भाजपा छोड़ साइकिल पर सवार हुए कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, 2017 में थामा था भाजपा का दामन

उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूपी चुनाव 2022 से पहले राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद  आज समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. जिसकी जानकारी सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर करके दी. मौर्य 2017 के चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे. उनकी बेटी बीजेपी की मौजूदा सांसद हैं.

भाजपा से नाता तोड़ने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा भाजपा द्वारा हो रहे लगातार उपेक्षा के कारण फैसला लेना पड़ा. मुझे कोई पछतावा नहीं है. सुबह ही मैं दिनेश शर्मा और बंसल जी से मिला. 1-2 दिन की अंदर इंतजार करिए. अभी तो खेला शुरू हुआ है, एक-दो दिन में खेल का परिणाम आएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल मे तमाम बंदिशें थी, खुलकर काम नहीं करने दे रहे थे, हालांकि मेरे साथ ऐसी बात नहीं थी. उन्होंने कहा कि अफसरशाही की गलती नहीं होती है. ये लोग सीएम के इशारे पर काम करते हैं. नेता के नीति और नियम तय करते हैं कि अधिकारी कैसे काम करते हैं.

राज्यपाल को इस्तीफा सौंपते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) ने पत्र में लिखा, ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के मंत्रिमंडल में श्रम एवं सेवायोजन व समन्वय मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों व विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तरदायित्व का निर्वहन किया है, लेकिन दलितों, पिछड़ों, किसानों बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे- लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से मैं इस्तीफा देता हूं.’

बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya News) ने 2017 में भाजपा का दामन थामा था और पडरौना सीट से विधायक बने थे. वह पडरौना सीट से लगातार तीन बार से विधायक हैं. भाजपा में आने से पहले वह बसपा से विधायक रह चुके थे.

चुनाव आयोग की नियमावली के अनुसार, उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में मतदान 10 फरवरी से शुरू होगा. उत्तर प्रदेश में सात चरणों में 10, 14, 20, 23, 27 और 3 और 7 मार्च को मतदान होगा. जिसकी गिनती 10 मार्च को होगी.

बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 312 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल किया था. पार्टी ने 403 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में 39.67 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया. वहीं समाजवादी पार्टी को 47 सीटें, बसपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस केवल सात सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी.

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