महिला दिवस पर हो महिला की बात: आयुषी तिवारी

संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए जाने के बाद, हर साल 8 मार्च को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है,जिसको मनाने के बहुत सारे अलग अलग उद्देश्य हैं।इस दिन महिलाओं की उपलब्धियों और राजनीतिक ,सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में अपने अधिकारों की लड़ाई में कितनी ही दूर और आगे निकल आई हैं इन बिंदुओं को याद किया जाता है । ये दिन उनकी कामयाबी और प्रगति के जश्न के रूप में मनाया जाता है।
नारी को सृजनात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है,नारी के बिना ना घर है ना ही ये संसार और जो सृजनात्मक होता है उसकी महत्त्वत्ता अपनेआप ही बढ़ जाती है उसे महान कहने या बनाने की कहां जरूरत है।
बात जब महिला दिवस की आती है तो बात भी महिलाओं की ही होनी चाहिए क्योंकि ये दिन नारी को समर्पित है। नारी पहले कैसी थी,अब कैसी है,और कैसी होनी चाहिए,उसकी उपलब्धियां क्या हैं ये बाते होनी चाहिए इन पर विचार होना चाहिए लेकिन हम भ्रमित हो जाते हैं हम महिला की बात में पुरुषों को जरूर लाते हैं ,उनसे तुलना करते हैं, पुरुषों की गलतियां,उनकी खामियां निकालते हैं जो हम हमेशा करते रहते हैं तो फिर आज भी क्यों… दिन और बातें महिलाओं पर है ना तो उनपर ही होनी चाहिए जो की जरूरी है।मुझे ऐसा लगता है की जब तक नारी को नारी का साथ नही मिलता तब ही वो पीछे रहती है थोड़ी कमजोर पड़ती है।अक्सर हम देखते हैं घर में,बाहर ,दफ्तर में नारी की असल दुश्मन नारी हो जाती है ,जो की गलत है ,नारी को तो ममता की मूरत,समर्पण का दूसरा नाम और ना जाने कितना कुछ कहा गया है जो की सत्य भी है लेकिन एक नारी दूसरे नारी के प्रति ऐसा भाव नारी की परिभाषा को धूमिल करता है। जैसे एक बहुत साधारण सा उदहारण रिश्ते का देखते हैं..सास..इस शब्द को मानो भयावह बना दिया गया है ,कुछ ऐसे तथ्य दिख जाते हैं जो मन की दुविधा में डाल देते हैं हालांकि की सब इसका उदाहरण नही हैं लेकिन अधिकता ज्यादा इसकी ही है।नारी को आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले एक नारी के साथ की ही जरूरत होती है।आज इस नवाचार के युग में नारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है लेकिन आज भी ज्यादातर स्थिति सही नही है।नारी की सहभागिता से एक देश ज्यादा प्रगतिशील बनता है । पुरुष की अपनी जगह है और नारी की अपनी अलग है दोनो की महत्ता अलग अलग ही है उनको अलग ही रहने दें तो ज्यादा बेहतर है हां अधिकारों की बात लाजमी है।
आज महिला दिवस पर हर महिला को एक ये संकल्प तो जरूर लेना चाहिए की वो हमेशा एक महिला का साथ देंगी उनको समझेंगी क्योंकि जिस दिन नारी – नारी का साथ देगी एक दूसरे का सम्मान करेगी वह किसी की मोहताज नही होगी।

सशक्त नारी, सशक्त समाज

✍🏻आयुषी तिवारी
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ