जल्द ही पुरातन स्वरुप में देखने को मिलेगा वाराणसी का अस्सी घाट

वाराणसी का अस्सी घाट जल्द ही अपने पुरातन स्वरुप में देखने को मिलेगा. दरअसल काशी का अस्सी घाट वर्तमान समय में तीन-चौथाई रूप से पानी और मिट्‌टी (गाद) से ढक चुका है. अस्सी घाट को वापस पुराने रूप में लाने के लिए नमामि गंगे की टीम द्वारा का यह कार्य शुरू किया है. घाट पर सालों से इस मीट्टी के जमा होने से नए अस्सी घाट की 7 प्लेटफॉर्म और पुराने घाट के 9 प्लेटफॉर्म वर्तमान समय में पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देते हैं, अब इन घाटों से मिट्टी हटने के बाद से वापस से सभी प्लेटफार्म नज़र आने लगेंगे.

नमामि गंगे ने दी है विशाल प्रोटेक्शन कंपनी को घाट के साफ सफाई की जिम्मेदारी

इसके हटने से जल्द ही काशी को फिर से अस्सी घाट का पुराना विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा. इस योजना में अस्सी घाट पर नमामि गंगे की टीम ने पहले जेसीबी के द्वारा गाद यानि मिटटी को हटाने का काम शुरू किया था. इन मिट्टी और गाद से दबने की वजह से 9 प्लेटफार्म में से केवल 3 ही नजर आते थे. बाकी सब 10 साल से ज्यादा समय से मिट्टी में दबे हुए हैं. इस घाट के साफ-सफाई की जिम्मेदारी नमामि गंगे ने विशाल प्रोटेक्शन कंपनी को दी है. यह कंपनी गंगा के पानी और घाट के बीच की दूरी को खत्म कर इनपर जमा मिट्टी को हटाने का कार्य कर रही है. गाद(मिट्टी) इकठ्ठा होने से गंदगी बढ़ जाती है, जो गंगा के लिए ठीक नहीं है. करीब 30 फीट से भी ज्यादा खुदाई करने के बाद घाटों का स्वरूप उभर कर आएगा.

काशीवासियों ने लगायी हैं उम्मीदें

सबसे पहले जेसीबी से मिट्टी काटकर इस घोल को गंगा में बहाया जा रहा है. गंगा विज्ञानियों ने इस पर आपत्ति जताई तो फिर वाराणसी जिलाधिकारी ने इस मिट्टी को किसानों तक पहुंचाने का निर्देश दे दिया. लगभग 2 हजार ट्रक उपजाऊ मिट्टी यहां पर जमा होगी, जिसे किसानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी खनन विभाग को देने की तैयारी चल रही है. कई समाजसेवी संस्थाओं ने सफाई अभियान के तहत यहां काम किया है. लेकिन इसबार नमामि गंगे के इस सफाई अभियान के बाद आने वाले कायाकल्प को लेकर काशीवासी बहुत उम्मीदें लगाकर बैठे हैं कि शायद अब फिर से उन्हें अस्सी घाट का पुराना रूप देखने को मिलेगा.

पीएम मोदी ने अस्सी घाट पर फावड़ा चलाकर की थी सफाई अभियान की शुरुआत

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2014 में पहली बार इसी घाट पर फावड़ा चलाकर सफाई अभियान की शुरुआत की थी. पीएम मोदी ने करीब 10 मिनट तक लगातार फावड़े से मिट्टी काटकर निकाला था. उससे बाद स्थानीय प्रशासन के सहयोग से एक निजी संस्था ने घाट पर जमे सिल्ट को पूरी तरह साफ किया था. तत्पश्चात धीरे धीरे अस्सी घाट के कायाकल्प में परिवर्तन आना शुरू हुआ. नमामि गंगे की टीम बीते 10-15  दिनों से जेसीबी के जरिए घाटो पर जमे सिल्ट को हटा रही है. जिस तरह ये काम चल रहा है उससे लगता है कि आने वाले दिनों में अस्सी घाट अपने पुराने स्वरूप में वापस लौट आएगा.

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