पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को अपनाने वाले होंगे सम्मानित

वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ के तत्वावधान में सोमवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी और सम्मान समारोह आयोजन किया गया. सामाजिक विज्ञान संकाय के सम्बोधि सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र मुख्य अतिथि थे. काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ ने कलराज मिश्र जी को “पं. दीनदयाल उपाध्याय परमेष्ठि सम्मान से सम्मानित किया यह सम्मान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. वी. के शुक्ल, अतिरिक्त परीक्षा नियंत्रक प्रो. एस. के. उपाध्याय, राममनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित, सामाजिक बहिष्करण एवं समावेशी नीति अध्ययन केन्द्र की समन्वयक प्रो. श्वेता प्रसाद एवं प. दीनदयाल उपाध्याय पीठ के प्रभारी प्रो. कौशल किशोर मिश्र द्वारा प्रदान किया गया. कार्यक्रम में सबसे पहले माननीय कलराज मिश्र ने भारतीय संविधान की उद्देशिका एवं संविधान के मूल कर्तव्यों का वाचन कराया. इसके बाद कलराज मिश्र ने महामना और पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण किया एवं दीप प्रज्जवलन किया. कार्यक्रम का शुभारम्भ परम्परानुरूप काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलगीत द्वारा किया गया.

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, संकाय प्रमुख एवं पं. दीनदयाल पीठ के प्रभारी प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि दीनदयाल पीठ ने पं. दीनदयाल जी के दार्शनिक शब्दों पर दीनदयाल जी के विचारों को मानने वाले लोगों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है. यह दूसरा सम्मान समारोह था पहला ‘अन्त्योदय सम्मान’ श्री सुनील ओझा (सह-प्रभारी, उ.प्र. भाजपा को दिया गया था तीसरा सांस्कृतिक सम्मान पद्मश्री मालीनी अवस्थी एवं श्री अवनीश अवस्थी को दिया जायेगा. प्रो. मिश्र ने कहा कि दीनदयाल पीठ द्वारा ‘अमृत महोत्सव के तत्वाधान में 75 भूले-बिसरे कर्मवीरों का सम्मान आगामी तीन महीने में किया जायेगा आज उनमें से चार कर्मवीरों श्री सुरेन्द्र जी श्री रामाशीष जी. श्री चन्द्रमोहन जी एवं श्री नागेन्द्र जी का “पं. दीनदयाल उपाध्याय अमृत महोत्सव सम्मान” सम्मान से सम्मानित किया गया यह सम्मान महामहिम राज्यपाल श्री कलराज मिश्र जी के द्वारा दिया गया. इसके साथ ही डॉ. आशुतोष कुमार की पुस्तक “इंडियन सोल्जर इन दी फर्स्ट वर्ल्डवार री-विजिटिंग ए ग्लोबल कन्पिलक्ट” एवं डॉ. अनुप कुमार मिश्र की पुस्तक “जेन्डर च्वाइस एण्ड वर्थ इनइक्वेलिटि केस स्टडी आफ वाराणसी डिस्ट्रिट” की पुस्तक का विमोचन महामहिम राज्यपाल द्वारा किया गया.

मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा कि महान विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय जी भारतीयता के पोषक ही नहीं बल्कि भारतीयता के मूर्तरूप थे पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों से राष्ट्र और व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव है, इसलिए सभी को उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए. महामहिम ने दीनदयाल के आर्थिक दर्शन को आधार बनाकर “उत्पादन में बढ़ोत्तरी, उपभोग पर संयम, वितरण समानता” की बात की दीनदयाल जी का चिन्तन समाज की सम्पूर्णता का चिन्तन है.

विशिष्ट अतिथि अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि हमें दीनदयाल जी के दर्शन को अपनाकर ऐसे समाज का निर्माण करना हैं जो दूसरों की सहायता एवं सेवा करने को तत्पर रहें। अध्यक्षीय भाषण में कार्यवाहक कुलपति प्रो. वी. के. शुक्ल जी ने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का पं. दीनदयालउपाध्याय पीठ, दीनदयाल जी के विचारों को बढ़ा रहा है. साथ ही सभी को सूचित किया कि विश्वविद्यालय “हिन्दू अध्ययन में परास्नातक का पाठ्यक्रम शुरु कर रहा है.”

कार्यक्रम में डा. सत्येन्द्र सिंह, प्रो. आर.पी. पाठक, प्रो. केशव मिश्रा, प्रो. श्वेता प्रसाद, प्रो. बिन्दा परांजपे, प्रो. रजना शील, प्रो. प्रवेश भारद्वाज, डॉ. प्रियंका झा, डॉ. सुनीता सिंह, डा. मिनाक्षी झा. डा. सीमा मिश्रा, डा. अनुराधा सिंह, डा. अशोक सोनकर, पंतजलि पाण्डेय, शुभम् मिश्र, आर्शीवाद दुबे आदि उपस्थित रहे. कार्यक्रम का संचालन डा. अनूप कुमार मिश्र ने किया.

Leave a Reply

Your email address will not be published.