सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी में प्रमोशन में आरक्षण की शर्तों में किया बदलाव

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) को सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण की शर्तों में बदलाव से इनकार कर दिया है. जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में शुक्रवार को कहा कि अदालत अब इसको लेकर कोई नया पैमाना नहीं बना सकती है. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2021 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण की शर्तों को कम करने से इनकार करते हुए कहा कि बिना आंकड़े के प्रमोशन में रिजर्वेशन नहीं दिया जा सकता है. सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में रिजर्वेशन के लिए राज्य सरकारों को आंकड़ों के जरिए ये बताना होगा कि एससी एसटी का प्रतिनिधित्व कम है. राज्यों को आरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से समीक्षा करनी चाहिए और ये समीक्षा अवधि केंद्र सरका निर्धारित करे. इस मामले में अगली सुनवाई अगले महीने, 24 फरवरी को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पदों में आरक्षण के लिए मात्रात्मक आंकड़ों के संग्रह के लिए कैडर आधार होना चाहिए. हमने अनुसूचित जाति और जनजाति के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता का निर्धारण करने के लिए मानदंड का आकलन करने के लिए इसे राज्य पर छोड़ दिया है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दायर 100 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.