मध्यप्रदेश के पन्ना में हीरा मिले यह होती है सबकी तमन्ना, जमीन का पट्टा व लाइसेंस लेकर कोई भी कर सकता है खुदाई

(डॉ0 विनय कुमार वर्मा द्वारा यात्रा के दौरान)

मध्य प्रदेश के सतना में एक जरूरी काम से बुधवार को आगमन हुआ था। एक परिचित व्यक्ति से मिलने के लिए पन्ना शहर पहुंचा। वहां जाकर पता चला कि शहर के 20 किलोमीटर रेडियस में हर किसी की तमन्ना होती है कि उसे हीरा मिले। कहते हैं कि पन्ना में मिलने वाला हीरा सबसे अच्छा माना जाता है। किस्मत व जुनून की बात भी है। कई मजदूरों के भाग्य बदल गए अब वे लोग भी सेठ कहलाते हैं।

हम लोग आदरणीय जगदीश प्रसाद जड़िया जी के आवास पर थे। वहीं से जानकारी बढ़नी शुरू हुई। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के पन्ना में हीरा ढूंढने के लिए कहीं का कोई भी व्यक्ति खुदाई कर सकता है। इसके लिए उसे सबसे पहले हीरा कार्यालय पन्ना से पट्टा (लाइसेंस) लेना होता है, जो तीन फोटो, आधार कार्ड की प्रति और दो सौ रुपए का चालान जमा करवाने पर मिलता है। पट्टा सिर्फ जनवरी से दिसम्बर तक के लिए ही वैध होता है। बाद में नया पट्टा लेना पड़ता है। पट्टा मिलने का मतलब होता है कि संबंधित व्यक्ति को विभाग की ओर से हीरा खदानों में 8 गुणा 8 मीटर की एक जगह अलॉट कर दी जाती है, जहां पर वह एक साल में कभी भी खुदाई करके हीरा ढूंढ सकता है।

बताया कि किसी लाइसेंसधारी व्यक्ति को पन्ना की खदान में हीरा मिलने के बाद उसे डायमंड कार्यालय में वह हीरा जमा करवाना पड़ता है, जहां उसकी गुणवत्ता व कीमत तय होती है। फिर उसे नीलामी के लिए रख दिया जाता है। हीरा चाहे 100 रुपए का हो या एक करोड़ का उस पर सरकार साढ़े 12 प्रतिशत की दर से एक प्रतिशत टीडीएस समेत रॉयल्टी वसूलती है। शेष राशि लाइसेंसधारी व्यक्ति को दे दी जाती है।

हीरा कार्यालय से होती है नीलामी

हीरा कार्यालय पन्ना मध्य प्रदेश में 200 से 250 हीरे एकत्रित होने पर उन सबको एक साथ ऑफ़लाइन नीलामी में रखा जाता है, जिसमें मुम्बई, भोपाल, सूरत, दिल्ली समेत कई जगहों के हीरा व्यापारी हिस्सा लेते हैं। सरकारी दर से बोली शुरू होती है। सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को हीरा सौंप दिया जाता है। पन्ना की धरती में इतने हीरे निकलते हैं कि औसतन हर तीन-चार माह बाद हीरों की नीलामी होती है।

यहां तीन तरह के मिलते हैं हीरे

उन्होंने बताया कि पन्ना की धरती मुख्यतय तीन तरह के हीरे उगलती है।  यहां पर जेम (व्हाइट कलर), ऑफ कलर (मैला रंग) और इंडस्ट्रियल क्वालिटी (कोकाकोला कलर) के डायमंड पाए जाते हैं। सबसे महंगा जेम डायमंड होता है। ऑफ कलर का डायमंड फैंसी आइटम में काम आता है जबकि इंडस्ट्रियल क्वालिटी के डायमंड से कांच काटे जाते हैं। पन्ना में हीरे के कैरेट व उसके कलर से कीमत तय होती है। नीलामी के एक महीने में हीरे मालिक की जेब में पैसे आ जाते हैं। व्यापारी द्वारा समय पर भुगतान नहीं करने पर उसकी पांच हजार रुपए की जमानत राशि जब्त करके सरकारी खाते में डाल दी जाती है और हीरा अगली नीलामी में रखा जाता है।

पन्ना में हीरे मिलने की वजह

जगदीश प्रसाद जड़िया बताते हैं कि भारत में अब तक का सबसे बड़ा हीरा भंडार पन्ना की धरती है। यह कुदरत की देन है। वैसे अधिक ताप वाली भूमि में हीरे पाए जाते हैं, जो पन्ना की भूमि में है। इसके अलावा पड़ोसी जिले छतरपुर में पन्ना टाइगर रिजर्व से लगे बक्सवाहा क्षेत्र में भी हीरे निकलते हैं।

इन जगहों पर मिलता है हीरा

पन्ना जिला मुख्यालय से पश्चिम दिशा में 15 किलोमीटर तक जरुआपुर गांव के आस-पास के इलाका।पन्ना जिला मुख्यालय से दक्षिण दिशा में भी 15 किलोमीटर तक ढलान चौकी के आस-पास का क्षेत्र। मुख्यालय से उत्तर दिशा में 12 किलोमीटर तक सतना रोड पर सकरिया के आस-पास का इलाका।

पन्ना में 30 फ़ीट नीचे मिलता है डायमंड

पन्ना के भूगर्भ में हीरा जमीन पर सबसे पहले तीन से लेकर 30 फीट तक की गहराई में ग्रेवल निकलती है। फिर ग्रेवल के बाद की जमीन में हीरे मिलने की संभावना रहती है। इस मिट्टी की खुदाई के साथ-साथ पानी से धुलाई की जाती है, ताकि कोई चमकता हुआ हीरा नजर आ जाए। इसके अलावा लाल मोरंग में भी हीरे मिलते है। इसे भी पानी में डालकर छाना जाता है।

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