उद्योगपति राहुल बजाज की शख्सियत का हर कोई लोहा मानता था

अभी खबर मिल रही है कि उद्योगपति और पूर्व सांसद पद्म भूषण राहुल बजाज का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. हालाँकि उन्हें गांधी परिवार के नजदीक होने और उनकी बेबाकी के लिए कई बार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी मृत्यू भारत के लिए एक बड़ी क्षति है.

कॉर्पोरेट जगत में उनकी शख्सियत ऐसी थी, जिसका हर कोई लोहा मानता था और उन्होंने ऑटो इंडस्‍ट्री को बतौर लीडर नया आयाम दिया है.

बात उस वक्त की है जब 2001 में बजाज ऑटो भारी मुसीबतों का सामना कर रही थी और होंडा, यामाहा व सुजुकी जैसे जापानी ऑटो प्‍लेयर्स भारतीय बाजार को नए सिरे से परिभाषित कर रहे थे.
ऐसा लग रहा था, अब बजाज अपने अंत पर है, लेकिन राहुल ने यहां से उसे उबारने की कमान अपने हाथ में ली.
राहुल बजाज ने अपनी प्रभावी मार्केटिंग से न केवल बजाज ऑटो को जल्‍द उबार लिया, बल्कि कंपनी को नया रूप दिया. उन्होंने लोकप्रिय मोटरसाइकिल पल्सर सीरीज के साथ बाजार में नए सिरे से पदार्पण किया और मार्केट में न केवल हर रिकार्ड तोड़े बल्कि आज भी वह ब्रांड युवाओं के बीच लोकप्रिय बना हुआ है.
वास्तव में राहुल बजाज ने 1970 और 80 के दशक में फर्म का निर्माण किया था. उन्होंने अरबों डॉलर के क्लब में शामिल होने के लिए कंपनी के राजस्व में बढ़ोतरी की. यह उनकी पहल थी कि चेतक और बजाज सुपर मॉडल भारतीय ऑटो बाजार में अग्रणी टू व्‍हीलर के रूप में उभरे.
मूल रूप से इतालवी वेस्पा स्प्रिंट पर आधारित चेतक दशकों से लाखों भारतीयों के लिए एक किफायती स्‍कूटर रहा है और इसे ‘हमारा बजाज’ के रूप में याद किया जाता है.
राहुल बजाज अपनी बेबाकी के लिए भी जाने जाते थे और उन्हें भारत में उनकी इस सबसे बड़ी विरासत के तौर पर हमेशा याद रखेगा.

ओम शांति ओम

दीपक पाण्डेय

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