भारत में क्वीन एलिजाबेथ का मौत का राष्ट्रीय शोक, भारत के लिए राष्ट्रीय शर्म की बात

आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा भारत अब क्वीन एलिजाबेथ की मौत का राष्ट्रीय शोक भी मनाएगा. यह हवा हवाई बात नहीं है. भारत सरकार ने 11 सितंबर को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सम्मान में एक दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है. यह शोक वह भारत मनाएगा, जिसके किसी एक कोने में हर रोज एक बेटी जला दी जाती है, उसका बलात्कार हो जाता है, उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है. वह भारत जहां के अखबार के एक कोने में इस अभागी बेटी की मौत खबर मुश्किल से छप पाती है. वही भारत क्वीन एलिजाबेथ की मौत का राष्ट्रीय शोक मनाएगा.

उस भारत मे क्वीन की मौत का शोक मनाया जाएगा, जिस भारत मे अंग्रेजों के शासन में 4 करोड़ लोग ऐसे थे, जो कभी भी अपना पेट नहीं भर पाते थे. उस वक्त भूख और गरीबी का खुला राज था और अंग्रेज उन भारतीयों को बैलों की भांति नथकर बग्गी की सवारी करते थे. वहां उसकी क्वीन की मौत का राष्ट्रीय शोक मनाया जाएगा.

उस भारत मे क्वीन की मौत का शोक मनाया जाएगा जहां 1901 में प्लेग के कारण 2 लाख 72 हजार भारतीय मारे गए, 1902 में 50 लाख भारतीय मरे, 1903 में 8 लाख भारतीय मारे गए और 1904 में 10 लाख भारतीय भूख, कुपोषण और प्लेग जैसी महामारी के कारण मारे गए.

तस्वीर – प्रतीकात्मक

उस भारत मे उसी ब्रिटेन की क्वीन की मौत का राष्ट्रीय शोक मनेगा. वहां मनेगा जहां 1918 में 12 करोड़ 50 लाख भारतीय इनफ्लूएंजा रोग के शिकार हुए. जिनमें से 1 करोड़ 25 लाख लोगों की मौत सरकारी तौर पर दर्ज हुई. वह भारत क्वीन एलिजाबेथ की मौत का शोक मनाएगा.

उस भारत मे जहां अंग्रेज अपने शासन में समान काम के लिए अंग्रेजों को भारतीयों से 10 गुना ज्यादा वेतन देते थे और जहां किसी भारतीय का जीवन कीड़े मकोड़ो से भी ज्यादा बदतर था. वह भारत क्वीन की मौत का राष्ट्रीय शोक मनाएगा.

जहां बंगाल में अकाल पड़ा था. लाखों लोग बेमौत मारे गए. लेकिन यही अंग्रेज सरकार यह कहते हुए सारा अनाज इंग्लैंड भेज दिया कि भारत को इसकी जरूरत नहीं. वह भारत उस क्वीन की मौत का शोक मनाएगा.

वह भारत जिसके मासूमों को जलियावाला बाग में भून दिया गया. बच्चों को गोलियां मार दी गईं. जहां के 10 साल से लेकर 70 साल तक के नागरिकों को फांसी चढ़ा दी गई या काला पानी भेज दिया कि वह अपनी आजादी मांग रहा. वह भारत उसी ब्रिटेन की क्वीन की मौत का शोक मनाएगा.

उस क्वीन की मौत का शोक, जिसने अपने 96 साल के जीवन काल मे उपर्युक्त किसी भी घटना, किसी भी त्रासदी, किसी भी जेल यात्रा, किसी भी उत्पीड़न के लिए एक शब्द तक माफी नहीं मांगी.

जिसके ऊपर बटवारे और उसमें करोड़ो पलायन, दंगा, मौत, बलात्कार और बीभत्सता तक का रंच भी फर्क न पड़ा. उसकी मौत पर शोक मनाया जाएगा?

क्या विडम्बना है?

प्रतीकात्मक तौर पर इस आदमी (जो तस्वीर है) को भारत की आजादी के लिए बलिदान देने वाले, काला पानी झेलने वाले और जेल की कोठरियों में अपने जीवन के महत्वपूर्ण समय बिताने वाला क्रांतिकारी समझा जाये.

जो आज भारत मे इंग्लैंड के क्वीन की बाद आये दुख के सैलाब को देख रहे हैं और सोच रहे हैं. हमने किन नमूनों के लिए अपना बलिदान दे दिया.

वास्तव में भारत मे क्वीन एलिजाबेथ का मौत का राष्ट्रीय शोक भारत के लिए राष्ट्रीय शर्म की बात है, किसी की मौत पर संवेदना प्रकट करना, दुख जाहिर करना, श्रद्धांजलि प्रकट करना स्वाभाविक भी है और कायदा भी. पर ब्रिटेन की महारानी की मौत का भारत को राष्ट्रीय शोक?

धिक्कार है.

-दीपक पाण्डेय