हिन्दुओं के दर्द पर हंसता हूं: कभी कट्टर हिन्दू बनता हूं, कभी कहलाता हूं ‘कालनेमि’, मेरा नाम ‘अरविन्द केजरीवाल’

इतिहास गवाह है कि बॉलीवुड ने हमेशा अच्छा मुस्लिम वाले कांसेप्ट को सपोर्ट किया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि उन्होंने मुल्ले – मौलवियों के महिमामंडन में कोई कसर अधूरी छोड़ी हो. हमेशा से ही बॉलीवुड में मूल्य मौलवियों को सौम्य में और ब्राह्मण महाजनों को खून चूसने वाला दिखाया जाता है. ‘लाला मेरे मां के कंगन वापस कर दे…’ से लेकर ‘फलां सेठ/ साहूकार बहुत बड़ा चोर…’ तक इस इंडस्ट्री ने कभी भी इस्लामिक कट्टरवाद की निंदा की जहमत नहीं उठाई. अब जबकि बॉलीवुड में मुस्लिमों को नाराज करने के लिए कोई अपना पैसा नहीं लगाना चाहता है. ऐसे में एक निर्माता (Vivek Agnihotri) ने इस्लामिक कट्टरवाद की सच्चाई दिखा कर बॉलीवुड के जरिए हिंदुओं के जेहन में राष्ट्रवाद का बिगुल फूंक दिया है. सोशल मीडिया पर तो लोग यहां तक कह रहे हैं कि यह बॉलीवुड की एक ऐसी अकेली फिल्म है जिसे 100 करोड़ हिंदुओं को जगाने के लिए बनाया गया है.

The Kashmir Files को टैक्स फ्री करने के नाम पर अरविन्द केजरीवाल ने खूब ठहाके लगाए थे

हिंदुओं के नरसंहार पर कालनेमि की तरह हंसते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख केजरीवाल को जरा सी भी लज्जा नहीं है. हिंदू धर्म के नैतिक मूल्य यही हैं कि वीर पुरुष दुश्मनों के शव देख कर भी कभी हंसते नहीं. रामायण और महाभारत इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं. जब युद्ध के समय में दोनों ओर कि सेनाएं एक दुसरे के आमने-सामने होती हैं. तब एक ओर की सेना की क्षति होती है, तो दूसरी ओर की सेना अपनी विपक्षी सेना के समूह को शवों को सम्मान पूर्वक उनके स्थान पर भिजवाने का कार्य करती है अथवा उनके घर भिजवाती है. लेकिन केजरीवाल का ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) को लेकर इस तरह से हंसना कहीं न कहीं उनके हिंदुओं से नफरत को दिखाता है. आखिर केजरीवाल इस फिल्म को लेकर या इस फिल्म को टैक्स फ्री किए जाने को लेकर इतनी बुरी तरह क्यों हंसे? केजरीवाल ने कहा कि इस फिल्म को फ्री में यूट्यूब पर दिखाना चाहिए. क्या जिस समय विवेक अग्निहोत्री को फिल्म बनाने को लेकर मुस्लिम नाराज हो रहे थे या फिर जिस समय इस फिल्म के निर्माण की भूमिका तैयार की जा रही थी. जब विवेक अग्निहोत्री मुश्किल में फंसे क्या अरविंद केजरीवाल विवेक अग्निहोत्री की मदद करने गए थे ? क्या उन्होंने इस फिल्म के निर्माता खोज कर देने कि कोशिश की ? क्या उन्होंने बॉलीवुड के तथाकथित ए-लिस्टर सुपरस्टार्स को जाकर मनाया कि वह घाटी का सच्चा इतिहास दिखाने वाली इस फिल्म में काम करें ? क्या उन्होंने कभी किसी कश्मीरी पंडित से उधर का हाल जाना ? यदि इसका जवाब नहीं है. तो फिर वह अब किस हक से इस फिल्म को मुफ्त में दिखाने की मांग कर रहे हैं ? मुफ्त का तो छोड़िए जनाब, मानवीय सभ्यता यह भी है कि लोग मुफ्त की चीजों की कदर नहीं करते.

यह तस्वीर अरविन्द केजरीवाल के अयोध्या दौरे की है, जब वे खुद को हिन्दू साबित करने में लगे थे

हमने पहले ही बता दिया था कि बॉलीवुड हमेशा से अच्छा मुसलमान वाले कांसेप्ट का सपोर्टर रहा है. चाहे वह ‘शोले’ फिल्म में गांव में बिजली न होने पर लाउडस्पीकर का बजना हो, या ‘बजरंगी भाईजान’ में पवन चतुर्वेदी नाम के ब्राह्मण का खुद मांस न खाकर के मुस्लिम बच्ची को मांस खिलाना. यह सब छोटी छोटी बातें हैं बताने के लिए. जिस समय द कश्मीर फाइल्स को बनाने के लिए कोई निर्माता तैयार नहीं था. इस फिल्म को विवेक अग्निहोत्री की पत्नी पल्लवी जोशी के साथ-साथ हैदराबाद के अभिषेक अग्रवाल ने मिलकर प्रोड्यूस किया. अभिषेक अग्रवाल ने जब सुना कि विवेक अग्निहोत्री इस तरह की कोई फिल्म बना रहे हैं, तो उन्होंने खुद उन्हें फोन कॉल करके इसका निर्माता बनने की इच्छा जताई. कोई भी बड़ा सुपरस्टार वैसे भी इस फिल्म में काम करता नहीं. आमिर खान पीके में भगवान शिव का मजाक बनाते हैं. शाहरुख खान माय नेम इज खान जैसी फिल्मों के माध्यम से इस्लामी आतंकवाद की बात करते हैं. तांडव में भगवान शिव के मॉडर्न स्वरूप को दिखाया जाता है. यह सब चीजें बॉलीवुड में चलती रहती हैं.

अब बात करते हैं यूट्यूब की. जैसा कि केजरीवाल ने कहा कि द कश्मीर फाइल्स को यूट्यूब पर फ्री दिखाना चाहिए. यूट्यूब छोड़ दीजिए. धड़ाधड़ हिंदुओं को बदनाम करने वाले वेब सीरीज रिलीज करने वाले ओटीटी प्लेटफार्म की बात करते हैं. विवेक अग्निहोत्री ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ने द कश्मीर फाइल्स को रिलीज करने के लिए साल 2020 में उनसे संपर्क किया था. यह तब की बात है कि जब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के वजह से सिनेमाघर पूरी तरह बंद हैं. बड़े निर्माताओं को अपनी फिल्म रिलीज करने के लिए Netflix, अमेजॉन प्राइम, हॉटस्टार, सोनी लाइव और जी फाइव जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म का सहारा लेना पड़ा था. ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रमुख ने उनसे पूछा कि क्या फिल्म में आतंकवाद को लेकर किसी विशेष शब्द का इस्तेमाल किया गया है तो वे चकित रह गए. विवेक के अनुसार, प्लेटफार्म के मुखिया का कहना था कि एक फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते. उनसे स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि हमारी एक वैश्विक नीति है. हम अपनी किसी फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं.

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अरविंद केजरीवाल की बात करें तो अरविंद केजरीवाल खुद फिल्मों के इतने बड़े शौक़ीन  हैं कि उन्होंने दिल्ली में कई फिल्मों को टैक्स फ्री किया था और कई फिल्मों की तारीफ भी की थी. कबीर खान द्वारा निर्देशित रणवीर सिंह की फिल्म ‘83’ जिसमें पाकिस्तानी फौज का महिमामंडन किया गया था, उसे टैक्स फ्री किया. जुलाई 2016 में उन्होंने ‘मदारी’ फिल्म को लोगों को देखने की सलाह दे डाली थी. जिसमें इरफान खान के लिए ‘छा गए’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया था. अक्टूबर 2014 में भी उन्होंने रितिक रोशन की ‘बैंग बैंग’ फिल्म अपनी पूरी फैमिली के साथ देखी थी और उन्होंने इस बाबत बताया था कि उनके बच्चों को भी यह फिल्म काफी पसंद आई. उन्होंने फिल्म के म्यूजिशियन विशाल ददलानी को भी इसके लिए बधाई दी थी. जिसके बाद विशाल ददलानी ने आम आदमी पार्टी के लिए कई बार चुनाव में भी प्रचार किया था. उन्होंने 2016 में स्वरा भास्कर की फिल्म ‘नील बटे सन्नाटा’ को भी दिल्ली में टैक्स फ्री किया था. इसके बाद उन्होंने 2017 में श्रीदेवी की ‘मॉम’ की भी तारीफ की थी. अरविंद केजरीवाल ने जुलाई 2015 में मसान फिल्म को मस्ट वॉच बताया था. उससे पहले उन्होंने हिंदू देवी देवताओं का मजाक बनाने वाले आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ की तारीफ करते हुए कहा था कि एक नाजुक विषय को सटीक तरीके से दिखाया गया है. नवंबर 2015 में उन्हें ‘वंस अपॉन अ टाइम इन बिहार’ पसंद आ गई थी. अक्टूबर 2017 में उन्हें आमिर खान की सीक्रेट सुपरस्टार भी अच्छी लगी थी. फरवरी 2016 में उन्होंने सोनम कपूर की ‘नीरजा’ को काफी प्रेरक फिल्म करार दिया था. तापसी पन्नू और भूमि पेडणेकर के फिल्म ‘सांड की आंख’ को उन्होंने 2019 में टैक्स फ्री घोषित किया था. क्या उन्होंने इसके लिए पूछा कि निशानेबाजी पर बनी फिल्म सांड की आंख से निशानेबाजों को कितने रुपए की मदद की गई ? अरविंद केजरीवाल की याद करना चाहिए कि मार्च 2018 में उन्होंने ‘हमने गांधी को क्यों मारा’ देखी थी. और उन्होंने इसके साथ ही आज के समय में प्रशासन की स्थिति को भी बताया था. 2016 में शाहिद कपूर की फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ देखकर उन्होंने वहां की स्थिति को काफी खराब बताया था. अब जब अरविंद केजरीवाल फिल्मों के इतने बड़े शौकीन हैं तो उन्हें कश्मीरी हिंदुओं पर बनी फिल्म से इतना परहेज क्यों है? शायद हो सकता है कि हिन्दुओं के दर्द पर बनी यह फिल्म वामपंथियों के सीने पर सांप बनकर लोट रही हो.