Varanasi: छठ पूजा और देव दीपावली से पहले गंगा घाटों पर गन्दगी, लाखों की संख्या में श्रद्धालु देंगे भगवान सूर्य को अर्ध्य

छठ पूजा की शुरुआत के साथ ही 30 अक्टूबर को लाखों श्रद्धालु गंगा किनारे भगवान सूर्य को अर्ध्य देंगे. इस दिन अस्त होते सूर्य को मां गंगा के पवित्र जल से अर्ध्य दिया जाता है, साथ ही अगली सुबह भी गंगाजल से उगते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है. ऐसे में जिस पवित्र जल से वाराणसी में लोग सूर्य को अर्ध्य देंगे उसका हाल देख आपको शर्म आ जाएगी.

7-8 नवम्बर को मनेगी देव-दीपावली

अस्सी और संत रविदास घाट पास गंगा से मिलने वाले अस्सी नाले का सीवेज सीधे तौर पर गंगा में मिलते दिख रहा है. गंदा पानी आगे बहकर रविदास घाट, अस्सी घाट और तुलसी घाट होते हुए सभी 88 घाटों तक जाता है. छठ पूजा के साथ ही 7-8 नवंबर को देव- दिवाली भी बनारस में मनाई जाएगी. इसे लेकर भी वाराणसी का प्रशासन मुस्तैद नहीं हुआ. पर्यावरणविदों ने चिंता जताते हुए कहा है कि आखिरकार, मां गंगा को लेकर इतनी बेरुखी क्यों है. गंगा और सीवेज का संगम देखने के बाद किसी का भी स्नान करने का मन नहीं होगा.

अस्सी-नगवां नाला

नहीं है कोई सॉलिड प्लान

अस्सी और नगवां नाले की फाइनल टैपिंग अभी तक नहीं हो पाई है. अस्सी नाले का मलजल सीधे नगवां नाले से होकर गंगा में मिलता है. यहां पर एक सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगा है. इसकी क्षमता महज 50 MLD है, जबकि इस नाले में 100 MLD सीवेज जल आता है. इसलिए, 50 MLD पानी सीधे बिना फिल्टर हुए गंगा में भेज दिया जाता है. इसको लेकर न तो किसी की जवाबदेही बन रही है और न ही कोई सॉलिड प्लान. इजराइल से लेकर अमेरिका तक के वैज्ञानिक और पर्यावरणविदों को बुला-बुलाकर नदी-नालों की सफाई पर ज्ञान भी बघारा जाता है.

फाइनल टैपिंग का चल रहा है काम

BHU के वरिष्ठ गंगा विज्ञानी प्रोफेसर प्रो. बीडी त्रिपाठी ने कहा कि हमारे यहां पर सबसे बड़ी कमी यही है कि एक्शन प्लान 5-10 साल की बनाई जाती है. जबकि, प्रशासन को आगे 50 साल की कार्ययोजना पर काम करना चाहिए. नगवां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ भी यही दस्तूर है. इसे 50 MLD का बनाना ही गलत फैसला था. गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके बर्मन का कहना है कि अस्सी और नगवां नाले की फाइनल टैपिंग पर काम चल रहा है. सरकार ने 308 करोड़ मंजूर किया है. टेंडर प्रक्रिया पूरी करके दोनों नालों को टैप करके मलजल शोधित किया जाएगा.

ये हैं वाराणसी के एक्टिव सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

सिस वरुणा सीवेज सिस्टम की क्षमता 140 MLD है.

वरुणापार सीवेज सिस्टम की क्षमता 120 MLD है.

अस्सी नाले को जोड़ता सीवेज सिस्टम की क्षमता 50 MLD है.

पुराने शहर के सीवेज सिस्टम की क्षमता 80 MLD है.

BHU के लिए भगवानपुर सीवेज सिस्टम की क्षमता 12 MLD है.

बनारस रेल इंजन कारखाना के सीवेज सिस्टम की क्षमता 10 MLD है.

रामनगर सीवेज सिस्टम की क्षमता 12 MLD है.