जन्मदिवस विशेष: एक साहसिक घटना ने ‘चंद्रशेखर’ को बनाया ‘चंद्रशेखर आजाद’, जब अंग्रेज जज ने दी थी 15 कोड़ों की सजा

चंद्रशेखर आजाद बहुत कम उम्र से ही देश के लिए लड़ने के लिए प्रेरित हुए थे. वे 15 साल के थे जब उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया था. “चन्द्रशेखर का जन्म 23 जुलाई 1906 में मध्य प्रदेश के झबुआ जिले के एक गांव भाभरा में हुआ था. आजाद की एक खासियत थी न तो वे दूसरों पर जुल्म कर सकते थे और न स्वयं जुल्म सहन कर सकते थे.

जज के सवालों का ऐसे दिया जवाब

1919 में अमृतसर के जलियांवाला बाग कांड ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था. चन्द्रशेखर उस समय पढ़ाई कर रहे थे. 15 वर्ष की उम्र में वह गांधीजी के असहयोग आन्दोलन में सैकड़ों छात्रों के साथ कूदकर आजादी की लड़ाई के योद्धा बन गए. चन्द्रशेखर को अंग्रेज पुलिस ने गिरफ्तार किया तथा अदालत में जज ने नाम पूछा तो उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि आजाद. उसके बाद जज ने पूछा तुम्हारे पिता का नाम क्या है? तो उन्होंने पूरी निडरता से कहा कि आजादी. जज ने पूछा तुम्हारा घर कहा है? तो उन्होंने कहा कि जेलखाने में.

ऐसे बने ‘आजाद’

यह सुनकर अंग्रेज जज ने गुस्से से भरकर 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई हर कोड़े पर आजाद एक ही नारा लगा रहे थे – “भारत माता की जय. वन्दे मातरम्.” इस साहसिक घटना ने बालक चन्द्रशेखर को “चन्द्रशेखर आजाद” बना दिया.