“राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन मे शिक्षकों की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी”

वाराणसी. सामाजिक विज्ञान संकाय,काशी हिन्दू विश्विद्यालय के संबोधि सभागार में नीति आयोग,भारत सरकार,भारतीय शिक्षण मंडल एवं सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति अध्ययन केंद्र के तत्वाधान में एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मुकुल कानितकर थे. इस संगोष्ठी में अपनी बात रखते हुए आदरणीय मुकुल कानितकर ने नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में कहा कि 1894 ई. से लेकर के अब तक जो भारत की शिक्षा नीति रही है उसमें कहीं ना कहीं एक प्रकार से निरंतरता का अभाव दिखाई देता है अंग्रेजी और अन्य भाषाओं का वर्चस्व है जबकि हिंदी का कहीं कोई स्वरूप नहीं दिखाई देता है.

उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति वोकेशनल कोर्सेज को बढ़ावा देगी जिससे कि लोगों के लिये रोजगार के आयाम उत्पन्न होंगे.

उन्होंने शिक्षकों का आवाह्न करते हुए कहा की राष्ट्रीय शिक्षा नीति तभी सफल हो सकती है जब शिक्षक इसमे बढ़-चढ़कर भूमिका निभाए, क्योंकि अपनी कक्षा में शिक्षक वही पढ़ाएंगे जो उनकी इच्छा है और अगर राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षकों के तरफ से एक अनुमोदन प्राप्त कर लेती है तो निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत के तस्वीर को बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि आज अगर देखा जाए तो 3 लाख 30000 हजार पेटेंट इस वर्ष चीन ने लिया है तथा दूसरे नंबर पर 2 लाख 20000 हजार पेटेंट अमेरिका ने लिया है तीसरे नंबर पर कोरिया का नंबर आता है जिसने कि 1 लाख 30000 हजार पेटेंट लिए जबकि भारत जैसे देश में अभी तक सिर्फ 30000 पेटेंट लोगों ने लिया है तो इस प्रकार कर सकते हैं कि अगर हमारी शिक्षा हमारी मातृभाषा में होगी तो निश्चित तौर पर लोगों को समझ आएगी और पेटेंट की संख्या और बढ़ेगी अतः उन्होंने समस्त शिक्षकों से आवाहन किया कि आप राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में पढ़ें इसके संदर्भ में अगर आपका कोई सुझाव हो तो दें और अगर राष्ट्रीय शिक्षा नीति आपको अच्छी लगती है तो छात्रों के मध्य विचार विमर्श करें और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू कर के नए भारत के स्वप्न को साकार करते हुए एक नए भारत का निर्माण करें. इस संगोष्ठी की अध्यक्षता सामाजिक विज्ञान संकाय के संकाय प्रमुख प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने यह आह्वान किया कि वह अपने संकाय के शिक्षकों के साथ संवाद स्थापित करके राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बात करेंगे तथा उन्होंने यह भी कहा कि मुकुल कानितकर जी के द्वारा कहे गए शब्दों को काशी हिंदू विश्वविद्यालय अपने शिक्षक परिवार के साथ गहन चर्चा करके अवश्य ही लागू करने का कार्य करेगा.

इस संगोष्ठी में श्री देवेंद्र पवार जी ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर उन्होंने भारतीय शिक्षा नीति और नई शिक्षा नीति की यात्रा वृतांत का वर्णन किया तथा उन्होंने नई शिक्षा नीति को लागू करने से पूर्व किए गए महायज्ञ के बारे में चर्चा की उन्होंने कहा कि पूरे भारत के प्रत्येक विद्यालयों,विश्वविद्यालयों, माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के साथ वार्ता करके राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तैयार किया गया है. विषय की स्थापना पर्यटन प्रबन्ध के सहायक प्रो०( डॉ ) अनिल कुमार सिंह जी ने किया एवं कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के सामने खड़ी पोषण व्यवस्था की समस्या, रक्षण व्यवस्था की समस्या एवं शिक्षण व्यवस्था की समस्या का सामाधान करने में पूर्णतया सक्षम हैं.

भारतीय शिक्षण मण्डल के प्रान्त मंत्री डॉ संतोष कुमार सिंह जी ने शिक्षण मण्डल के सभी आयामों से परिचय कराया. सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. श्वेता प्रसाद ने सभी अतिथियों का स्वागत किया अपने स्वागत अभिभाषण में प्रो. श्वेता प्रसाद ने नई शिक्षा नीति के संकल्पना को मूर्त रूप देने का आश्वासन भी दिया. इस संगोष्ठी का सफल संचालन डॉ शरद धर शर्मा ने किया तथा अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन प्रो अरविंद जोशी ने किया.

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