नेहरु-गांधी परिवार से विदेशी महिलाओं की करीबी, ‘निजी’ या फिर देश पर पड़ी थी भारी

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) नेपाल के नाईटक्लब में पार्टी कर रहे हैं. नेपाल के जाने माने अख़बार द काठमांडू पोस्ट (The Kathmandu Post) के अनुसार, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस समय काठमांडू में हैं. वे अपनी एक दोस्त सुमनिमा उदास (Sumnima Udas) की शादी में शामिल होने आए हैं. ये वही सुमनिमा दास हैं, जिनके पिता म्यामांर में नेपाल के राजदूत रहे हैं. ये खुद लम्बे समय तक CNN में कार्यरत थीं. साथ ही इन्होने भारत विरोधी बयान देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी. भारत विरोधी एजेंडे के कारन ये अक्सर सुर्ख़ियों में बनी रहती थीं. नेपाल और भारत के तनाव के दौरान भो इन्होने भड़काऊ बातें कहीं थी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘खतरनाक’

सुमनिमा उदास ने कोरोना महामारी के दौरान भी वैक्सीन को लेकर भारत सरकार के खिलाफ अफवाह फैलाया था. सुमनिमा ने कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश के ट्वीट को रीट्वीट किया था. उन्होंने ‘द वायर’ के उस आर्टिकल को शेयर किया था, जिसमें लिखा था कि पीएम मोदी वास्तविकता से दूर हैं और उन्होंने सभी संस्थाओं को ख़त्म कर दिया है. उन्होंने भारत विरोधी वामपंथन अरुंधति रॉय के उस आर्टिकल को भी शेयर किया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘खतरनाक’ बताते हुए कहा गया था कि भारत सरकार लोगों को महामारी से बाहर निकालने में असफल रही है.

गौतम बुद्ध पर जताई थी आपत्ति

जब केंद्रीय विदेशी मंत्री एस जयशंकर ने गौतम बुद्ध को भारत के महान व्यक्तित्वों में गिना था, तब सुमनिमा उदास ने इस पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने जामिया के उपद्रवियों का भी समर्थन किया था. साथ ही वो भारत में महिलाओं के साथ भेदभाव का दावा करने वाले आर्टिकल को भी आगे बढ़ा चुकी हैं. इसी तरह इस शादी कार्यक्रम में चीन की जिस राजदूत के साथ राहुल गांधी को देखा गया, उस होउ यांकी पर हनीट्रैप के माध्यम से अपने देश का काम निकलवाने के आरोप लगते रहे हैं.

जब नेपाल के कुछ हिस्सों पर चीन ने कर लिया था कब्ज़ा

होऊ यांकी 2018 से नेपाल में चीन की राजदूत हैं. उनके लिए दावा किया जाता है कि नेपाल की सत्ता के गलियारों से लेकर सेना के मुख्यालय तक उनकी घुसपैठ है. जुलाई 2020 में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हनी ट्रैप में फँसाने की खबरें सामने आई थी. कहा गया था कि यांकी के कहने पर ही ओली ने एक नक्शा पास करवाया था, जिसमें उत्तराखंड के तीन जगह कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया था. इसके अलावा नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन द्वारा अतिक्रमण करने की भी खबरें आई थी.

ऐसे में भला क्यों राहुल गांधी के इस दौरे को निजी माना जाए, जहाँ उनके इर्दगिर्द भारत के विरोधियों का जमावड़ा हो? क्या अगर भारत के किसी अधिकारी को विदेश में देश विरोधी महिलाओं के साथ देखा जाता, तो उस पर कार्रवाई नहीं होती? फिर नेताओं पर क्यों नहीं? राहुल गांधी भले विपक्ष में हैं, लेकिन 2004-14 तक पूरे देश में उनके परिवार का राज था और वो खुद भी सक्रिय थे. देश के 5 राज्यों में कॉन्ग्रेस सत्ता में है या सत्ताधारी गठबंधन में है. ऐसे में ये दलील नहीं चल सकती कि राहुल गांधी विपक्ष में हैं, इसीलिए उनकी कोई जवाबदेही नहीं बनती.

नेहरु और एडविना के रिश्ते

स्वघोषित भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु एवं एडविना पर. यूं तो एडविना और नेहरु के अगाढ़ प्रेम के पिछत्तीस किस्से आपने जरूर सुने होंगे. चाहे एडविना के क़दमों में बैठना हो, उनके होठों में दबाया हुआ सिगरेट सुलगना हो या फिर किसी चुटकुले पर उनके आगे मुँह कर के हँसना हो – इससे जुड़ी तस्वीरें और कहानियाँ अक्सर लोगों के सामने आती रहती हैं. लुइस माउंटबेटन भारत के अंतिम ब्रिटिश वायसराय थे और एडविना उनकी पत्नी. भारत-पाकिस्तान विभाजन उनके ही कार्यकाल में हुआ.

जवाहरलाल नेहरू और एडविना माउंटबेटन के रिश्ते के कई पहलू आज भी राज ही हैं. UK की एक संस्था ने दोनों के बीच हुए पत्राचार और एडविना की पर्सनल डायरी के कंटेंट्स को रिलीज करने की माँग हाल ही में ठुकरा दिया. इसमें आखिर ऐसा क्या है, जिसे छिपाया जा रहा है? कई रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि भारत की आज़ादी के बाद भी दोनों के रिश्ते चलते रहे. एडविना ज्यादा किसी से बात नहीं करती थीं, लेकिन नेहरू से उनके करीबी रिश्ते थे.

एडविना की बेटी पामेला हिक्स नी माउंटबेटन जिनका नाम सुनते ही जीभ पर कड़वाहट आ जाती है. उन्होंने अपनी एक किताब जो कि 2012 में पब्लिश हुई थी, लिखा है, “ नेहरू और  माँ एक दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन उनके बीच किसी तरह का शारीरिक सम्बन्ध नहीं बना. क्योंकि उन्हें प्राइवेसी नहीं मिली.”  

यहाँ फिर निजी ज़िन्दगी से अलग हट कर सवाल उठता है कि जिस तरह सार्वजनिक जगहों पर भी नेहरू एडविना के सामने नतमस्तक रहते थे, ऐसे में भारत जैसे गौरवशाली देश के प्रधानमंत्री होने के कारण क्या उन्हें इन चीजों का ध्यान नहीं रखना चाहिए था? शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने अप्रैल 2009 में दावा  किया था कि  नेहरू-एडविना के रिश्ते के कारण देश का विभाजन हुआ. उनका मानना था कि लुइस माउंटबेटन ने अपनी बीवी के साथ नेहरू के रिश्ते का फायदा उठाया और देश को धोखा मिला.

राजीव और सोनिया के रिश्ते

राहुल गांधी की माँ सोनिया गांधी भी मूल रूप से इटली की हैं. 1956 में अपने दोस्तों के साथ लंदन के वर्सिटी रेस्टॉरेंट में पार्टी करते हुए राजीव गांधी की नजर सोनिया पर पड़ी, जिनका नाम तब एंटोनियो माइनो हुआ करता था. तब कैम्ब्रिज में पढ़ रहीं सोनिया गांधी उस होटल में पार्ट टाइम वेट्रेस का काम करती थीं. रेस्टॉरेंट का मालिक राजीव का दोस्त था, जिसे पैसे देकर उन्होंने सोनिया के करीब आने की व्यवस्था कराई और राजीव गांधी द्वारा सूचित किए जाने के बाद उनकी माँ इंदिरा गांधी भी अपने होने वाले बहू से मिलने लंदन पहुँचीं.

ऑप इंडिया की खबर के अनुसार, 1967 में राजीव गांधी भारत लौटे और अगले साल सोनिया गांधी, जिनके रहने की व्यवस्था अमिताभ बच्चन के घर में की गई थी. कहा जाता है कि राजीव गांधी राजनीति में नहीं आना चाहते थे, लेकिन संजय गांधी की प्लेन क्रैश में मौत और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्हें भारत का प्रधानमंत्री बनना पड़ा. सोनिया गांधी के कॉन्ग्रेस नेतृत्व संभालने के बाद कई नेताओं ने पार्टी तोड़ दी. 2004 में उन्हें प्रधानमंत्री न बनने देने के लिए कई नेताओं ने विरोध जताया था.

सोशल मीडिया में लोग अक्सर ये बातें करते रहते हैं कि क्या सोनिया गांधी विदेशी एजेंट हैं? इन बातों की भले ही कहीं कोई पुष्टि नहीं हुई हो, लेकिन जब बात उठती है तो पीछे कोई न कोई कारण होता ही है. इन चर्चाओं में कभी रूसी एजेंड़ी KGB के साथ सोनिया गांधी का नाम जोड़ा जाता है तो कभी अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA के साथ. गांधी परिवार के करीबी और UPA काल में विदेश मंत्री रहे नटवर सिंह ने ही कहा था कि CIA ने यूपीए शासनकाल में अच्छा दबदबा बना कर रखा हुआ था.

राहुल गांधी को भी अपना निजी जीवन जीने का पूरा अधिकार है देश के बाकी नागरिकों की तरह, लेकिन जहाँ सवाल उठते हैं वहाँ जवाब भी दिया जाना चाहिए. जवाब सुमनिमा उदास के भारत विरोधी रवैयों को लेकर दिया जाना चाहिए. भारत विरोधी चीनी राजदूत के साथ उनकी नजदीकी पर दिया जाना चाहिए. खासकर तब, जब उनके विदेश दौरे अक्सर गुप्त रहते हैं और कोई भी बात खुलने पर कॉन्ग्रेस के प्रवक्तागण उनका बचाव करने के लिए मीडिया में बैठे रहते हैं.