59 हिन्दुओं को जिंदा जलाने के मुख्य आरोपी रफ़ीक हुसैन को उम्रकैद, गोधरा कांड के बाद 19 साल से चल रहा था फरार

आजादी के बाद से ही देश में हर वक्त गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल दी जाती है. हर वक्त गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखने की कोशिश की जाती है. लेकिन यह हमेशा ही फेल होता है पिछले कुछ वर्षों में पूरे देश ने देखा कि किस तरह से पालघर के साधु या फिर कोई कन्हैया लाल दर्जी इस्लामी कट्टरपंथियों के विचारधाराओं का शिकार होते हैं. आज हम बात करने वाले हैं 19 साल पहले की एक घटना की. जिसमें एक मुस्लिम कट्टरपंथी ने 59 लोगों को ट्रेन की बोगी में जिंदा जलाकर मार दिया. जी हां, हम बात कर रहे हैं 2002 के गोधरा कांड की.
गुजरात (Gujrat) के गोधरा (Godhara) में अयोध्या (Ayodhya) से लौट रहे कारसेवकों से भरी साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगाकर 59 लोगों को जिंदा जला कर मारने के आरोपी रफीक हुसैन को उम्र कैद की सजा मिली है. पिछले साल गुजरात पुलिस ने घटना के 19 साल बाद उसे गिरफ्तार किया था. बता दें कि मोहम्मद रफीक 2002 में घटना को अंजाम देने के बाद तब से फरार चल रहा था. गोधरा के सत्र न्यायालय ने रफीक हुसैन को हत्या की साजिश रचने, हत्या करने और दंगा भड़काने के आरोप में उम्र कैद की सजा सुनाई है. इस मामले में विशेष लोक अभियोजक आरसी कोड़ेकर ने न्यायालय के फैसले की पुष्टि की है.

51 साल का रफीक हुसैन भटुक 2002 में घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था. और उसे गुजरात पुलिस ने फरवरी 2021 में गोधरा शहर से गिरफ्तार किया था. गुप्त सूचना के आधार पर गोधरा पुलिस ने 14 फरवरी 2021 रात को रेलवे स्टेशन के समीप स्थित सिग्नल फलिया के एक घर में छापेमारी की और भटुक को वहाँ से गिरफ्तार किया.

पंचमहल जिले की पुलिस अधीक्षक लीना पाटिल ने कहा गिरफ्तारी के समय कहा था कि रफीक हुसैन भटुक गोधरा कांड के आरोपियों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था, जो पूरी साजिश में लिप्त था. उन्होंने बताया कि रफीक हुसैन भटुक पिछले 19 सालों से फरार चल रहा था.

पाटिल ने बताया, “भटुक आरोपितों के उस मुख्य समूह का हिस्सा था, जिन्होंने गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन कोच को जलाने की पूरी साजिश रची थी, जिसके लिए उसने भीड़ को उकसाया और ट्रेन के कोच को जलाने के लिए पेट्रोल का इंतजाम किया था. जाँच के दौरान नाम सामने आने के तुरंत बाद वह दिल्ली भाग गया था.”

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को हुए गोधरा कांड में 59 कारसेवक मारे गए थे, जिसके बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे. भटुक ने ही इस पूरी घटना की साजिश रची थी, जिसके चलते जिंदा कारसेवकों को आग में झोंक दिया गया था. आज भी इस घटना को याद कर लोगों के रूह कांप जाते है.