यूपी विधानसभा चुनाव 2022: 2017 के चुनाव के राजनीतिक उतार-चढ़ाव पढ़िए, पूरी खबर

चुनाव आयोग ने शनिवार को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर सहित 5 राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा कर चुका है. ऐसे में उत्तर प्रदेश, 403 सीटों की सबसे बड़ी विधानसभा क्षेत्रों के साथ, राजनीतिक दलों, पर्यवेक्षकों और विश्लेषकों की नजर पर सबसे पहले है.

यूपी विधानसभा चुनावों ने हमेशा से राजनितिक दलों के निगाह पर है. क्योंकि कहा जाता है कि देश में राजनीति की शुरुआत ही यूपी-बिहार से होती है. देश के प्रथम प्रधानमंत्री से लेकर अधिकतर प्रधानमंत्री यूपी की देन हैं. ऐसे में योगी आदित्यनाथ यूपी में दूसरे कार्यकाल की तलाश में हैं, पूरी भाजपा मशीनरी मतदाताओं पर जीत हासिल करने के लिए तैयार है. हाल ही में कुछ सर्वेक्षणों ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की वापसी की भविष्यवाणी की है, लेकिन अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी भी जमीन पर गति पकड़ रही है.

प्रियंका गांधी वाड्रा इस चुनाव में सबसे बड़े राज्य में कांग्रेस का नेतृत्व कर रही हैं, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर जनता उनका स्वागत नहीं कर रही है, कम से कम अभी के लिए. मायावती यूपी चुनावों में एक शक्तिशाली ताकत रही हैं, लेकिन इस बार, वह काफी हद तक खराब स्वास्थ्य के कारण कुछ प्रेस कॉन्फ्रेंस और रैलियों तक ही सीमित हैं.

2017 में हुआ था ये हाल

2017 के चुनावों में, भाजपा ने मोदी लहर पर सवार होकर, विधानसभा चुनावों में सहज बहुमत के साथ जीत हासिल की. भगवा पार्टी ने 18 वर्षों के बाद हिंदी भाषी राज्य में वापसी की और 39.67% वोट शेयर के साथ 312 सीटें जीती थीं. पार्टी को 3.44 करोड़ से अधिक वोट मिले और उसके वोट शेयर में 24.7% की वृद्धि हुई, इस प्रकार उसे पूर्ण बहुमत मिला.

अखिलेश यादव को सत्ता से बेदखल कर दिया गया. समाजवादी पार्टी (सपा) ने सिर्फ 47 सीटें जीतीं और पिछले चुनाव की तुलना में उसके मतदान प्रतिशत में 7.7% की गिरावट देखी गई. इसे 1.89 करोड़ वोट और 21.82% वोट शेयर मिले. कुछ जानकार सपा के सत्ता में न लौटने की वजह अखिलेश का बुआ-बबुआ गठबंधन और कुछ इसे सपा-कांग्रेस गठबंधन बताते हैं.

मायावती के नेतृत्व वाली बसपा हालांकि एक उदारवादी जनादेश हासिल करने में सफल रही, लेकिन सीटों की संख्या के मामले में बुरी तरह से हार गई. 2017 के विधानसभा चुनावों में उसे 1.92 वोट मिले और 19 सीटें जीतीं.

कांग्रेस अपने पिछले प्रदर्शनों की तरह दयनीय और हाशिए पर रही. राष्ट्रीय पार्टी होने के बावजूद, इसने केवल 6.25% वोट शेयर हासिल किया, जिसमें लगभग 54 लाख वोट पुरानी पार्टी के लिए थे. पार्टी सीटों की संख्या में दहाई अंक भी नहीं छू सकी.

राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत आधार वाली पार्टी अपने वोट बैंक को बरकरार रखने में असफल रही. इसे 1.78% का वोट शेयर मिला और पार्टी को लगभग 15 लाख वोटों के साथ सिर्फ 1 सीट मिली.

जैसा कि चुनाव आयोग ने आज उत्तर प्रदेश के लिए मतदान की तारीखों की घोषणा की, चुनावी गति फिर से तेज हो जाएगी और पार्टियां कोरोना प्रकोप के बावजूद मतदाताओं को जीतने के लिए पूरी तरह से तैयार होंगी.

फिलहाल तो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में योगी आदित्यनाथ सबसे आगे हैं लेकिन लोकप्रियता के मामले में भी अखिलेश यादव तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. हाल के सर्वेक्षणों ने योगी आदित्यनाथ को सीएम पद के लिए सबसे अच्छे विकल्प के रूप में दिखाया है, लेकिन दोनों के बीच की खाई को देखना दिलचस्प होगा.

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