पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में बन रहा है देश का सबसे आधुनिक घाट, जल, थल और वायु तीनों मार्गों से रहेगा कनेक्ट

अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक बढ़ रहे पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए खिड़किया घाट को वाराणसी ही नहीं अपितु भारत के पहले मॉडल घाट के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस घाट को सड़क और जलमार्ग से जोड़ने वाले केंद्र के रूप में विकसित करा जा रहा है.

बाबा महादेव की नगरी काशी को विश्व की प्राचीनतम नगर एवं भारत की सांस्कृतिक राजधानी भी कही जाती है. विश्व के इस प्राचीनतम जीवित शहर काशी को पीएम मोदी द्वारा स्मार्ट शहर बनाने का प्रयास धीरे-धीरे मूर्त रूप लेता दिख रहा है. वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिये विभिन्न प्रकार की हजारों करोड़ की परियोजनाएं शहर में चल रही हैं. जिनका की समय समय पर उद्घाटन व शिलान्यास स्वयं मोदी जी करते भी रहते हैं. काशी को आधुनिक बनाने के इन्हीं उद्देश्य से वाराणसी का पहला मॉडल घाट बनाया जा रहा है जोकी पूरे वाराणसी या पूरे पूर्वांचल का ही नहीं अपितु संभवतः देश का सबसे आधुनिक घाट होगा.

सुविधाओं व कनेक्टिविटी के आधार पर होगा देश का सबसे आधुनिक घाट

बनारस के अस्सी और दशाश्वमेध घाट पर देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग घूमने के लिए आते हैं. बनारस की सुबह पूरे विश्व में प्रसिद्ध है और हो भी क्यों न, जहां गंगा नदी के किनारे सुबह की छटा अनोखी और निराली दिखती है. इसे देखने के लिए विदेशी यात्री खींचे चले आते हैं. बता दें की वाराणसी में ऐसे तो 80 से अधिक घाट हैं और सभी घाटों की अपना इतिहास एवं विशेषताएँ हैं, जिनमें की संत रविदास घाट से लेकर आदिकेशव तक के घाट आते हैं. इनमें से कुछ अति प्रसिद्ध एवं सुंदर घाट हैं, जैसे कि अस्सी और दशाश्वमेध घाट तो कुछ कम प्रसिद्ध एवं उपेक्षित अवस्था में. इन्हीं घाटों में से एक है खिड़किया घाट जहाँ पर पर्यटक प्रसिद्ध घाटों से तुलनात्मक दृष्टि में कम संख्या में आते हैं. परंतु काशी का यह घाट ऐसा बन रहा है जो अस्सी घाट और दशाश्वमेध समेत सभी 84 घाटों से खूबसूरत ही नहीं दिखने वाला अपितु अत्याधुनिक सुविधाओं व कनेक्टिविटी के आधार पर यह देश का सबसे आधुनिक घाट होगा.

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इतनी है प्रोजेक्ट की लागत

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं खिड़किया घाट की, जहां आने वाले दिनों में देश-विदेश के पर्यटकों के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी. खिड़किया घाट के गुमनाम पड़ी इस विरासत को अब देश एवं दुनिया देख पाएगी. इस उद्देश्य के साथ इस विशेष क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन सुविधाओं के आधार पर विकसित किया जा रहा है. इसके लिए यहाँ पर फेरी सर्विसेज की सुविधा, हेलीपोर्ट, क्रूज़, ऑडिटोरियम, CNG स्टेशन, पार्किंग स्टैंड, Children Park, ओपन एयर थिएटर इत्यादि बनेंगे जोकी इस घाट को नवीन जीवन प्रदान करेंगे. प्रोजेक्ट की अधिक जानकारी के लिए बता दें की वाराणसी की स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत लगभग 46 करोड़ रुपये की लागत से 11.5 एकड़ क्षेत्र में 600 मीटर पक्काघाट का निर्माण कर इस खिडकिया घाट के मॉडल घाट का निर्माण कार्य भारत सरकार की नवरत्न कंपनियों में से एक नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारोपोरेशन (एनबीसीसी) कर रही है.

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ये हैं इस प्रोजेक्ट की विशेषताएँ

प्रोजेक्ट की विशेषताओं की जानकारी के लिए बता दें की इस प्रोजेक्ट कि घाट कटाव वाले इस क्षेत्र में जेबियान व जियोसिंथेटिक टेक्नोलाजी से निर्माण किया जा रहा है. इसमें सीमेंट का कम से कम उपयोग किया जाएगा और पत्थरों को करीने से सहेज कर तार की जाली से मजबूती से बांधा जाता है. इससे पूरा ढांचा कटाव व वर्षा से पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा. वहीँ दूसरी ओर इस घाट को विस्तार देते हुए इसका सौंदर्यीकरण किया जा रहा है और इसे मिनी टर्मिनल का रूप दिया जा रहा है. यहां पर तीन फ्लोटिंग जेटी लगाई जानी है. इसमें एक गेल को दी गई है जहां सीएनजी फिलिंग स्टेशन बन चुका है, जो सबसे विशेष है क्योंकि काशी के गंगा नदी में जो डीजल चालित नावें हैं उनको मॉडिफाई अर्थात परिवर्तित कर के सीएनसी से चलाने के लिए क्रमबद्ध तरीके से डीजल चलित नावों में परिवर्तित किया जा रहा है. इससे वाराणसी के वायु और जल प्रदूषण में भी कमी आएगी.

सांस्कृतिक आयोजनों के लिए होगा बेहतर स्थान

इसके अलावा घाट पर ओपन एयर थिएटर और सोवेनियर प्लाजा भी विशेष होगा. थिएटर में नित्य संध्या बनारस की धरोहर व संगीत की प्रस्तुतियां होंगी. जिसका मंच गंगा की ओर बनाया गया है. जहाँ पर 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था है. यह अपनी प्रकार का एक मॉडल ओपेन थिएटर होगा जिसका निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है. मंच के ठीक सामने दर्शकों के बैठने के लिए ऊँचीं सीढ़ीयों का निर्माण किया गया है तथा आने-जाने के लिए सामान्य सीढ़ी अलग से बन चुकी है. इसके अतिरिक्त इस घाट पर ओपन पार्क में पाथवे भी बनाया जाएगा. इसे गंगा किनारे मालवीय पुल के नीचे खिड़किया घाट से भैंसासुर घाट के बीच बनाया जाएगा. इसके बन जाने से सांस्कृतिक आयोजनों के लिये एक बेहतर स्थान उपलब्ध होगा. पहले इन दोनों राजघाट और भैसासुर घाटों की खिड़किया घाट से कनेक्टिविटी नहीं थी, परंतु इसके सौंदर्यीकरण के पश्चात अब इन तीनों घाटों की कनेक्टिविटी एक दूसरे से हो जाएगी, जिससे घाट लंबा और खूबसूरत दिखेगा.

यह सुविधाएँ भी होंगी उपलब्ध

बनारस की हस्त शिल्प प्रदर्शित करने हेतु यहाँ पर एक सोविनियर प्लाजा भी होगा. इसमें आसपास के स्थानीय दुकानदारों को आधुनिक स्टॉल बनाकर दिये जाएंगे. इसके अतिरिक्त गंगा किनारे म्यूजिकल फव्वारा, चिल्ड्रेन पार्क, व रेस्टोरेंट भी बनाया जाएगा. सबसे महत्वपूर्ण है कि यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए इस घाट पर वाहन की कठिनाइयों से मुक्त हो सके इसके लिए यहाँ पर दो टू व्हीलर पार्किंग व एक फोर व्हीलर पार्किंग भी बनाई जाएगी. अभी तक गंगा किनारे पर्यटकों का आगमन केवल दशाश्वमेध से लेकर अस्सी घाट के मध्य ही होता था जिसके कारण उन घाटों पर दबाव भी बढ़ गया है. परंतु जीटी रोड से जुड़े इस खिडकिया घाट के विकसित हो जाने से पर्यटक बिना भीड़ के वाहन से यहां तक सीधा पहुँच सकते हैं.

जल, थल और वायु मार्ग तीनों से जुड़ेगा यह घाट

जानकारी के लिए बता दें की यहाँ स्थित काशी रेलवे स्टेशन पर इंटर मॉडल स्टेशन भी बनना है एवं उसके आगे खिड़किया घाट पर फेरी सर्विस से भी जोड़ दिया गया है जिसके लिए इस खिड़किया घाट पर ही परिवहन विभाग की ओर से फेरी-फेरी सर्विस से जोड़ा गया है. सड़क व जल मार्ग के अतिरिक्त इस घाट को वायु मार्ग से जोड़ने के लिए यहाँ पर 2 हेलीपोर्ट अथवा हेलीपैड का भी निर्माण हो रहा है. जिसके पश्चात यह जल थल के साथ नभ अर्थात वायु मार्ग से भी जुड़ जाएगा. जल थल और नभ से जुड़ने वाला ये मल्टी मॉडल, मिनी टर्मिनल देव दीपावली जैसे अवसरों में क्राउड मैनेजमेंट में भी उपयोगी होगा. इसके अतिरिक्त राजघाट और भैंसासुर घाट का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है, जो इस खिड़किया घाट से जुड़ जायेगा.

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