सेंट मेरी स्कूल का कारनामा: मुग़लों का महिमामंडन, महाराणा प्रताप का इतिहास पढ़ाने से इंकार

पूर्व की सरकारों में मुगलों का महिमामंडन और हिंदू इतिहास से छेड़छाड़ किसी से भी छुपा नहीं हुआ है. लेकिन अब वर्तमान में भी इसी गलती को फिर से दोहराने की कोशिश की जा रही है. खबर यूपी के बिजनौर से है, जहां अफजलगढ़ स्थित सेंट मैरी स्कूल में बच्चों को महाराणा प्रताप के बारे में पढ़ाने से ही मना कर दिया गया है. जबकि महाराणा प्रताप का सिलेबस बच्चों की किताब में है. इसकी जानकारी राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना को होने पर उन्होंने स्कूल में जाकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही इस पाठ को नहीं पढ़ाने को लेकर प्राचार्य को ज्ञापन भी सौंपा.

इस प्रकरण में करणी सेना ने महाराणा प्रताप के पाठ्यक्रम को नहीं पढ़ाने के लिए कहने वाले दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है. राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी अजीत राणा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने स्कूल में जाकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानाध्यापिका सिस्टर सिंधु से मिले. उन्होंने कहा कि स्कूल में कक्षा पांच की एसएसटी की किताब में महाराणा प्रताप के इतिहास को नहीं पढ़ाया गया और उस पाठ पर डिलीट का चिन्ह लगाकर छोड़ दिया गया. जबकि उन्हीं मुगलों के बारे में बच्चों को पढ़ाया गया. करणी सेना ने आगे कहा कि हिंदू इतिहास के साथ छेड़छाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

बता दें कि महाराणा प्रताप एक ऐसे राजा थे, जिन्होंने भारत के स्वाभिमान के लिए घास की रोटियां तक खाई और इतिहास में अमर हो गए. उनका अपमान कभी भी बर्दाश्त नहीं होगा. इस मामले में करणी सेना कार्यकर्ताओं ने सात दिन का अल्टीमेटम दिया है. अगर महान महाराणा प्रताप के इतिहास का पाठ बच्चों को नहीं पढ़ा गया. तो सेंट मैरी स्कूल में ताला लगाने का भी काम किया जाएगा. इस मामले में सेंट मैरी स्कूल के प्रबंधन पर धार्मिक भेदभाव के कारण अभिभावकों का गुस्सा चरम पर है.

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