कौन है वो मोची ? जिसने सड़क किनारे सीडीएस बिपिन रावत को दिया श्रद्धांजली, सोशल मीडिया पर जमकर हो रही तारीफ

बुधवार को तमिलनाडू के कुन्नूर में हुए हादसे में सेना प्रमुख विपिन रावत एवं उनकी पत्नी समेत 13 लोग शहीद हो गए. जिसके बाद देश पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. भारत के लगभग सभी कोनों से लोगों ने शहीद हुए जवानों को अपने रंग में श्रद्धांजली दी. वहीं अहमदाबाद के नवरंगपुरा में जूते सिलने वाले एक मोची ने रावत को ऐसी श्रद्धांजली दी. जो देश में चर्चा का विषय बना हुआ है.

दरअसल, गुजरात के अहमदाबाद में फूटपाथ पर एक साधारण से मोची के श्रद्धांजली देने के तरीके ने सोशल मीडिया पर विशेष रूप से लोगों को आकर्षित किया.  @righteous_monk  नाम के ट्विटर यूजर ने अहमदाबाद में रोड किनारे एक मोची की तस्वीर शेयर किया. जिसमें मोची को जूते ठीक करते हुए देखा गया. साथ ही पास में भगवा कपड़े से ढकी कुर्सी पर सेना प्रमुख बिपिन रावत की तस्वीर रखी हुई थी. साथ ही उन्हें माल भी अर्पित किया हुआ था और अगरबत्ती जलाई थी. इसके पीछे का मोची का उद्देश्य केवल देश के सैनिक को श्रद्धांजलि देना था.

ट्विटर यूजर के अनुसार, बिपिन रावत के भाई ने इसे देखकर जब पूछा कि उसने इस पर कितना खर्च किया है. वे इसके लिए भुगतान करना चाहते हैं. तो मोची ने किसी भी तरह के पैसे लेने से साफ़ इंकार कर दिया. उसने गुजराती में जवाब दिया, “मैं इतना कमाता हूं कि अपने देशवासियों के लिए थोड़ा सा खर्च कर सकता हूं.”

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मोची के इस भाव की सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है. एक ओर ऐसे देशभक्त हैं जो छोटे से छोटा काम करते हुए भी देशभक्ति का इजहार कर रहे हैं. तो दूसरी ओर इस्लामिक कट्टरपंथी हैं, जिन्हें अपने देश के जवानों की शहादत में मजा आता है. ये पूरी तरह से नफरती कुलीन भावना से ग्रसित हैं.

बता दें कि जिस समय सेना प्रमुख का हेलिकॉप्टर क्रेश हुआ था और देश सैनिकों के सलामती की दुआएं कर रहा था. साथ ही मृतकों की संख्या और घायलों की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. ऐसे में लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग, कर्नल बलजीत बक्शी, नेशनल हेराल्ड के संपादक एश्लिन मैथ्यू जैसे कुछ पूर्व सेना अधिकारी और कई अन्य वामपंथ की भावना से ग्रसित विशेष समुदाय के लोगों ने जनरल रावत और अन्य सैनिकों के निधन पर बेतुके और असंवेदनशील पोस्ट किए थे.

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