शशि थरूर ने भारत के नक़्शे से गायब किया J&K और लद्दाख का कुछ हिस्सा, ट्रोल होने पर ट्वीट किया डिलीट

कांग्रेस का विवादों से पुराना नाता रहा है. या यूं कहें कि इन्हें भारत के उत्तरी हिस्से से कुछ ज्यादा ही समस्याएं हैं. पहले तो इनके पूर्वजों ने भारत की अखंडता के टुकड़े किए. ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा लगाने वालों का समर्थन किया. कश्मीर में इनके शासन में क्या क्या हुआ और क्या क्या नहीं हुआ, यह पूरा देश जानता है. पिछले दो-तीन वर्षों में जिस तरह से कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को किनारे कर तिरंगा फहराया जा रहा है और धार्मिक यात्राएं निकाली जा रही है. वह इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कांग्रेस को जम्मू कश्मीर से समस्या है. खुद को कभी कट्टर हिंदू अथवा कश्मीरी पंडितों के वंशज बताने वाले राहुल गांधी कश्मीर में फिर से धारा 370 बहाल करने की मांग करने वालों का समर्थन करते हुए दिख जाते हैं.

वर्तमान की बात करें तो इस समय कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए होड़ मची हुई है. इस बार अध्यक्ष पद के लिए हलचल थोड़ी सी ज्यादा है. इसका कारण यह है कि पिछले कई वर्षों से कांग्रेस में जो अध्यक्ष पद की कहानी चल रही थी उसे जनता ने साफ नकार दिया है. कई राज्यों में विशेषकर कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला. जिससे साफ स्पष्ट हो रहा था कि कांग्रेस नेतृत्व विहीन हो चुका है. अब उसे किसी अच्छे नेतृत्वकर्ता की आवश्यकता है. शायद यह बात मां और बेटे के कानों तक पहुंच गई. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहे सांसद शशि थरूर ने अपने चुनावी घोषणापत्र से नए विवाद को जन्म दे दिया है. घोषणापत्र के पेज नंबर 2 पर छपे भारत के नक्शे से जम्मू कश्मीर और लद्दाख का कुछ हिस्सा गायब दिखा. हालांकि विवाद बढ़ने पर कांग्रेस नेता ने अपने ट्विटर अकाउंट से विवादित नक्शा वाला पोस्ट हटा दिया.

थरूर द्वारा ट्वीट किए गए नक्शे के नीचे लिखा, “संगठन विकेंद्रीकरण.” इसके नीचे लिखा था ‘हर पार्टी को सिर्फ शीर्ष पर ही नहीं, बल्कि सभी स्तर पर नेतृत्व की जरूरत होती है. राज्यों में कॉन्ग्रेस को सशक्त बनाने के लिए PCC अध्यक्षों को वास्तविक अधिकार मिलने चाहिए. इससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता सही मायने में सशक्त बनेंगे.’

इसमें आगे लिखा है, ‘हमें भाजपा के केंद्रीकरण सत्ता का एक विश्वसनीय विकल्प उपलब्ध कराना चाहिए.’ यह सब उनके घोषणा पत्र के पेज नंबर दो पर लिखा हुआ था. जब सोशल मीडिया यूजर ने इस नक्शे को देखा तो उन्हें ट्रोल करने लगे. इसके बाद थरूर ने नक्शे वाला वह पोस्ट डिलीट कर दिया.

बता दें कि आज पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन था. इस दौरान शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया. इसके साथ ही झारखंड कॉन्ग्रेस के नेता केएन त्रिपाठी ने भी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया.

त्रिपाठी और थरूर के प्रस्तावकों में गिने-चुने नेता थे. वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रस्तावकों में 30 बड़े नेताओं के नाम हैं. इनमें अध्यक्ष पद की रेस से खुद को अलग करने वाले दिग्विजय सिंह भी शामिल हैं. इसके अलावा, जी-23 के आनंद शर्मा और मनीष तिवारी भी शामिल हैं.

बता दें कि जी-23 उन नेताओं का समूह है, जो पार्टी में गाँधी परिवार से अलग पार्टी अध्यक्ष से चुनाव की माँग करता है. हालाँकि, मल्लिकार्जुन खड़गे गाँधी परिवार, खासकर सोनिया गाँधी की पसंद होने के बावजूद इन दोनों ने माहौल को भाँपते हुए उनका प्रस्तावक बनना उचित समझा. बता दें कि कॉन्ग्रेस के 9000 डेलीगेट्स पार्टी का नया अध्यक्ष चुनेंगे.

थरूर जैसे उच्च शिक्षित व्यक्ति से देश का गलत नक्शा पेश करने की उम्मीद भी नहीं की जाती, लेकिन ये पहली बार नहीं कि उन्होंने ऐसा किया. तीन साल पहले CAA कानून के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी थरूर ने अपने ट्विटर हैंडल से भारत का गलत नक्शा पोस्ट किया था. इस नक्शे में कश्मीर को भारत से अलग दिखाया गया था.

तीन साल पहले भी की थी गलती

तीन साल पहले भी थरूर की तरफ से यही गलती की गई थी. सीएए कानून के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहा था. इस दौरान थरूर ने अपने ट्विटर हैंडल पर भारत का नक्शा पोस्ट किया. इस नक्शे में थरूर ने कश्मीर को भारत से अलग क्षेत्र दिखाया. थरूर के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया. हालांकि बाद में थरूर को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने उस पोस्ट को डिलीट कर दिया लेकिन, तब तक देर हो चुकी थी और यह पोस्ट का स्क्रीन शॉट वायरल हो गया था.