दाराशिकोह पर मेहरबान आरएसएस (RSS) ? आखिर क्यों, दाराशिकोह के कब्र की तलाश में जुटी मोदी सरकार ?

मुग़ल आक्रांता औरंगजेब द्वारा फैलाया गया इस्लामी आतंक किसी से छुपा नहीं है. औरंगजेब ने सत्ता के चाह में अपने भाई दाराशिकोह की हत्या करा दी थी. कुछ वर्षों पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा था, “दारा शिकोह सच्चे हिंदूस्तानी और भारतीयता के प्रतीक थे”.

संघ पिछले कई वर्षों से दाराशिकोह को ‘सच्चा मुसलमान’ साबित करने में लगा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संघ ने दारा पर रिसर्च भी शुरू किया है. साथ ही संघ दारा की शिक्षाओं पर और काम करेगा.

इसके अलावा कुछ युनिवर्सिटियां दारा शिकोह के काम पर भी शोध करेंगी. दारा शिकोह की किताबों को अलग-अलग भाषाओं में ट्रांस्लेट किया जाएगा. हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी ने एक पैनल बनाने का ऐलान किया है. इसमें हिंदू, मुस्लिम और ईसाई विद्वानों को शामिल किया जाएगा. जो दारा के बारे में रिसर्च करेंगे. जामिया मिल्लिया इस्लामिया, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू युनिवर्सिटी, दिल्ली युनिवर्सिटी, जवाहर लाल युनिवर्सिटी भी इसी तरह के पैनल बनाएंगी.

कब्र की तलाश के लिए सरकार ने बनाई कमेटी

2020 में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने दारा शिकोह की कब्र की तलाश के लिए पुरात्तविदों की एक 7 सदस्यीय कमेटी बनाई थी. माना जाता है कि 1659 में दारा शिकोह की हत्या के बाद उसे औरंगजेब ने दिल्ली स्थित हुमायूं के मकबरे में दफन करवाया था. हुमायूं के विशाल मकबरे में 140 कब्रें हैं और वहां मकबरे के बीच में स्थित हुमायूं की कब्र को छोड़कर किसी और कब्र की पहचान मुश्किल है.

दिल्ली स्थित हुमायूं का मकबरा, जहां एक अज्ञात कब्र में दारा शिकोह को दफनाया गया था. केंद्र सरकार अब उसी कब्र की पहचान का जिम्मा पुरात्तव विभाग को सौंपा है. 

इस वजह से दाराशिकोह पर मेहरबान RSS

पिछले कुछ सालों के दौरान सरकार ने दारा शिकोह के प्रचार में तेजी दिखाई है. 2016 में दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड कर दिया गया था. 2017 में राष्ट्रपति भवन के पास के डलहौजी रोड का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड कर दिया गया था.

  • दारा शिकोह के प्रचार की वजह क्या है? दरअसल, कई इतिहासकार औरंगजेब को कट्टरपंथी और दूसरे धर्मों से भेदभाव करने वाले मुसलमान के तौर पर देखते हैं. माना जाता है कि काशी, मथुरा समेत कई शहरों के चर्चित हिंदू मंदिरों को औरंगजेब ने ही तोड़वाया था.
  • 2019 में संघ के सीनियर लीडर कृष्ण गोपाल ने कहा था कि अगर औरंगजेब की जगह दारा शिकोह मुगल सम्राट बनते तो इस्लाम भारत में और फलता-फूलता और हिंदू और मुस्लिम एक-दूसरे को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ पाते. इस एक बयान से संघ के दारा शिकोह के जीवन और कामों को प्रमोट करने की वजह पता चलती है.
  • जानकारों का मानना है कि, औरंगजेब की छवि हिंदू विरोधी है जबकि दारा शिकोह हिंदुओं के प्रति उदार थे और उन्होंने हिंदू उपनिषदों का अनुवाद कराकर हिंदू धर्म के प्रचार का काम किया था. इसी वजह से संघ दारा को प्रमोट करने में लगा है.
  • संघ दारा को उदार मुस्लिम चेहरा मानता है, इसलिए उन्हें मुस्लिमों के लिए एक आदर्श के तौर पर प्रमोट करना चाहता है.
  • एक्सपर्ट्स का मानना है, संघ दारा शिकोह को प्रमोट करके हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश भी देना चाहता है. संघ पिछले कई वर्षों से मुस्लिम समुदाय से जुड़ने के लिए उन तक अपनी पहुंच बढ़ाने में लगा है. दारा शिकोह का प्रमोशन उसी योजना का हिस्सा है.
  • जानकारों का कहना है कि संघ आज के समय में दोनों धर्मों के बीच समन्वय के धागे तलाश रहा है. इसकी बानगी संघ प्रमुख मोहन भागवत के हाल के एक बयान से भी मिलती है. काशी विश्वानाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद के विवाद पर मोहन भागवत ने हिंदुओं से हर मस्जिद में शिवलिंग की तलाश न करने की अपील की थी.