धर्म संसद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड और हिमाचल सरकार से कहा- ‘हेट स्पीच पर रोक लगाएं

नई दिल्ली. देश के सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड के रुड़की में होने जा रही धर्म संसद के मद्देनज़र कहा है कि राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी समुदाय विशेष के खिलाफ हेट स्पीच न हो. बुधवार 27 अप्रैल को रुड़की में प्रस्तावित धर्म संसद के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जजों ने स्पष्ट कहा कि अगर हेट स्पीच पर लगाम नहीं लगी, तो इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव को ज़िम्मेदार माना जाएगा. इसी महीने के शुरू में शिमला में हुई एक धर्म संसद के मामले में भी अदालत ने हिमाचल से सवाल भी पूछे.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने खबर दी कि जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने हेट स्पीच मामले में सुनवाई की. उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि किसी तरह की हेट स्पीच कार्यक्रम में नहीं दी जाएगी. राज्य की इस बात का संज्ञान बेंच ने लिया. जस्टिस अभय एस ओका और सीटी रविकुमार वाली इस बेंच ने यह भी कहा, ‘हमने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को इस बारे में उठाए जा रहे कदमों का रिकॉर्ड मांगा है.’

इससे पहले उत्तराखंड ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि इससे पहले जब हेट स्पीच का मामला सामने आया था, तो राज्य ने जांच की थी. इस पर जस्टिस खानविलकर ने कहा, ‘नहीं, सिर्फ जांच नहीं बल्कि आपको इस तरह की गतिविधियां रोकनी होंगी.’ गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में हरिद्वार में हुई तीन दिवसीय धर्म संसद के दौरान हेट स्पीच का मामला सामने आया था, जिसे लेकर एफआईआर दर्ज हुई थी.

हिमाचल से भी कोर्ट ने मांगे जवाब

एक और याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में हुई धर्म संसद को लेकर हलफ़नामा दाखिल करने को कहा था और पूछा था कि हेट स्पीच रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे. हिमाचल ने कोर्ट को बताया कि पुलिस एक्ट के तहत आयोजकों को नोटिस जारी किए गए थे. इस पर जस्टिस खानविलकर ने कहा, ‘ऐसे कार्यक्रम अचानक नहीं होते… पहले से सूचना होती है. स्थानीय पुलिस को तत्काल कदम उठाते हुए देखना चाहिए कि कुछ अप्रिय न हो. ऐसे कदम उठाए गए हों, तो वो बताएं.’