कुतुब मीनार एक राष्ट्रीय स्मारक, बिना इजाजत नमाज़ पढ़ रहे थे मुस्लिम, किसी धर्म को नहीं है पूजा-पाठ की इजाज़त: ASI

ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा मंदिर को लेकर कानूनी लड़ाई के बीच, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि कुतुब मीनार कोई पूजा स्थल नहीं है. यहाँ किसी भी धर्म के लोगों को पूजा-पाठ या नमाज की अनुमति नहीं है. ASI ने यह भी दावा किया कि कुतुब मीनार एक स्मारक है और कोई भी इस तरह के ढांचे पर मौलिक अधिकारों का दावा नहीं किया जा सकता है. संस्था ने कहा कि इसकी पहचान को बदली नहीं जा सकती.

न पहचान बदली जा सकती है और न पूजा-पाठ की अनुमति दी जा सकती है: ASI

दिल्ली के साकेत कोर्ट में दायर याचिका में यहाँ जैन और हिन्दू समाज को पूजा-पाठ की अनुमति की माँग की गई थी. ASI से इस सम्बन्ध में न्यायपालिका ने जवाब माँगा था, जिसे अब दायर कर दिया गया है. संस्था ने कहा कि कुतुब मीनार सन् 1914 से ही ‘संरक्षित स्मारकों’ की सूची में आता है और इसके बाद से इसमें कभी पूजा हुई ही नहीं, इसीलिए अब न तो इसकी पहचान बदली जा सकती है और न ही इसमें पूजा-पाठ की अनुमति दी जा सकती है. संस्था ने हिन्दू पक्ष की याचिका को कानूनी तौर पर वैध नहीं बताया. साथ ही कहा कि प्राचीन मंदिरों को तोड़ कर कुतुब मीनार के निर्माण की बातें ऐतिहासिक तथ्यों का मामला है.

नमाज़ की भी नहीं मिलेगी अनुमति

वहीं क़ुतुब मीनार में नमाज की भी अनुमति नहीं मिलेगी. ASI ने कहा है कि ये एक निर्जीव स्मारक (Non Living Monument) है, इसीलिए ऐसे अन्य स्थलों की तरह यहाँ भी पूजा-पाठ, नमाज या किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियों की मनाही है. बता दें कि यहाँ मुस्लिमों ने आकर नमाज पढ़नी शुरू कर दी थी और बिना अनुमति कई वर्षों से ऐसा  चल रहा था. नमाजियों से जब अनुमति सम्बंधित दस्तावेज दिखाने को कहा गया तो वो कुछ नहीं दिखा पाए, जिसके बाद उन्हें वापस भेज दिया गया.