बिहार के लोगों के लिए संघर्ष है स्वाभाविक: सान्या राय

प्रणाम मित्रों…
आज बिहार दिवस है, आप सभी को बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
बिहार में कई सारे विद्वान हुए जैसे- चाणक्य, आर्यभट्ट, महावीर , गौतम बुद्ध, अशोक, कुंवर सिंह , रामधारी सिंह दिनकर, राजेंद्र प्रसाद, शेर शाह सूरी, रामवृक्ष बेनीपुरी, फणीश्वर नाथ रेणु , बाबा नागार्जुन, विद्यापति आदि.
तत्काल बिहार की बात करें तो पंकज त्रिपाठी, जफर इकबाल, आनंद कुमार, मनोज बाजपेई, सुशांत सिंह राजपूत, दिलेर मेंहदी, मीका सिंह, आनन्द मिलिंद आदि.
लेकिन पता है बिहार को बिहार बनाने में सिर्फ इनका हाथ नहीं है… क्योंकि मैं भी बिहार में ही पली बढ़ी हूं तो थोड़ा बिहार को थोड़ा बहुत समझती हुं।

बिहार को बिहार बनाती है वो जीवनशैली जिसका महत्वपूर्ण भाग है संघर्ष. बिहार के लोगों के लिए संघर्ष स्वाभाविक है।
वहां स्वभाविक है किसान के डॉक्टर बेटे का शहर से लौटने पर खेत में चेखुर्नी करना।
स्वाभाविक है दो बच्चों की मां होने पर भी यूपीएससी जैसी कठिन इम्तिहान में अव्वल आना।
स्वाभाविक है लालटेन के उजाले में पढ़कर अपने जीवन को रौशन करना।
स्वाभाविक है अंग्रेजी की अच्छी जानकारी होने पर भी फ्लाइट के यात्रियों को भोजपुरी में संबोधित करना
स्वाभाविक है सलमान और शाहरुख खान को छोड़कर खान सर को अपना आदर्श बनाना ….
हमें शर्म नही आती अपनी मां को माई बुलाने में … नाही गोहरे पर बनी लिट्टी पर टूटने में…. पीपल के नीचे खटिया डाल कर सोने के आनंद को तो 5 स्टार होटल में भी नहीं….
हां थोड़े अड़ियल हैं … स्वाभिमान पर आंच बर्दाश्त नहीं कर पाते … न वामपंथ की धारा में बहना सीख पाएं हैं .. हम तो ताकि ताकि रुम्बा….से ज्यादा रिंकिया के पापा गाने पर नाच लेते हैं….. महंगे हाइब्रिड कुत्ते तो नही पाले पर गली के कुत्तों के लिए मां हमेशा 4 रोटियां बचा के रखती है….. और ऐसी कई सारी बातें हमें बिहारी बनाती हैं।
किसी महान व्यक्ति ने यूंही तो नही कहा होगा “एक बिहारी सौ पर भारी।”

  • सान्या राय