नुपुर शर्मा केस में पाकिस्तान का आया बयान, भारत ने दिया मुंह तोड़ जवाब, कहा- “अपने देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर दो ध्यान”

पैगम्बर मुहम्मद पर विवादित टिप्पणी के बाद भाजपा ने अपनी प्रवक्ता नुपुर शर्मा को पार्टी से बर्खास्त कर दिया है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने अब भाजपा को ट्रोल करना शुरू कर दिया है. अब इस केस में नया मोड़ आया है. मुस्लिम देशों के लगातार आपत्ति जताने के बाद भारत ने सोमवार को इस मुद्दे पर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया. भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय पर निशाना साधते हुए कहा, “पड़ोसी मुल्क खतरनाक प्रचार करने और भारत में सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने के प्रयास के बजाय अपने देश में रह रहे अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनकी भलाई पर ध्यान दे.”

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “दुनिया पाकिस्तान द्वारा हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और अहमदियों सहित अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की गवाह रही है. भारत सरकार सभी धर्मों को सर्वोच्च सम्मान देती है. पाकिस्तान भारत से बिल्कुल अलग है, वहाँ कट्टरपंथियों की प्रशंसा की जाती है और उनके सम्मान में स्मारक बनाए जाते हैं.” भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया तब सामने आई है, जब नुपुर शर्मा बयान मामले को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास के प्रभारी डी’एफ़ेयर को तलब किया. प्रभारी से कहा गया कि पाकिस्तान विवादित बयान को बर्दाश्त नहीं करेगा. वह इसकी कड़ी निंदा करता है. इससे पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मुस्लिमों की भावना आहत हुई है. इससे पहले पाक पीएम शहबाज शरीफ ने रविवार को नुपुर शर्मा के बयान की निंदा करते हुए उसे नफरतपूर्ण बताया था.

भारत ने पाकिस्तान की टिप्पणियों के जवाब में आगे कहा, “हमने पाकिस्तान के बयानों और टिप्पणियों को नोट किया है. किसी दूसरे देश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार पर टिप्पणी करने वाला खुद अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करता आ रहा है. इसकी बातों का कोई औचित्य नहीं है.”

बता दें कि पाकिस्तान में धार्मिक आजादी का लगातार हनन हो रहा है. हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और उनकी धार्मिक आजादी के उल्लंघन को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान को उन देशों की सूची में बरकरार रखा है, जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किया जाता है. हाल ही में अमेरिका ने अपनी सालाना अंतराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट जारी की थी. इसमें पाकिस्तान को धार्मिक आजादी के हनन पर ‘कंट्री आफ पर्टिकुलर कंसर्न’ (सीपीसी) श्रेणी में रखा गया है. पाकिस्तान 2018 से इस सूची में शामिल है.