Pakistan Live: सत्ता में आते ही ‘शाहबाज’ ने ड्रैगन के आगे टेके घुटने, चीन को बताया सुख-दुख का साथी, चीन ने कहा, “मिले सुर, मेरा-तुम्हारा…”

एक लम्बे राजनैतिक उथल पुथल के बाद पाकिस्तान में इमरान खान की सत्ता बेदखल हो गई और शाहबाज नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। वहीं प्रधानमंत्री का पद पाते ही शाहबाज चीन को अपना सुख-दुख का साथी बताने लगे हैं। साथ ही यह भी कहने लगे हैं कि चीन के साथ उनकी दोस्ती कयामत तक बनी रहेगी। नए प्रधानमंत्री शहबाज सत्ता में आने से पहले ही कश्मीर का राग अलापने लगे थे।

शाहबाज शरीफ ने कहा, “चीन पाकिस्तान का एक वफादार और सुख-दुख का साथी है. चीन ने हर वक्त पाकिस्तान का साथ दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हमारा साथ दिया। चीन ने हमेशा पाकिस्तान को अपना एक हमसाया दोस्त माना। ये दोस्ती हुकूमतों की दोस्ती नहीं आवामों की दोस्ती है।’

उन्होंने कहा, कोई कुछ भी कर ले लेकिन चीन से हमारी दोस्ती छीन नहीं सकता। पिछली सरकार ने इस दोस्ती को कमजोर करने के लिए जो कुछ भी कुछ किया वह बहुत तकलीफदेह दास्तान है। पाकिस्तान और चीन की शानदार दोस्ती है और यह कयामत तक कायम रहेगी। हम CPEC पर और तेजी से काम करेंगे। हम शी जिनपिंग सरकार के शुक्रगुजार हैं।’

वहीं शाहबाज के ऐसे बयानों के बाद चीन के भी सुर बदल गए हैं। यहां हाल ‘मिले सुर, मेरा – तुम्हारा…’ वाला हो गया है। चीन के ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान में नई सरकार बनने के बाद चीन से उनके रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं। चीन की ओर से कहा गया कि शहबाज वह उसी परिवार से हैं जिसने हमेशा चीन और पाकिस्तान के मजबूत रिश्ते का समर्थन किया। अब इमरान के कार्यकाल से भी मजबूत रिश्ते हो सकते हैं।

वहीं अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिराने के बाद भी शहबाज ने भारत को लेकर बयान दिया था। कहा था, ‘हम भारत के साथ शांति चाहते हैं, लेकिन कश्मीर मुद्दे के हल के बिना ये संभव नहीं है। शहबाज ने भारत और कश्मीर को लेकर कई बार विवादित बयान दिया है। अप्रैल 2018 में जब पाकिस्तान में चुनाव चल रहे थे, तब शहबाज ने एक रैली में कहा था, ‘हमारा खून खौल रहा है। कश्मीर को हम पाकिस्तान का हिस्सा बनाकर रहेंगे।’

उसी साल सिंगापुर में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, ‘अगर अमेरिका और उत्तर कोरिया परमाणु हमले की कगार से वापस लौट सकते हैं तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत और पाकिस्तान ऐसा नहीं कर सकते।’