जयंती विशेष: 208 किलो की दो तलवारें और 72 किलो का कवच, जानें मातृभूमि के वीर सपूत महाराणा प्रताप के बारे में अनसुनी बातें

मेवाड़ के राजपूत राजा, महाराणा प्रताप एक निडर योद्धा और एक उत्कृष्ट युद्ध रणनीतिकार के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने मुगलों के बार-बार होने वाले हमलों से मेवाड़ की रक्षा की थी. मेवाड़ के शासक, महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई को वर्ष 1540 में हुआ था. वे उदयपुर के संस्थापक उदय सिंह द्वितीय और महारानी जयवंता बाई के सबसे बड़े पुत्र थे.

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, उनकी जयंती ज्येष्ठ महीने के तीसरे दिन मनाई जाती है. लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मेवाड़ के 13 वें राजपूत राजा महाराणा प्रताप प्रथम की जयंती हर साल 9 मई को मनाई जाती है. महाराणा प्रताप के तीन छोटे भाई थे- शक्ति सिंह, विक्रम सिंह और जगमल सिंह. उनकी 2 सौतेली बहनें भी थीं.

कब राजा बने महाराणा प्रताप?

महाराणा प्रताप 1572 में उदय सिंह की मृत्यु के बाद मेवाड़ के राजा बने. वे राजस्थान के मेवाड़ के 13वें राजपूत राजा थे.

द माउंटेन मैन’

महाराणा प्रताप को भारत के अब तक के सबसे ताकतवर योद्धाओं में से एक माना जाता है. 7 फीट 5 इंच की लम्बाई वाले प्रताप 80 किलोग्राम का भाला और कुल मिलाकर लगभग 208 किलोग्राम वजन की दो तलवारें लेकर चलते थे. वह 72 किलोग्राम वजन का कवच भी पहनते थे.

प्रथम देशी स्वतंत्रता सेनानी

प्रताप ने उदयपुर से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण में चावंड शहर में अपनी राजधानी का पुनर्निर्माण किया और अपना शेष जीवन वहीं बिताया. मुगलों के खिलाफ स्वतंत्रता के लिए उनकी लड़ाई के कारण, महाराणा प्रताप को व्यापक रूप से भारत के पहले मूल स्वतंत्रता सेनानी के रूप में माना जाता है. महाराणा प्रताप ने 19 जनवरी, 1597 को अंतिम सांस ली.