काशी विश्वनाथ धाम: पीएम के भाषण के 46 मिनट, वेद मंत्र से लोकतंत्र तक का जिक्र, काशीवासियों से मांगे 3 संकल्प

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को काशी में अपने ड्रीम प्रोजेक्ट बाबा विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया. इससे पहले प्रधानमंत्री ने कालभैरव मंदिर पहुंच कर बाबा कालभैरव का स्शिर्वाद लिया. जिसके बाद उन्होंने रविदास घाट पर पहुंचकर संत रविदास को पुष्पांजली अर्पित किया. यहां से वे ललिता घाट के लिए रवाना हुए. जहां उन्होंने गंगा जी में डुबकी लगाई और जिसके बाद उन्होंने बाबा विश्वनाथ का विधि-विधान से पूजा अर्चना करके धाम का लोकार्पण किया. पीएम ने यहां धर्माचार्यों से मुलाकात कर उनसे बातचीत भी किया.

लोकार्पण के बाद उन्होंने मंदिर निर्माण में काम करने वाले मजदूरों संग बैठकर खाना खाया. उन्होंने इस प्रोजेक्ट में काम करने वाले मजदूरों पर फूल भी बरसाए. साथ ही उनके द्वारा किए कार्य की सराहना भी की.

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत हर हर महादेव के नारे के साथ भोजपुरी में सबका अभिवादन करके शुरू किया. उन्होंने कहा,

बाबा विश्वनाथ के चरणों में हम शीश नवावत हैं. माता अन्नपूर्णा के चरणन के बार-बार वंदन करत हैं.”

“गंगा तरंग रमणीय जटा कलापम् गौरी निरंतर विभूषित वामभागम्, नारायण प्रिय मनंग मदाप हारम् वाराणसी पुरपतिं भज विश्वनाथम्.”

“ई विश्वनाथ धाम तो बाबा अपने हाथ से बनैले हन. कोई कितना बड़ा हवै तो अपने घरै के होइहै. उ कहिए तबै कोई आ सकेला और कछु कर सकैला.”

बाबा के दर्शन के समय मिलेगा मां गंगा का स्नेह

46 मिनट के स्पीच में प्रधानमंत्री ने कभी हिंदी तो कभी भोजपुरी में भाषण दिया. इस स्पीच में पीएम ने वेद मन्त्र भी पढ़ें और लोकतंत्र का भी जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने कहा अपने भाषण में बाबा विश्वनाथ धाम के नए स्वरुप के बारे में बताया कि किस तरह से यह आमजनमानस के लिए उपयोगी होगा. उन्होंने कहा, “जब लोग बाबा की पूजा करेंगे तो मां गंगा की स्नेहिल हवा उन्हें स्नेह देगी. नाव से लेकर मंदिर में बड़े-बुजुर्गों को आने जाने में सुविधा होगी. नाव हैं, एक्सलेटर हैं, मंदिर में इतनी जगह है कि एक बार में 60-70 हजार श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं. 3 हजार वर्गफीट में फैला मंदिर अब 5 लाख वर्गफीट का हो गया है.

काशी में बस एक ही अविनाशी की सरकार है

मोदी ने अपने भाषण में आगे कहा, “जब मैं बनारस आया था तो अपने से ज्यादा भरोसा बनारस के लोगों पर था। कुछ लोग बनारस के लोगों पर संदेह करते थे. कैसे होगा, होगा ही नहीं, यहां तो ऐसे ही चलता है, मोदी जैसे बहुत आकर गए. राजनीति थी, स्वार्थ था इसलिए बनारस पर आरोप लगाए जा रहे थे, लेकिन काशी तो काशी है. काशी तो अविनाशी है. काशी में एक ही सरकार है, जिनके हाथ में डमरू है, उनकी सरकार है. भगवान शंकर ने खुद कहा है कि बिना मेरी प्रसन्नता के काशी में कौन आ सकता है, कौन इसका सेवन कर सकता है. काशी में महादेव की इच्छा के बिना न कोई आता है और न ही उनकी इच्छा के बिना यहां कुछ होता है. यहां जो कुछ होता है महादेव की इच्छा से होता है. ये जो कुछ भी हुआ है, महादेव ने ही किया है.”

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श्रमिकों का व्यक्त किया आभार

श्रमिकों का आभार व्यक्त करते हुए मोदी ने कहा, “मैं आज अपने हर श्रमिक भाई-बहनों का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिनका पसीना इस भव्य परिसर के निर्माण में रहा है. कोरोना के इस विपरीत काल में भी उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। मुझे अभी इन साथियों से मिलने का अवसर मिला. उनका आशीर्वाद लेने का सौभाग्य मिला.“

काशीवासियों से मांगे 3 संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के दौरान काशीवासियों से तीन संकल्प भी मांगे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे लिए हर भारतवासी ईश्वर का ही अंश है. जैसे सब लोग भगवान के पास जाकर मांगते हैं, जब मैं आपको भगवान मानता हूं तो मैं आज आपसे कुछ मांगता हूं. अपने लिए नहीं, हमारे देश के लिए तीन संकल्प चाहता हूं. भूल मत जाना. बाबा की पवित्र धरती से मांग रहा हूं. पहला- स्वच्छता, दूसरा- सृजन और तीसरा- आत्मनिर्भर भारत के लिए निरंतर प्रयास. स्वच्छता जीवनशैली होती है, अनुशासन होती है, ये अपने साथ कर्तव्यों की श्रृंखला लेकर आती है. जितना भी विकास क्यों न करें, स्वच्छता नहीं रहेगी तो आगे बढ़ पाना मुश्किल होगा. अपने प्रयास बढ़ाने होंगे”

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