जब कभी यदि गजवा-ए-हिन्द बन जाए, तो अमित शाह को मत कोसिए: आईटी सेल (बीजेपी, संघ और डोभाल कथा स्पेशलिस्ट)

पहले आतंकी बाहर से आते थे. अब मोदी जी ने विश्वास जीतने के लिए इतनी मुफ्त की योजना चलायी है.  एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ मे कंप्युटर देकर इतना शिक्षित कर दिए हैं. इन सब से मुस्लिम इतना आत्म निर्भर हो गए है कि अब यही के मुस्लिम आतंकियों के काम करने लगे हैं.

अमित शाह को मत कोसिए लाठी लेकर निकल पड़िए. हिन्दू 80% घर में बैठता है सोचता है अमित शाह लडेंगे. यह कहना है बीजेपी, संघ और डोभाल कथा लेखक आईटी सेल का…

तो ऐसा है संघ के लाठीभाजक ही क्यों नहीं निकल ले रहे हैं? वे लाठी काहें को भांजते हैं जब हिन्दू हित के मौके पर निकल ही नहीं सकते हैं. क्या लाठियाँ केवल मन बदलकर राम को इमाम बनाने के लिए हैं..?

और मान लीजिए हिन्दू निकल पड़ा. तो उस पर आपकी पुलिस, दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है, लाठी नहीं बरसाएगी..?

पुलिस आज भी किस बस्ती में कांपती है पता कर लीजिएगा. हिन्दू के पास तो कोर्ट में जाने भर का कोई नेटवर्क भी नहीं है. तो घर बेचकर हिन्दू बनें? अखिला अशोकन को हादिया बनाने में जिहाद जान लगा देता है. आप क्या कर पाते हैं..?

गुजरात दंगों में अशोक भाई परमार की फोटो आज भी हिन्दूत्व की पोस्टर मानी जाती है. जबकि आज भी साबरमती एक्सप्रेस कहीं गिनती में नहीं आ पाया है. इतना लुटा-पिटा तो नैरेटिव है आपका…

ऐसे ही एक उपाध्याय जी हैं, वकील हैं, खूब हिन्दूयापा छांटते हैं. इनकी ही रैली में केवल नारे लगाने वाले लड़के आज भी केस झेल रहे हैं. और महंगी वकालत करने वाले उपाध्याय जी उन लड़को को यूज्ड मानकर फेंक चुके हैं…

इस्लाम के पक्ष में आने के लिए किसी भी कांग्रेसी, अहीर जाति की पार्टी सपा, राजेडी, अब शिवसेना या किसी को भी कोई देर नहीं लगती है. आपको ही इतनी शर्म काहें आती है..?

अमित शाह से ना पूछिए, जब दिल्ली में जातिय दंगा हो. अमित शाह से ना पूछिए, जब दिल्ली में इस्लामिक गजवा हो. तो भैय्या जब पूछना ही नहीं है और खुद ही लड़ना है तो फिर आपकी जरूरत ही क्या है..?

यह इस्लामिक नेटवर्क क्या बिना सरकारों के तैयार हुआ है? आपकी ही सरकारें आठ सालों से हैं. तब भी नाक के नीचे से औवेसी बरी हो जाते हैं. कैसे हुआ? बस इनसे ना पूछिए…

वैसे नए हिन्दू पोस्टर बॉय नरोत्तम मिश्रा के राज में नियाज खान आईएएस थे, उनका क्या हुआ. निलंबित तो हुए ही होंगे? फर्जी कहानी ही छाप दीजिएगा…

वोट का तमाशा बनाकर रख दिया है. सत्ता चलाएंगे लेकिन सत्ता की हनक के लिए इनसे ना कहिए. यह गप्प गढ़ेंगे. बंगाल में जाने की हिम्मत नहीं, लेकिन बस जनता खराब है…

दिल्ली की जनता ने केजरीवाल को वोट दिया है. इसीलिए अमित शाह कुछ नहीं करेंगे. तो भिय्या दिल्ली की ही जनता ने सांसद भी तो चुने हैं. उनके ही प्रति ही मानवता दिखा लेते…

बस अब जल्द ही अखंड भारत का झुनझुना पकड़ा दिए हैं. जितने जिहादी देश में हैं उनको तो संभाल नहीं पा रहे हैं. नैरेटिव थाम नहीं पा रहे हैं. चले हैं जमात उ दावा को देश में शामिल करने…

इनसे ना पूछिए बस मर जाइए. यह बस बताते रहें कि पीएफआई यह कर रही है. और मुख्तार भाई बताएँ कि हमने सरकार में इतने प्रतिशत लाभ दिया. बस वोट में गिनती गिनेंगे…

मन बदलते, बदलते यह देश बदल देंगे. क्या पता गजवा-ए-हिंद का अनुवाद अखंड भारत कर दें..!!

(डी के गुप्ता के वाल से कॉपी की गई पोस्ट)

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