Jharkhand: “दुमका जैसी वारदात होती रहती है…” दुमका काण्ड पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दिया शर्मनाक बयान

झारखंड में पिछले दो दिनों में जो भी हुआ, उससे पूरा देश सहम गया. जिसने भी टीवी पर या सोशल मीडिया पर यह खबर देखी. वह क्षण भर के लिए मौन हो गया. अब इस मुद्दे को लेकर झारखण्ड में राजनीति गरमा गई है. इस मामले को लेकर एक ओर जहां बीजेपी लगातार शासन से जवाब मांग रही है. वहीँ, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने इस मुद्दे पर शर्मनाक बयान देकर विपक्ष को हमला करने का एक और मौका दे दिया है.

हेमंत सोरेन ने रविवार को दुमका में नाबालिग लड़की की रेप के बाद हत्या कर शव को पेड़ से लटकाने के मामले में अत्यंत शर्मनाक बयान दिया है. सीएम सोरेन ने कहा- “ऐसी वारदात होती रहती हैं. ये कहां नहीं होती हैं?”

इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार ट्रोल किया जा रहा है. वरिष्ठ पत्रकार दीपक पांडेय ने हेमंत सोरेन की तुलना यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से कर दी है. मुलायम सिंह यादव ने भी कभी रेप के मसले पर कुछ ऐसा ही शर्मनाक बयान दिया था.

ये है मामला

विश्वविद्यालय थाना के श्रीअमड़ा से पुलिस को किशोरी का पेड़ से लटकता हुआ शव मिला था. 3 सितंबर की सुबह श्रीअमड़ा गांव के कुछ लोग रास्ते से गुजर रहे थे. तभी उनकी नजर पेड़ से लटक रहे किशोरी के शव पर पड़ी. किसी ने बताया कि पास एक घर में नाबालिग काम करती थी. इसके बाद में उसकी शिनाख्त हो सकी थी. मृतका रानेश्वर थाना इलाके के रंगलिया पंचायत की थी.

रंगलिया के कोचीया डगाल की रहने वाली युवती दुमका के जामा स्थित अपनी मौसी के घर काम करती थी. इस दरम्यान अरमान अंसारी नाम के एक मुस्लिम युवक ने उसे प्रेम जाल में फंसाया और उसे गर्भवती कर दिया. जब आरोपी पर शादी का दबाव बनाया तो एक साजिश के तहत युवती की हत्या कर दी गई.

आरोपी युवक हो चुका है गिरफ्तार

मुफस्सिल थाना पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 376, 302 समेत पॉस्को एक्ट और SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपी अरमान को गिरफ्तार कर लिया है. डीआईजी सुदर्शन मंडल ने कहा है कि लड़की की दुष्कर्म के बाद हत्या की गई. 

झारखण्ड में दलित और आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं: अमित मालवीय

उधर, BJP नेता अमित मालवीय ने ट्विटर पर लिखा, ‘अंकिता सिंह के बाद अब अरमान अंसारी ने दुमका में एक नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ रेप, हत्या कर उसे पेड़ से लटका दिया. हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में दलित और आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं. सोरेन ने खुद और परिवार को खदान के पट्टे बांटने में व्यस्त रखा  और कट्टरपंथी तत्वों को हावी होने दिया.