पड़ाव के 7 गांव वाराणसी में होंगे शामिल, विरोध कर रहे अधिवक्ता, लोगों ने जिलाधिकारी को लिखा पत्र

चंदौली के सात गांवों को वाराणसी में शामिल किया जा रहा है. इससे स्थानीय निवासी अत्यंत खुश हैं. वहीँ इन्हीं गांवों के कुछ वकील प्रशासन के इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं. ऐसे में प्रशासन के इस प्रस्ताव का विरोध करने वाले वकीलों के खिलाफ इन गांवों के लोगों ने वाराणसी और चंदौली के जिलाधिकारी को पत्र लिखा है. पत्र में ग्रामीणों ने कहा है कि अधिवक्ता निजी लाभ के लिए गांव को विकास से वंचित करना चाहते हैं. इस पर ध्यान न दिया जाए और प्रस्ताव पर अमल किया जाए.

पड़ाव चौराहे की एक झलक

1997 में हुआ था अलग

बता दें कि वर्तमान का चंदौली पहले चंदौली में न होकर उस समय वाराणसी ही कहलाता था. वर्ष 1997 में राज्य सरकार के प्रस्ताव के बाद वाराणसी से अलग होकर चंदौली जिला बना था. उस समय वाराणसी के सीमा से सटे कटेसर, सेमरा, भोजपुर, चौरहट, बहादुरपुर, मढ़िया और जलीलपुर भी चंदौली में शामिल हो गए थे. वाराणसी की सीमा से सटे होने से वाराणसी के सभी कार्यालय इनसे नजदीक जबकि चंदौली के कार्यालय और चिकित्सालय दूर थे.

वर्षों से प्रयासरत हैं समाजसेवी

वैसे तो इन गांवों को वाराणसी में शामिल कराने के लिए वर्षों से समाजसेवी लगे गुए हैं. लेकिन उनका यह विशेष कार्य 2017 में विशेष रूप से सामने आया. जब 2017 में लोगों ने नगर विकास मंत्री को पत्र लिखकर इन गांवों को वाराणसी में मिलाने का अनुरोध किया. मंत्री के संज्ञान लेने के बाद कमिश्नर और डीएम ने इन गांवों के भौगोलिक गांवों की जांच करने के लिए लेखपाल को भेजा. लेखपाल ने सर्वे रिपोर्ट सौंप दी. इन गांव के लोगों में उम्मीद की नई किरण जगी. इसी बीच चंदौली के डिस्ट्रिक डेमोक्रेटिक बार एसोसिएशन और मुगलसराय बार एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और इसे बड़ साजिश बताया. जिसके बाद मढ़िया गांव निवासी भूप नारायण झा, पंकज मिश्रा, आशीष यादव, अजय यादव, रितेश दुबे, सुनील मिश्रा ने वाराणसी और चंदौली के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इन गांवों को जल्द से जल्द वाराणसी में शामिल करने का प्रयास किया जाए.

अधिवक्ता फैला रहे भ्रम

अधिवक्ता अपने निजी स्वार्थ के लिए विरोध कर रहे हैं. भूपनारायण झा ने बताया कि अधिवक्ताओं ने एक भ्रम भी फैलाया है कि इन गांवों की रजिस्ट्री रामनगर में होती है. जबकि वाराणसी के केवल दो गांव डोमरी और सूजाबाद का ही रजिस्ट्री रामनगर में होता है. अन्य गांवों के लोगों को रजिस्ट्री के लिए चंदौली जाना पड़ता है. कहा समस्या ग्रामीणों की है अधिवक्ताओं की नहीं. ग्रामीणों ने अधिकारियों को प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरा कराने का अनुरोध किया है.