‘हर घर तिरंगा’: मुंशी प्रेमचंद के पैतृक आवास पर फहराया गया तिरंगा, RSS प्रचारक ने कहा, “आजादी में मुंशी जी का अभूतपूर्व योगदान”

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की आज जयंती है. विभिन्न सामाजिक संगठन आज उनकी जयंती मना रहे हैं. ऐसे में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के ओर से उपन्यास सम्राट के वाराणसी के लमही गांव में उनके पुश्तैनी आवास पर तिरंगा फहराया गया. आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद को अपने अंतिम समय में यह कसक जरूर थी कि काश देश आजाद हो जाता तो वह घर पर तिरंगा फहरा पाते. रिश्ते नातों से भरा उनका लमही गांव आज भी वैसा ही है, जैसा वे एक शताब्दी पूर्व छोड़ गए थे. मुंशी प्रेमचंद्र ने देश के लिए अंतिम सांस ली. कलम की ताकत से उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया. अपने अंतिम समय तक अंग्रेजों की आंखों में खटकते रहे लेकिन कभी हार नहीं माना. उनका सपना अपने तिरंगे को अपने घर पर सिर्फ फहराने का ही नहीं बल्कि उसको सलामी देने का था.

देशवासी मुंशी जी कृतियों को पढ़ बनेंगे महान

इंद्रेश कुमार ने कहा कि आज मुंशीजी की आत्मा जरूर प्रसन्न होगी कि उनके गांव के लोग उनके जन्मदिन पर तिरंगा फहरा रहे हैं. मुंशीजी के योगदान को ये दुनिया कभी भुला नहीं सकती. उनकी महान कृतियों को देशवासी अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए हमेशा पढ़ते रहेंगे.

पंच परमेश्वर से न्याय, ईदगाह से गरीबी का दर्द, पूस की रात से किसान की चिंता, मंत्र से अमीरी और गरीबी का फर्क, कफन से नशे की आदत जैसे सामाजिक मुद्दों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले मुंशीजी दुनिया के साहित्यकारों में सबसे ऊपर खड़े हैं. उनकी अमर कृतियों के चरित्र आज भी लमही गांव में दिख जाते हैं. लमही गांव को राष्ट्रभक्ति के साहित्य की प्रयोगशाला बनानी चाहिए.

अंग्रेजो को हर पल था बागी होने का डर

विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के लिए मुंशीजी का गांव लमही सदैव गवाही देता रहेगा. हम मुंशीजी के प्रति कृतज्ञ हैं कि उन्होंने सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदना को उस समय विकसित किया, जब अंग्रेजी हुकूमत का दौर था. अंग्रेजों की कड़ी निगाह तब लमही पर थी कि कहीं मुंशीजी का गांव बागी न बन जाए और तिरंगा न फहरा दे.

इससे पहले मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिन पर लमही स्थित सुभाष भवन से उनके पुश्तैनी मकान तक बैंड-बाजा के साथ तिरंगा यात्रा निकाली गई. भारत माता की जय, वंदे मातरम, मुंशी प्रेमचंद अमर रहें जैसे नारों की गूंज के बीच इंद्रेश कुमार ने तिरंगा यात्रा का नेतृत्व किया.