AIMIM के विधायकों ने ‘वंदे मातरम्’ गाने से इंकार, भाजपा ने कहा- ‘जिहादी और सांप्रदायिक सोच वाले व्यक्ति से ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती’

हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी के पार्टी आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के विधायक ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. हुआ कुछ यूं कि बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का समापन वंदे मातरम् के साथ किया जा रहा था. ऐसे में ओवैसी के पार्टी के पांचों विधायकों ने वंदे मातरम् गाने से मना कर दिया. और तो और उन्होंने यहां तक कह डाला कि स्पीकर जबरन राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाने की परम्परा थोप रहे हैं.

एआईएमआईएम विधायक दल के नेता अख्तरूल इमान ने विधानसभा में राष्ट्रगीत गाए जाने पर विरोध जताया और कहा कि ये सभी पर जबरन थोपा जा रहा है. आगे नेता इमान ने कहा कि हमारे संविधान में ऐसा कहीं भी लिखा नहीं गया है. ये हमारी परम्पराओं के विरुद्ध है. जिसके बाद भाजपा का पलटवार शुरू हो गया. भाजपा विधायकों ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि जिहादी और सांप्रदायिक सोच वाले व्यक्ति से इससे ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती.

दरअसल, इन्हें संसद नहीं किसी तालिबानी संस्था का सदस्य होना चाहिए था. इनके लिए वंदे मातरम् एक गीत से बढकर कुछ भी नहीं. दरअसल, ये लोग बड़े ही विजनरी हैं, अर्थात् दूरदर्शी हैं. इनके लिए विधानसभा में वंदे मातरम् गाना एक परम्परा जबरदस्ती थोपना है. लेकिन वहीँ देश विरोधी नारे लगाना देशभक्ति है. इनकी ही रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं. लेकिन इनके मुंह में उस समय दही जम जाती है. उस घटना को लेकर कुछ भी ट्वीट करते समय इनकी उंगलियाँ सूज जाती हैं, हथेली कांपने लगती है. दरअसल, 21 फरवरी 2020 को बेंगलुरु के रैली में ओवैसी के मंच से एक लड़की ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे. उस समय ओवैसी को मंच से अपनी सफाई देनी पड़ी थी.

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CAA विरोधी रैली में महाराष्ट्र से ओवैसी के पार्टी के नेता वारिस पठान ने रैली को सम्बोधित करते हुए कहा था,

“इकठ्ठा होके चलना पड़ेगा. आजादी लेनी पड़ेगी और जो चीज़ मांगने से नहीं मिलती, उसे छीन के लेना पड़ेगा ये भी याद रखना.  हमको बोला मां और बहनों को आगे भेज दिया… अभी तो सिर्फ शेरनियां निकली हैं और तुम्हारे पसीने छूट गए. समझ लो अगर हमलोग साथ में आ गए तो क्या होगा. 15 करोड़ हैं लेकिन 100 के ऊपर भारी हैं. याद रख लेना ये बात…”

अब इससे यह क्लियर नहीं हो पा रहा है कि ओवैसी की पार्टी को वंदे मातरम् से एलर्जी तो है ही, लेकिन ये कौन सी आजादी की मांग कर रहे हैं ? जब पूरी दुनिया जानती है कि हमारा देश 1947 में ही आजाद हो गया. तो अब ये कौन सी आजादी मांग रहे हैं?

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