75th Amrit Mahotsav: मात्र 10 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों की गोली का शिकार हुए थे ‘हुतात्मा नारायण दाभाडे’, जानिए पूरी कहानी

भारत की स्वतंत्रता के लिए लाखों क्रांतिकारियों ने अपना योगदान दिया. कुछ फांसी चढ़े, तो किसी को गोली मार दी गई या फिर ने कुछ ने देश के लिए खुद को मौत के हवाले कर दिया. आजादी के इस लड़ाई में बच्चे, बूढ़े तथा औरतों ने अपनी भूमिका निभाई थी. इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे जांबाज स्वतंत्रता सेनानी के बारे में बताने जा रहे. जिसने मात्र 10 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों की गोली खाई और शहीद हुए.

जी हां ! आज हम बात कर रहे हुतात्मा नारायण दाभाडे की. जो मात्र 10 वर्ष की उम्र में गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए और 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों की गोली से शहीद हुए.

दरअसल, 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन का नारा दिया था और पूरे देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन हुए थे। महात्मा गांधी सहित कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें विभिन्न स्थानों पर रखा गया। अगले दिन स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारतीय तिरंगा फहराने के साथ आंदोलन तेज हो गया। नारायण दाभाडे ने भी कांग्रेस भवन में झंडा फहराया लेकिन उन्हें अंग्रेजों ने गोली मार दी. जिसके बाद नारायण शहीद हो गए.

हुतात्मा नारायण दाभाडे

वैसे तो महात्मा गांधी अहिंसावादी थे. लेकिन अंग्रेजों ने उनके अनुयायियों के साथ हिंसा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.

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