बीएचयू के छात्र ने शुरू किया स्कूल ऑफ राम, पढाया जा रहा है “रामचरितमानस का वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य”

वाराणसी. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने एवं भारत केंद्रित शिक्षा विद्यार्थियों को प्रदान करने की बात की गई है. इस उद्देश्य से भगवान राम के जीवन पर शुरू हुए विश्व के पहले वर्चुअल विद्यालय स्कूल ऑफ राम ने हालही में रामचरितमानस में भौतिक विज्ञान नामक एक प्रमाणपत्रीय कार्यक्रम की शुरुआत की है.

महान गणितज्ञ,भौतिक विज्ञानी एवं दार्शनिक सर आइजक न्यूटन ने भले ही वर्ष 1687 में अपने शोध पत्र “प्राकृतिक दर्शन के गणितीय सिद्धांत” से गुरुत्वाकर्षण और गति के नियमों की गुत्थी सुलझा दी थी और यह भी साबित किया था कि कि सभी सिद्धांत प्रकृति से जुड़े हैं. इसके बावजूद आज भी गणित,भौतिक आदि विज्ञान के बुनयादी सिद्धांतों की जटिलता बनी हुई है. स्कूल ऑफ राम इन्हीं विज्ञान के सिद्धांतों के सिरे अब श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से खोलने जा रहा है.

स्कूल ऑफ राम के संस्थापक संयोजक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यनरत विद्या भारती के पूर्व छात्र प्रिंस तिवाड़ी ने बताया कि 20 मार्च को इस कोर्स के दुसरे बैच का ऑनलाइन शुभारंभ किया जाएगा. फरवरी माह में शुरू किए गए कोर्स में देश के अलग-अलग कोनों से हर आयुवर्ग के लगभग 70 अभ्यार्थियों ने हिस्सा लिया था. और पाठ्यक्रम के प्रति उनकी प्रतिक्रिया बहुत अच्छी रही.प्रिंस ने बताया कि इस कोर्स में अभ्यार्थियों को रामचरितमानस में भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों गति के नियम,प्रकाशिकी,घर्षण,वाष्पीकरण,मृगमरीचिका,वैमानिकी,इंजिनियरी,ऊर्जा,चुम्बकत्व आदि को रामचरितमानस की चौपाइयों से समझाया जाएगा.

नियम,प्रकाशिकी,घर्षण,वाष्पीकरण,मृगमरीचिका,वैमानिकी,इंजिनियरी,ऊर्जा,चुम्बकत्व आदि को रामचरितमानस की चौपाइयों से समझाया जाएगा.

इस कोर्स की सबसे खास बात यह भी होगी इन चौपाइयों को भौतिक विज्ञान के प्रयोगों के माध्यम से भी समझाया जाएगा. यह अपने आप मे पहला ऐसा अनोखा प्रयास है जब किसी धार्मिक ग्रंथ को वैज्ञानिक प्रयोग अथार्त प्रैक्टिकल के माध्यम से भी समझाया जाए.

उदाहरण के तौर पर स्कूल ऑफ राम के प्रिंस का कहना है कि जैसे –

तृषा जाई वरु मृगजल नाना। वरु जामहिं सर सीस निधाना।। उक्त चौपाई में उल्लेखित मृगमरीचिका को प्रकाशिकी के अपवर्तन सिद्धांत से समझाया जाएगा।

इसी प्रकार से – न्यूटन के गति के तीसरे नियम “क्रिया प्रतिक्रिया कोबार-बार रधुवीर संभारी। तरकेउ पवन तनय बल भारी। जेहिं गिरी चरन देह हनुमंता। चलेउ सा गा पाताल तुरंता।। से समझाया जाएगा। इस चौपाई को समझाने के लिए क्रिया प्रतिक्रिया एवं संवेग के सिद्धांत पर आधारित हाइड्रोक्लोरिक एवं एथेन रॉकेट के प्रयोग का सहारा किया जाएगा।

ऊर्जा रूपांतरण के सिद्धांत को एकु दारुगत देखिअ एकू,पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू।। चौपाई से समझाया जाएगा।

घर्षण के सिद्धांत को अति संघरषन जौं कर कोई। अनल प्रगट चंदन ते होई।। चौपाई के माध्यम से समझाया जाएगा.

ध्वनिकी के सिद्धांत कोपंच सबद धुनि मंगल गांना,पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना।। चौपाई के माध्यम से समझाया जाएगा।

टीवी पर रामायण सीरियल देखने और रामचरितमानस का पाठ करने वालों ने सुना-पढ़ा होगा कि भगवान श्रीराम के दौर में राम नाम लिखे पत्थर भी पानी पर तैरते थे, जिसे रामसेतु के नाम से जाना जाता है. लंकेश रावण भी पुष्पक विमान में उड़ता था। लेकिन देश की युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति के इस पुरातन विज्ञान को दिनों-दिन भूलती जा रही.

इस ज्ञान-विज्ञान को अविस्मरणीय बनाने के लिए स्कूल ऑफ राम द्वारा जोर-शोर से प्रयास किए जा रहे हैं.आगे भी निरंतर शोध कार्य जारी है,अभी आगामी दिनों में स्कूल ऑफ राम द्वारा कई और कॉर्स भी शुरू किए जाएंगे.

प्रिंस तिवाड़ी

स्कूल ऑफ राम क्या है ?
बीएचयू के छात्र प्रिंस तिवाड़ी ने एक वर्ष पहले भगवान श्री राम आदर्शों एवं रामायण के संस्कारों को जन-जन तक अभिनव तरिकों से लेकर जाने के उद्देश्य से एक वर्चुअल विद्यालय की शुरुआत लॉकडाउन के वक्त 24 मार्च 2021 को की थी. यह विद्यालय भगवान राम के जीवन पर आधारित विश्व का पहला वर्चुअल विद्यालय है.