महाराष्ट्र सियासी हलचल: डरे नजर आए उद्धव, बाला साहब जैसा रवैया नहीं अपना पाए, सत्ता के साथ ही बिखरी पार्टी और परिवार

बीजेपी शिवसेना को बहुत कमजोर कर देगी. बाला साहब सत्ता से दूर रहकर रिमोट कंट्रोल से सत्ता को भी चलाते थे और समाज को भी. उद्धव ठाकरे ने जो स्पीच दी है, उसमें वो भी शायद बाला साहब के रोल में ही खुद को फिट करने की कोशिश में हैं.

गैर भाजपा शासित राज्य महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे इस्तीफा देने की तैयारी में हैं. सियासी हलचल के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पहली बार सामने आए. उन्होंने किसी भी तरीके से न तो हमलावर तेवर अपनाए, और न ही किसी साजिश का जिक्र किया. इतना ही नहीं उन्होंने न ही किसी पार्टी को घेरा. उध्दव ठाकरे की स्पीच सुनकर सबको बस यही लगा कि उद्धव डरे हुए हैं. जबकि शिव सैनिक का पिछला इतिहास देखें तो शिव सैनिक हमलावर होता है.

इस दौरान उद्धव को अपने गए मंत्री-विधायकों का चिठ्ठा खोलना था. उनके द्वारा किए हुए गलत कामों को सामने लाना था. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

महाराष्ट्र के सीनियर जर्नलिस्ट अनुराग चतुर्वेदी कहते हैं, बाला साहब के समय में यदि कोई पार्टी से गद्दारी करता था तो उसके खिलाफ काफी सख्त रवैया अपनाया जाता था, लेकिन उद्धव ने रूठों को मनाने की एक्सरसाइज की है.

अब बीजेपी शिवसेना को बहुत कमजोर कर देगी. बाला साहब सत्ता से दूर रहकर रिमोट कंट्रोल से सत्ता को भी चलाते थे और समाज को भी. उद्धव ठाकरे ने जो स्पीच दी है, उसमें वो भी शायद बाला साहब के रोल में ही खुद को फिट करने की कोशिश में हैं.

जैसे उन्होंने कहा, सत्ता से कोई लालच नहीं है. सत्ता छोड़ना चाहता हूं. विधायक कहेंगे तो पार्टी प्रमुख का पद भी छोड़ दूंगा. मुख्यमंत्री का पद भी छोड़ दूंगा. अब सत्ता उनके हाथ से जाने को है. तीन भाईयों में से उनका खुद का परिवार ही बिखर गया है. संपत्ति बंट चुकी है.

अब उस संपत्ति का वापिस आना लगभग नामुमकिन है. एक अहम बात ये भी है कि, एकनाथ शिंदे के साथ जो विधायक गए हैं, वो मुंबई के नहीं हैं.

अधिकतर मराठवाड़ा, उत्तर महाराष्ट्र के हैं, जहां शरद पवार का प्रभाव है. यदि मुंबई के होते तो इतनी हिम्मत नहीं कर पाते.

इमोशनल कार्ड

सीनियर जर्नलिस्ट केतन जोशी कहते हैं कि, उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों और जनता के सामने एक इमोशनल कार्ड खेला है. इससे अभी का संकट तो नहीं टलेगा लेकिन शिवसेना के वोट जरूर बचे रह सकते हैं. उन्होंने ये कहा कि, मुझे सत्ता का लालच नहीं. उस समय के हालात के चलते सीएम बनना पड़ा.

वहीं एकनाथ शिंदे के साथ जो 40 से ज्यादा विधायक हैं, उनमें कई पर ईडी की जांच का साया है. उद्धव ये जानते हैं कि, यह फूट शिवसेना में नहीं हुई है, बल्कि यह विधायकों की फूट है. संगठन तो बरकरार है. इसलिए इमोशनल कार्ड खेलकर वो खुद को पाकसाफ दिखाने की कोशिश में हैं.

शिवसेना के कैडर का सामना करना मुश्किल

सीनियर जर्नलिस्ट समर खड़स कहते हैं, उद्धव ने सीधेतौर पर बागी विधायकों को महाराष्ट्र आने का आव्हान किया है. लेकिन यहां उन्हें शिवसेना के कैडर का सामना करना बहुत मुश्किल होगा. वे ये चाहते हैं कि जो भी बात हो वो आमने-सामने फ्लोर पर हो. 15 से 20 विधायक तो उद्धव के भी संपर्क में हैं ही. सरकार बन रही है या जा रही है, अभी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता.