जब कुर्बानी देने की बारी आए,तो सिपाही की दी जाती है, राजा और राजकुमार जिंदा रहते हैं

भाजपा वालों ने नुपुर शर्मा को सस्पैंड कर दिया है। इन पार्टी वालों से तो अच्छे वो बच्चे हैं जिन्होंने दंगाइयों की भीड़ को रोके रखा, पुलिस कार्रवाई की चिंता नहीं की। नुपुर ने गलत बोला था तो उनको उसी दिन सस्पैंड करना था भाजपा को।

आज सस्पैंड करना बताता है कि इनकी कल भी फटती थी, आज भी फटती है और बीच में जो भी होता है, वह बस हो जाता है, इनका कोई हाथ नहीं होता। ऐसी निकम्मी पार्टी बहुत कम है जो किसी दंगाई भीड़ के दबाव में अपने मुखर प्रवक्ता को निलंबित करती है।

भाजपा को अपने कार्यकर्ताओं के लिए खड़ा होना आता ही नहीं है। इनको वामपंथियों और कट्टरपंथियों से स्वीकार्यता चाहिए उसके लिए ये किसी की भी बलि दे सकते हैं।

  • अजीत भारती

अरब के देशों की ताकत से चलता है वामपंथ आज उसी का नतीजा है कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी देश मे सबसे ज्यादा राज्यों पर सरकार चलाने वाली पार्टी और देश पर पूर्ण बहुमत से सरकार चलाने वाली पार्टी कमजोर होकर अपनी ही नारी शक्ति को पार्टी से निलंबित कर दी। इसके पीछे धन की ताकत सबसे बड़ी है और जो अपनी आवाज को मजबूत करना नही जानते वो हमेशा ऐसे ही कमजोर होंगे। इसलिए जो लोग भी आपकी सनातन संस्कृति की आवाज हैं उन्हें सदैव प्राथमिकता दें। सशक्त और समृद्ध रखें। अभी आपको न्यायिक आवाज के लिए बहुत कुछ करना शेष है।

आपके देवताओं का अपमान मुगलकाल से अनवरत जारी है। लेकिन उन्होंने कभी ऐसी अपमानित मार नही सही। इसलिए धार्मिक ताकत के साथ आर्थिक ताकत आज के युग मे महत्वपूर्ण है।

नुपुर शर्मा के साथ जन आवाज होगी लेकिन अरब कंट्री का कंट्रोल आज सबको समझ आना चाहिए , इसी कंट्रोल से वामपंथ भारत को अनकंट्रोल करता रहा है। यही वजह है कि वे बहुत लिखते हैं और बहुत बोलते हैं आप सिर्फ आत्मरक्षार्थ कुछ करते हैं।

  • सौरभ द्विवेदी

नूपुरशर्मा ने इतना भी बड़ा अपराध नही कर दिया था कि उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया जाएं। फिर कौन कार्यकर्ता खड़ा होगा आने वाले समय मे यह भी देखना है।

एक कौम 350 साल से हिन्दू आराध्य भगवान शिव के ऊपर वज़ू करता रहा उनके खिलाफ कार्यवाही तो छोड़िए खुलकर खड़े होने से भी डर रहे है और एक महिला ने सीना ठोककर सच क्या बोल दिया आप उसे पार्टी से निलंबित कर रहे है। यह आपके भी सेक्युलरिज्म की और लगाने वाली घंटी न बन जाए ध्यान दीजिए।

– डॉ० रविन्द्र प्रताप सिंह

कश्मीर में लक्षित हत्याएं जिसका कारण “इस्लामिक जिहाद” है।
भारत राष्ट्र को सीधी चुनौती है,पर भारत का हिन्दू, भारत के सेक्युलर नेता जातिवार गणना के लिए पूरा जोर लगाये हुए है।

चुनी हुई मजबूत सरकार गाँधीयन वैल्यू के अनुसार अपनी नीति बना रही है।

उनकी घोषणाएं एकदम साफ है,उन्हें काफिरों को ख़त्म करना है,उन्हें ये ज़मीन चाहिए,भय,हिंसा और हत्या से इसे वो हासिल कर सकते है इसका उन्हें यकीन है।

केंद्र सरकार कश्मीर को शीघ्र ही राज्य का दर्जा देने का वादा कर चुकी है,महबूबा मुफ्ती,फारुख अब्दुल्ला,आज़ाद है, उन्हें आज़ादी देना हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती है,संसद में सभी सेक्युलर दल इन नेताओं के नजरबंदी को तानाशाही बता चुके है,वही सेक्युलर दल और नेता लक्षित हत्याओं पर मौन है।

गाँधीयन डेमोक्रेसी की ब्यूटी फिर से कश्मीर में दिख रही और हमारी चुनी हुई मजबूत सरकार उसे खूबसूरती के उच्चतम बिंदु तक ले जाने को कटिबद्ध है।
गोली नही गले लगा के इसका हल निकलेगी हमारी सरकार।
शेष भारत के सेक्युलर हिन्दू तो इसे खुद सरकार की साजिश बता देंगे उन बेचारों को उनकी जाति की स्थानीय सरकार चाहिए,इन्हें बेरोजगरी ,महंगाई आदि को हल करना है।

90की स्थितियां और कहानी फिर से दोहराई जा रही और पूरा तंत्र घुटने के बल बैठ के अपनी बेबसी की गवाही दे रहा।
इस्लामिक जिहाद का हल गांधीवाद, विकास, और सेक्युलर अप्रोच से निकाला जायेगा।

  • सत्य प्रकाश सिंह

कश्मीर मे मुस्लिमों ने नरसंहार किए, वर्तमान मे भी हिन्दुओ को चुन चुन कर मुस्लिम मार रहे है,
मुस्लिम आतंकी के जनाजे मे मुस्लिम हज़ारों की संख्या मे इकट्ठे होते हैं।

हमारे देवी देवता को तोड़ दिया जाता है। खुले आम कहा जाता है कि अगर हमे पता होता कि वो शिवलिंग है तो हम उसे कब का तोड़ देते। शिवलिंग पर मज़ाक कार्टून, मीम बनाए जाते हैं। अपशब्द कहा जाता है। तब कोई मुस्लिम देश ठेकेदार नहीं बनता। और आप हम सरकार भी अच्छे से जानती है कि आतंकियों को फण्ड इसी मुस्लिम देशों से मिलती है। लेकिन तब कोई कारवाई ना होती है, किसी को शर्म महसूस नहीं होती है। लेकिन एक ने बयान क्या दे दिया, मुस्लिम देश ठेकेदार बन गए, और आपने भी तुरंत कारवाई कर दिया, और उन्हें बता रहे है कि उनपर कारवाई कर दी गई है।

जैसे हमारे देश के प्रोडक्ट अगर उनके यहां ना बीके तो भारत भूख मरी हो जाएगी, कंगाल हो जाएगा,
छोटे से एक टुच्चा सा देश हमारे देश के अंदरुनी मामले मे दखल देता है, और हम उसकी बात का विरोध करने की जगह उसपर कारवाई करते है। ये है आपकी तगड़ी विदेश नीति?

जो देश कुछ इस्लामिक कानून से चलता है, वो एक धर्मनिरपेक्ष देश को शिक्षा दे रहा है। और हम उसे मान भी रहे है। कल को ये इस्लामिक देश इस तरह की और भी मांग करेंगे तब आप क्या करेंगे !

  • डी. के. गुप्ता

ईशनिंदा क़ानून पर एक बहस अब होनी चाहिए। सबके लिए समान क़ानून हो। कोई शिवलिंग का मजाक न उड़ा पाए। कोई मकबूल फिदा हुसैन हिन्दू देवी देवताओं के गलत पेंटिंग न बना पाए। कोई सिनेमा वाला हिंदुओं की भावनाओं को आहत न कर पाए। किसी रतनलाल की नौकरी महादेव पर ओछी टिप्पणी के बाद न बची रहे।

  • दीपक पाण्डेय