्रम में न रहें कि इस बार भी मोदी के नाम पर वोट मिल जाएंगे. हर चुनाव में जनता की अलग ज़रूरतें और अपेक्षाएं होती हैं. इसलिए उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज रहने के लिए वोटिंग परसेंटेज बढ़ाना सबसे ज्यादा ज़रूरी है.