‘2047 तक भारत में इस्लामी शासन’: बिहार में संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, तलवारों और चाकुओं की दे रहे थे ट्रेनिंग

पटना पुलिस ने फुलवारी शरीफ इलाके में दो आतंकी संदिग्धों मोहम्मद जल्लाउद्दीन और मोहम्मद अतहर परवेज पर छापेमारी करते हुए देश को अस्थिर करने के लिए भयावह साजिश की बात करने वाले आठ पन्नों के चौंकाने वाले दस्तावेज बरामद किए हैं. दस्तावेज ‘2047 तक देश में इस्लामी शासन’ स्थापित करने की बात करते हैं.

PFI के झंडे हुए बरामद

पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से कई झंडे, पोस्टर, पर्चे बरामद किए हैं और इनमें से ज्यादातर झंडे कथित तौर पर चरमपंथी समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के थे. ये दस्तावेज पीएफआई की भारत विरोधी भावनाओं पर पर्याप्त प्रकाश डालते हैं. भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के पीएफआई के दृष्टिकोण का दस्तावेजीकरण करने वाले कागजात, मिशन को प्राप्त करने में अन्य राष्ट्रों की मदद लेने की भी बात करते हैं.

दस्तावेजों से सनसनीखेज खुलासे

दस्तावेज़ के एक अंश में कहा गया है कि पीएफआई को विश्वास है कि अगर 10% मुस्लिम आबादी इसके पीछे रैली करती है, तो यह  बहुसंख्यक समुदाय को अपने अधीन कर लेगा. पुलिस की छापेमारी में जिन दो संदिग्धों को पकड़ा गया है, वे भारत विरोधी गतिविधियों की साजिश रच रहे थे. पुलिस ने कहा कि वे स्थानीय लोगों को मार्शल आर्ट के नाम पर हथियार और हथियारों का प्रशिक्षण दे रहे थे और बहुसंख्यक धर्म के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए भी उकसा रहे थे. वे युवाओं के मन में अन्य धर्मों के लिए घृणा और शत्रुता जैसी भावनाएं पैदा करने के लिए भी जांच के दायरे में हैं.

SIMI से जुड़ा है अतहर परवेज

मोहम्मद जल्लाउद्दीन झारखंड पुलिस का एक रिटायर्ड सब-इंस्पेक्टर है, जबकि मोहम्मद अतहर परवेज SIMI का पूर्व सदस्य हैं और वर्तमान में पीएफआई और एसडीपीआई से भी जुड़ा हुआ है. SIMI एक आतंकवादी संगठन है और देश में वर्षों पहले प्रतिबंधित कर दिया गया था.

तलवारों और चाकुओं की दे रहे थे ट्रेनिंग

पटना के एसएसपी मनीष कुमार के मुताबिक, ये आतंकी संदिग्ध स्थानीय लोगों को तलवार और चाकुओं का इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दे रहे थे. उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को इन लोगों ने धार्मिक हिंसा भड़काने के लिए उकसाया था. आरोपी एक साजिश रच रहे थे जिसका मकसद युवाओं को इस्लामिक मकसद के लिए प्रशिक्षित करना था. उनके पास आने वालों में दूसरे राज्यों के युवा भी शामिल थे, जो अपनी पहचान उजागर करने के बजाय टिकट बुक कर सकते थे और होटलों में ठहर सकते थे.