जुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को शिक्षा देने के लिए चलाया जा रहा हैं “मस्ती की पाठशाला”

पैसे की हम करें न बात शिक्षा का हम करे प्रसार सब पढ़े, सब बढ़ें

जबलपुर. ऐसे तमाम निम्न तबके के बच्चे जिनके सपने तो बड़े बड़े हैं लेकिन इन सपनो को पुरा करने के लिए कोई न कोई रास्ता की अवयश्कता होती है. लेकिन ये गरीब का कौन सहारा है .वो कहावत सुना होगा “डूबते को तिनका का सहारा “और आज के समय शिक्षा के अतिरिक्त की दूसरा रास्ता नही जिसके वजह से सपने पूरे किये जा सके.

ऐसा ही कुछ नई पहल मध्य प्रदेश राज्य के जबलपुर से सामने आया जहा गरीब बच्चो को शिक्षित करने के लिए मेडिकल कॉलेज मे कार्य करने वाले नव युवक जो दूसरे शहर से आये है इन्होंने इनके सपनो को पंख लगाने के लिए निकल पड़े हैं और निशुल्क शिक्षा के प्रसार कर रहे हैं.

पहाड़ के किनारे रहने वाले सैकड़ो परिवार जो झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं उनके बच्चों को मेडिकल कॉलेज में कार्य करने वाले युवक शिक्षित कर रहे हैं समाज के सहयोग और अपनी जेब से पैसे एकत्रित करके कॉपी किताब पेंसिल इत्यादि की व्यवस्था कर उन सभी निम्न तबके के बच्चों को प्रतिदिन शिक्षित करते हैं उस परिवार के बच्चे हैं जिनके माता-पिता इनको कहीं अच्छे स्कूल में पढ़ाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं उनके माता या तो किसी के घरों में काम करती हैं या छोटा-मोटा कार्य करके जीवन यापन करती हैं उनके पिता या तो सब्जी बेचते हैं या रिक्शा चलाते हैं या ठेला लगाते हैं ऐसे तमाम परिवारों के बच्चों को यह नवयुवक शिक्षित कर रहे हैं रोशन कुमार पटेल , शीश मिलन , अभिषेक कुमार राजेंद्र पटेल और नीरज शाक्य यह नवयुवक मेडिकल कॉलेज में अपनी नौकरी करने के तत्पश्चात इन बच्चों को शिक्षित करते हैं.

बाता दे, मस्ती की पाठ शाला को रौशन पटेल लीड करते हैं जो समाज सेवा मे पिछले 5 सालों से लगे हैं. और साथ ही ऑल इंडियन रोटी बैंक ट्रस्ट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं.

रोशन कहते हैं की शिक्षा वो है जिसके द्वारा किसी भी इन्सान का शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से विकास होता है सफल मनुष्य ने सफलता पाने के लिए शिक्षा को ही अपना पहला साधन बनाया है.

रोशन कहते हैं की शिक्षा वो है जिसके द्वारा किसी भी इन्सान का शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से विकास होता है हर सफल मनुष्य ने सफलता पाने के लिए शिक्षा को ही अपना पहला साधन बनाया है.