Nalanda University: खिलजी ने शिक्षा के मंदिर में लगाई थी आग, 3 महीने तक जलती रही किताबें, जानिए नालंदा का पूरा इतिहास

शिक्षा की जब भी बात होगी, नालंदा यूनिवर्सिटी की बात आएगी. आठवीं शताब्दी से 12 वीं शताब्दी के बीच दुनिया के कई देशों से छात्र यहाँ पढ़ने आया करते थे. लेकिन फिर अचानक से ऐसा हुआ कि यह यूनिवर्सिटी पूरी तरह से बर्बाद हो गई. आइए जानते हैं शिक्षा के प्रारंभ से नालंदा के विध्वंस की पूरी कहानी-

प्राचीन काल में भारत शिक्षा का केंद्र हुआ करता था. इस विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासनकाल में कुमार गुप्त प्रथम (450-470) ने की थी. नौवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक इस विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थी. यहां इतनी किताबें रखी थीं कि जिन्हें गिन पाना आसान नहीं था. हर विषय की किताबें इस विश्वविद्यालय में मौजूद थीं. कहा जाता है कि ये उस समय केवल भारत ही नहीं उस दौर में ये दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे मशहूर विश्वविद्यालय हुआ करती थी. यहां के छात्र केवल भारत ही नहीं बल्कि चीन, जापान, कोरिया और तुर्की जैसे देशों के साथ ही पूरे एशिया से आते थे. साहित्यिक अभिलेखों और शिलालेखों के अनुसार नालंदा विश्वविद्यालय का डेटा योग्य इतिहास गुप्त काल से शुरू हुआ, जो कम से कम 2100 साल पुराना है, पुरातात्विक खुदाई और आगे की खोजों से यह साबित होता है कि यह 1200 ईसा पूर्व से आगे की अवधि से अस्तित्व में है. नालंदा सहित सभी प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालयों ने वैदिक शिक्षा के अत्यधिक औपचारिक तरीकों का पालन किया. यह गुप्त थे जिन्होंने विश्वविद्यालय शिक्षा को संरक्षण दिया, जिससे नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना हुई. 

नालंदा की दीवारें इसकी तबाही का प्रमाण दे रही हैं. फोटो क्रेडिट- सान्या राय

3 महीने तक जलती रही आग

वैसे तो मुस्लिम आक्रांताओं का मंदिरों को लूटना कोई नई बात नहीं है. लेकिन 1193 ईस्वी में मुस्लिम आक्रांता बख्तियार खिलजी के नेतृत्व में मामलुक के नाम से प्रचलित तुर्की मुस्लिम आक्रमणकारी ने नालंदा को लूटा और नष्ट कर दिया. नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय इतना विशाल था कि इसमें 90 लाख से अधिक पांडुलिपियों के बारे में बताया गया है. तिब्बती स्रोतों की मानें तो नालंदा में पुस्तकालय तीन बड़ी बहुमंजिला इमारतों में फैला हुआ था. इनमें से एक इमारत में 9 मंजिलें थी. जिसमें सबसे पवित्र पांडुलिपियां थी. यह पुस्तकालय की विशालता ही थी कि खिलजी ने जब इमारत में आग लगाई. उसके बाद यह आग 3 महीने तक जलती रही. इसके अलावा मुस्लिम आक्रमणकारियों ने वहां तोड़फोड़ किया और मठों को नष्ट कर दिया. साथ ही भिक्षुओं को भी वहां से खदेड़ दिया.

कुतुबुद्दीन ऐबक से था प्रेरित

मोहम्मद गोरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक का सेनापति बख्तियार खिलजी था. मोहम्मद गोरी ने जब सोमनाथ मंदिर को लूटा, उसकी आकांक्षा को देखते हुए खिलजी ने भी नालंदा को लूटने और तबाह करने की योजना बनाई. भारतीय इतिहासकार मिनहाज-ए-सिराज ने अपनी पुस्तक तबक़त-ए-नासिरी में कुछ दशक बाद उनके कार्यों को दर्ज किया. इतिहास के पन्नों को खंगालने पर पता चलता है कि खिलजी को बिहार की सीमा पर दो गांव सौंपे गए थे. यही अवसर देखते हुए, उसने बिहार में कई लूटपाट और छापे शुरू किए. जिसके लिए उसे मुस्लिम आक्रमणकारियों ने सम्मानित भी किया. इसी सम्मान ने खिलजी का हौसला बढ़ाने का काम किया. जिसके बाद उसने बिहार के एक और किले पर हमला करने का फैसला लिया और एक बड़ी लूट को अंजाम दिया. कुछ इतिहासकार बताते हैं कि नालंदा केवल बौद्ध का केंद्र था. जबकि एसएसआई की खोज के अनुसार, वहां से कई हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां भी बरामद हुई हैं. जो कि हिंदुओं की उपस्थिति का प्रमाण देती हैं.

नालंदा की विशेषताएं

  • नालंदा विश्वविद्यालय कला का एक अद्भुत नमूना है. कहा जाता है कि इस विश्वविद्यालय में 300 कक्ष, 7 बड़े कक्ष और अध्ययन के लिए एक 9 मंजिला विशाल पुस्तकालय हुआ करता था. जिसमें उस वक्त 3 लाख से ज्यादा किताबें मौजूद थीं. 
  • नालंदा विश्वविद्यालय को तक्षशिला के बाद दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है. आवासीय परिसर के तौर पर ये पहला विश्वविद्यालय है जो करीब 800 वर्षों तक अस्तित्व में रहा. 
  • नालंदा विश्वविद्यालय में छात्रों का चयन उनकी योग्यता के अनुसार होता था और छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती थी. इसके अलावा रहने और खाने के भी कोई पैसे नहीं अदा करने पड़ते थे. 
  • विश्वविद्यालय में 10 हजार से ज्यादा छात्र शिक्षा प्राप्त करते थे और 2 हजार से अधिक शिक्षक उन्हें शिक्षा देते थे. 
  • नालंदा में उस दौर में तुर्की, कोरिया, जापान, तिब्बत, इंडोनेशिया, ईरान, ग्रीस, मंगोलिया समेत कई देशों से छात्र पढ़ने के लिए आते थे. 
  • इस विश्वविद्यालय में हर्षवर्धन, धर्मपाल, वसुबन्धु, धर्मकीर्ति, आर्यवेद, नागार्जुन जैसे कई महान विद्वानों ने शिक्षा ग्रहण की है. 
  • संस्कृत के ना+आलम+दा के संधि विच्छेड से नालंदा शब्द बना है. जिसका अर्थ ज्ञान रूपी उपहार पर कोई प्रतिबंध न रखना से है. 
  • साल 2010 में नालंदा की तर्ज पर नई नालंदा यूनिवर्सिटी का निर्माण बिहार के राजगीर में किया गया.