“गैर हिन्दुओं का प्रवेश प्रतिबंधित”- काशी के घाटों पर बजरंग दल और विहिप ने लगाए पोस्टर, सपा ने कहा, “माहौल बिगाड़ने की कोशिश”

“चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये. दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए .“ महान संत कबीर दास रचित यह दोहा आज के समय में साकार साबित हो रहा है. जब हिन्दू और मुस्लिम आपसी झगड़े में अपना सब कुछ गंवा रहे हैं. साथ ही इनके संगठनों के प्रमुख इसका लाभ उठा रहे हैं. ऐसा ही क्कुह दृश्य पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देखने को मिल रहा है.

वाराणसी में गंगा घाटों पर बजरंग दल और विहिप (विश्व हिन्दू परिषद्) द्वारा विवादित पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं. जिसमें गैर हिन्दुओं को घाट पर आना प्रतिबंधित बताया जा रहा है. पंचगंगा घाट, रामघाट, मणिकर्णिका घाट और दशाश्वमेध से लगायत अस्सी घाट तक ये पोस्टर लगे हैं. घाटों पर चिपकाए गए इस पोस्टर में लिखा है – “प्रवेश प्रतिबंधित- गैर हिंदू. मां गंगा काशी के घाट व मंदिर सनातन धर्म, श्रद्धा व आस्था का प्रतीक है, जिनका आस्था सनातन धर्म हो स्वागत है. अन्यथा यह क्षेत्र पिकनिक स्पॉट नहीं है.”

धर्म की रक्षा के लिए ऐसे पोस्टर ज़रूरी

पोस्टर को लेकर विहिप और बजरंग दल के नेताओं का कहना है कि हिंदुओं को धर्म और समाज की रक्षा के लिए स्वयं आगे आना होगा. सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है. जिस भी मंदिर या गंगा घाट पर कोई विधर्मी घुसता नजर आएगा, उसे मौके से ही पकड़ कर पुलिस के हवाले किया जाएगा. मंदिर और गंगा घाट सनातन धर्म के लोगों की आस्था और श्रद्धा के स्थान हैं. यहां अन्य धर्मों के लोगों का क्या काम है? कहा कि यह सब धर्म की रक्षा के लिए किया जा रहा है.

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेताओं का कहना है कि काशी के गंगा घाटों के अलावा मंदिरों में भी ऐसे पोस्टर लगाने की उनकी योजना है. हालांकि, पुलिस के द्वारा इन पोस्टरों को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है. हालांकि स्थानीय पुलिस इन पोस्टर्स को हटवा रही है.

समाजवादी पार्टी ने जताई आपत्ति

हिन्दू संगठनों द्वारा इस तरह के पोस्टर लगाने पर समाजवादी पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है. सपा ने कहा है कि यह चुनाव के मद्देनजर माहौल ख़राब करने की कोशिश की जा रही है. सपा के प्रवेश प्रवक्ता मनोज राय धूपचंडी ने कहा कि घाट की संपत्ति सार्वजनिक और सबके लिए है. इस तरह का कृत्य जान बूझकर माहौल खराब करने के लिए भाजपा के अनुसांगिक संगठन के लोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वाराणसी में लोगों के आय का मुख्य साधन पर्यटन हैं. यहां के घाटों पर देश-विदेश से हर जाति धर्म के लोग आते हैं. अगर इस तरह के कृत्य पर प्रशासन ने कड़ी कारवाई नहीं की तो पर्यटको का आना प्रभावित होगा और बनारस का व्यापार चौपट हो जाएगा. 

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