महल छोड़ सैर पर निकले नाथों के नाथ भगवान ‘जगन्नाथ’, काशी में लक्खा मेले की हुई शुरुआत

रथयात्रा चौराहे पर भगवान जगन्नाथ विराजमान होंगे. इसके बाद तीन दिवसीय रथयात्रा मेले का शुभांरभ होगा.

कलयुग के भगवान हर वर्ष की भांति इस बार भी सैर पर निकले. पिछले कुछ वर्षों से सूने पड़े लक्खा मेले की शुरुआत इस बार यादगार होगी. भक्तों की भीड़ और बारिश का मौसम देखकर ऐसा लग रहा मानो भगवान अत्यंत प्रसन्न हो गए हों.

भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुरुवार को सैर पर निकले. मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम ने बताया कि भगवान जगन्नाथ 14 दिनों के एकांतवास के बाद स्वस्थ होकर आज बहन और बड़े भाई बलभद्र के साथ शहर भ्रमण पर निकले. अस्‍सी स्थित मंदिर से गुरुवार को भगवान जगन्‍नाथ की डोलीयात्रा धूमधाम से निकली. जैसे ही भगवान की डोली यात्रा मंदिर से निकली भगवान इंद्र ने भी अपने आराध्य का जलाभिषेक किया.

भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ अपनी ससुराल डोली में सवार हो कर निकले. भगवान की यह डोली यात्रा अस्सी, नबाबगंज, कश्मीरी गंज, खोजवां शंकुलधारा, द्वारिकाधीश मंदिर, बैजनत्था मंदिर होते रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग में पहुंची. वहां एक कमरे में भगवान विग्रहों को विश्राम कराया गया. कहा जाता है कि प्रतीक रूप से बेनीराम के बाग में स्थित पंचमुखी हनुमान मन्दिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर पुरी स्थित गुंदेचा मंदिर ही है.

पुजारी पंडित राधेश्याम ने आगे बताया कि यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है. भगवान जगन्नाथ का तुलसी, चावल, गुलाब से स्वागत द्वारिकाधीश मंदिर पर हुआ. कोविड के चलते दो वर्ष बाद धूमधाम से भगवान जगन्नाथ की डोली यात्रा निकली, तो भक्त भी खुशी से झूम उठे. तेज बारिश में भी भीगते हुए अपने आराध्य का इंतजार करते दिखे. रथयात्रा चौराहे पर भगवान जगन्नाथ विराजमान होंगे. इसके बाद तीन दिवसीय रथात्रा मेले का शुभांरभ होगा.