Azadi ka Amrit Mahotsav: विभाजन के बावजूद 15 बोलियों में बनीं 280 फ़िल्में, “मैं 1947 का हिन्दुस्तान बोल रहा हूं…”

1947, जून का महीना…सूरज भी मानो हिन्दुस्तान में लिखी जा रही बंटवारे की इबारत देख तमतमा रहा था. ब्रिटिश हुकूमत बंटवारे की लकीरों पर मंजूरियों की मुहर लगवाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही थी. अफसोस ये कि उसके मंसूबे कामयाब होते भी दिख रहे थे. उस जद्दोजहद को 1947 के हिन्दुस्तान की जुबानी बता रहे हैं- डॉ. धनंजय चोपड़ा.

ये फ़िल्मी कलाकार हो गए पाकिस्तानी

जून तक तो बंटवारे की गूंज मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में भी साफ-साफ सुनाई देने लगी थी. जैसे ही पता लगा कि पंजाब का एक हिस्सा पाकिस्तान में जाने वाला है, तो कई फिल्मी हस्तियां अपनी जमीन की ओर लौटने की बात कह कर पाक के हक में आ गईं. इनमें नूरजहां, साहिर लुधियानवी, बेगम पारा और बिब्बो जैसे दिग्गज कलाकार शामिल थे. उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने मन बना लिया था कि वे लाहौर में ही रहेंगे. लता मंगेशकर के गुरु उस्ताद अमानत अली खान भेंडी बाजारवाले भी पाकिस्तानी हो गए. हालांकि, बाद में इनमें से कई लोग हिन्दुस्तान लौट आए.

इसी साल 15 बोलियों में बनीं 280 फ़िल्में

इस बीच, 1947 के हिन्दुस्तान का सिनेमा थमा नहीं. इस साल 15 बोलियों में 280 फिल्में बनीं, जो यह बताने के लिए काफी थीं कि कलाएं किसी विभाजन रेखा की मोहताज नहीं होतीं. इधर, विभाजन का प्रस्ताव तैयार करने वाले माउंटबेटेन ने 2 जून को लंदन से लौटते ही ऐलान कर दिया कि सत्ता का हस्तांतरण जल्द ही होगा. नेहरू, पटेल, कृपलानी, जिन्ना, लियाकत अली, अब्दुल रब निस्तार और बलदेव सिंह की मौजूदगी में यह घोषणा की गई.

4 प्रमुख नेताओं ने रेडियो पर की घोषणा

3 जून 1947 को शाम 7 बजे देश के 4 प्रमुख नेताओं (नेहरू, पटेल, बलदेव सिंह, जिन्ना) ने रेडियो पर घोषणा कर दी कि वे हिन्दुस्तान का बंटवारा करने की योजना पर सहमत हैं. ये सुनते ही मेरे बाशिंदों में हाहाकार मच गया. कई उम्मीदें बंधीं, कई टूटीं. गांधीजी हताश थे. जैसे ही माउंटबेटेन को पता लगा कि गांधीजी कांग्रेस से नाता तोड़कर 4 जून की प्रार्थना सभा में उनकी योजना की निंदा करने वाले हैं, तो उन्होंने गांधीजी को वायसराय हाउस में बुला लिया.

15 अगस्त 1947 को हुई सत्ता हस्तांतरित

माउंटबेटेन कामयाब हो गए. 4 जून 1947 की शाम को पत्रकारों से बात करते हुए माउंटबेटेन ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख बताई-15 अगस्त 1947. पूरा देश चकित रह गया. लंदन में भारत की आजादी की तारीख घोषित करने का इंतजार कर रहे ब्रिटिश पीएम एटली भी चौंक गए.

बंटवारे के ऐलान से कश्मीर में मची उथल-पुथल

किसी ने नहीं सोचा था कि माउंटबेटेन इतनी जल्दी में होंगे. वहीं, बंटवारे के एलान से कश्मीर रियासत में उथल-पुथल मच गई. राजा हरि सिंह पर दबाव था कि वे पाकिस्तान में शामिल हो जाएं, लेकिन कश्मीर की हिंदू, सिख और बौद्ध आबादी हिन्दुस्तान का हिस्सा बने रहना चाहती थी.