प्रभु श्रीकृष्ण ने फन पर चढ़ किया कालिया नाग का मर्दन, काशी के तुलसीघाट पर संपन्न हुई विश्वप्रसिद्ध नाग-नथैया लीला

काशी के लक्खा मेले में शुमार तुलसीघाट की विश्वप्रसिद्ध नाग-नथैया का आयोजन इस बार तिथि के अनुसार 29 अक्टूबर को किया गया. गंगा के बढ़े हुए जलस्तर के बावजूद शनिवार शाम को तुलसी घाट गंगा के तट पर नाग नथैया को देखने के लिए भारी संख्या में काशीवासी इकट्ठा हुए. नागनथैया प्रतिवर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाया जाता है.

गोस्वामी तुलसीदास ने की थी लीला की शुरुआत

काशी में ज्यादातर लीलाओं का श्रेय गोस्वामी तुलसीदास को जाता है, जिसमें तुलसीघाट पर होने वाली नाग नथैया की लीला भी शामिल है. गोस्वामी तुलसीदास ने ही 494 वर्ष पूर्व इस श्री कृष्ण लीला की शुरुआत की थी. त्योहार से जुड़ी पौराणिक मान्यता यह है कि यमुना में एक नाग कालिया ने मथुरा के मूल निवासियों को परेशान किया था. भगवान कृष्ण ने उसके फन पर नृत्य करके दुष्ट सांप को वश में किया और मूल निवासियों को उसके आतंक से बचाया था.

भगवान की गेंद गिरी यमुना में, फिर….

हर साल की तरह कंदुक क्रीड़ा के समय भगवान श्रीकृष्ण की गेंद यमुना में गिर गई. श्री कृष्ण ने कदम्ब की डार से जमुना रूपी गंगा में छलांग लगा दी. सभी श्रद्धालु जमुना रूपी गंगा में एक टक लगाकर देखते रहे. तभी  भगवान कृष्ण जहरीले कालिया नाग को नथ कर उसके फन पर नृत्य करते दिखाई दिए. प्रभु को देखते ही पूरा वायुमंडल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे से गूंज गया. नाग नथैया को काशी के तत्कालीन राजा कुंवर अनंत नारायण सिंह ने भी अपनी शाही नाव से देखा था. संकट मोचन मंदिर के महंत प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्रा भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए.