हिन्दू छात्र को धर्म से समझौता न करने की मिली सजा: “मुस्लिम छात्रों के झूठे आरोप पर यूनिवर्सिटी ने किया निलंबित

वामपंथियों और इस्लामी कट्टरपंथीयों का कारनामा इस बार उत्तर भारत से होते हुए दक्षिण तक जा पहुंचा है. बेंगलुरु के अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने एक हिन्दू छात्र ऋषि तिवारी को वामपंथी विचारधारा न मानने पर निलंबित कर दिया है. छात्र ने यूनिवर्सिटी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि हिन्दू होने के कारण वामपंथी छात्रों द्वारा उन्हें परेशान किया जा रहा है. इसके अलावा वामपंथियों और इस्लामी कट्टरपंथीयों का साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन भी कर रहा है. ऋषि ने बताया कि किसी बात को लेकर उनका मुस्लिम छात्रों से कुछ विवाद हो गया था. ज्सिके बाद उसे निलंबित कर दिया गया है.

ऋषि तिवारी ने द फ्रंट फेस इंडिया से फोन पर हुई वार्तालाप में बताया कि उसने 2020  में एमए डेवलपमेंट का कोर्स करने के लिए अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था. उसके बाद से उसे यहाँ हिंदू होने के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ा है. तिवारी को संस्थान के प्रोफेसरों और अन्य शिक्षकों द्वारा बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़कर आने के लिए टारगेट किया गया, क्योंकि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी को ‘दक्षिणपंथी’ और उनकी आस्था हिंदू धर्म का गढ़ माना जाता है. इस भेदभाव के खिलाफ तिवारी अपनी आवाज उठाई और संस्थान के निदेशक को शिकायत पत्र लिखा.

ऋषि तिवारी द्वारा संस्थान के निदेशक को लिखा गया शिकायत पत्र
ऋषि तिवारी द्वारा संस्थान के निदेशक को लिखा गया शिकायत पत्र
ऋषि तिवारी द्वारा संस्थान के निदेशक को लिखा गया शिकायत पत्र

पत्र में तिवारी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि मुस्लिम छात्रों द्वारा उन्हें अपमानित किया जाता था, क्योंकि उन्होंने अपनी विचारधारा और धर्म से समझौता नहीं किया. एक बार उनके और एक अन्य छात्र (मुस्लिम) के बीच मामूली विवाद को कैंपस में ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ मुद्दे के रूप में बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया. जैसा कि तिवारी ने बताया, कॉलेज में प्लेसमेंट प्रक्रिया के दौरान चयन नहीं होने के कारण भी उन्हें प्रताड़ित किया गया.

पत्र में यह भी लिखा गया कि जब ऋषि तिवारी अपने हॉस्टल में लौट रहे थे, तभी ‘इस्लामी और वामपंथी विचारधारा’ वाले छात्रों के एक समूह ने उन्हें घेर लिया. उन्होंने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर हमला भी किया. द फ्रंट फेस इंडिया से बात करते हुए ऋषि ने कहा, “1 मई 2022 को रात करीब 8:45 बजे इस्लामवादी और वामपंथी विचारधारा के 8-10 छात्रों ने मुझे घेर लिया. उन्होंने मेरे लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया और मुझ पर हमला भी किया. अगले दिन यानी 2 मई की शाम करीब 6 बजे कुछ प्रोफेसरों और छात्रों ने मेरे खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और मुझे यूनिवर्सिटी से निकाले जाने की माँग की.“

वहीँ मुस्लिम छात्रों के एक समूह ने इस घटना को ‘इस्लामोफोबिया’ करार दिया था. इस समूह ने कॉलेज के परिसर में तिवारी के खिलाफ प्रदर्शन किया. उनके खिलाफ सोशल मीडिया खासकर इंस्टाग्राम पर कई पोस्ट किए. अपने खिलाफ कॉलेज में हुए प्रदर्शन को लेकर तिवारी ने कहा, “जिस” तरह से यूनिवर्सिटी में छात्रों के एक समूह ने मुझे सांप्रदायिक बना दिया है. उससे मैं यहाँ खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहा हूँ. इन सबके बावजूद एक भी अधिकारी ने मेरी बात नहीं सुनी और ना ही मेरा पक्ष जानने की कोशिश की. मेरा अंतिम सेमेस्टर पूरा होने वाला था और आने वाले कुछ महीनों में मुझे मेरी डिग्री मिलने वाली थी, लेकिन इस विवाद के बाद से मेरी डिग्री और नौकरी दोनों खतरे में हैं. मेरा परिवार आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है. पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. ऐसे में कुछ भी समझ नहीं आ रहा है.”

बता दें कि अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में हिन्दू कैलेंडर के किसी त्योहार पर छुट्टी नहीं है. जबकि ईद और बकरीद के दिन पूरे यूनिवर्सिटी में छुट्टी रहती है. एक ओर जहां सनातन धर्म को मानने वाले ऋषि को ‘फेस ऑफ़ इस्लामोफोबिया’ वताया जा रहा है. वहीँ यूनिवर्सिटी का इस्लाम प्रेम साफ़ झलक रहा है.

छात्र ऋषि तिवारी के निलंबन के बाद से देश के कई यूनिवर्सिटी के छात्र एक जूट हो गए हैं. वे इस मुद्दे को लेकर लगातार सोशल मीडिया पर ट्वीट कर रहे हैं. उनकी मांग है कि ऋषि तिवारी का निलंबन तत्काल रोका जाय. साथ ही ऋषि पर जो ‘फेस ऑफ़ इस्लामोफोबिया’ का आरोप लगाया है, उसे भी हटाया जाय.